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एक आइडिया जिसने 24 साल के लड़के को बनाया सफल सीईओ और करोड़पति बिजनेसमेन

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OYO Ceo Ritesh Agarwal
Ritesh Agarwal

OYO Ceo Ritesh Agarwal : घूमने के शौक और कुछ अलग करने की सोच ने दिया आइडिया

OYO Ceo Ritesh Agarwal : बिजनेस में सफलता पाने के लिए हर इंसान का सबसे बड़ा मूल-मंत्र होता है मार्केटिंग और बेहतर अनुभव, साथ ही हर तरह की समस्या का हल निकालने के लिए उस व्यक्ति के पास अच्छी काबिलियत होनी चाहिए.

लेकिन परेशानी की बात है कि इन सब चीजों को पूरा करने के लिए इंसान की आधी उमर गुजर जाती है तब जाकर वह एक सफल बिजनेसमैन बनता है.
हालांकि अगर इंसान के अंदर कुछ करने का जुनून हो तो उसे इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती, जैसे कि हमारे नए 24 वर्षीय युवा बिजनेसमेन रितेश अग्रवाल.
दरअसल होटलों की बुकिंग कराने वाली Oyo Room के सीईओ रितेश की गिनती आज उनके इसी जुनून की वजह से देश के सबसे यंग सीईओ में की जाती है.
इंडिया की 500 होटलों से टाईअप करने वाले रितेश ने अब मलेशिया के होटलों से भी टाईअप कर अपने बिजनेस को देश के बाहर फैलाना शुरु कर दिया है. वैसे, देखा जाए तो रितेश की कामयाबी का सफर इतना आसान नहीं था.
ओडिसा के छोटे से शहर बिसम में जन्मे रितेश बचपन से ही कुछ अलग करना चाहते थे. यही वजह थी की वो महज 8 साल की उम्र में ही कम्प्यूटर की कोडिंग करना सीख गए थे.
इसके बाद हर दिन उनकी रुचि इस कोडिंग में बढ़ने लगी और उन्होंने यह मान लिया कि उनका जुनून सिर्फ कोडिंग ही है.
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उन्होंने अपनी जिंदगी में आए हर ऐसे मौके का इस्तेमाल किया जिसमें वह कुछ नया सीख सकते थे. यहीं नहीं उन्होंने अपना खर्च निकालने के लिए छोटी सी उम्र में ही सिम कार्ड भी बेचा.
दसवीं कक्षा के बाद रितेश कोडिंग के क्षेत्र में आगे सीखने के लिए राजस्थान के कोटा आ गए और यहां पर इंटर तक की पढ़ाई करने के बाद वो दिल्ली चले गए जहां उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनेंस में लंदन के विश्वविद्यालय के द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम में चयनित किए गए
यहां पर उन्होंने मात्र तीन दिन रहने के बाद खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए कुछ दिनों तक छुट्टी लेने का फैसला किया और फिर कभी नहीं लौटे.

OYO Ceo Ritesh Agarwal

घूमने के शौक ने दिया आईडिया
बिजनेस को शुरू करने के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. रितेश बचपन से ही बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स, और मार्क जुकरबर्ग से बहुत प्रेरित थे और उनकी तरह ही अपनी लाइफ में कुछ करना चाहते थे.
Oyo रूम के शुरूआत के पीछे की कहानी जानना चाहें तो उसकी जड़ उनके नई-नई जगह घूमने से मिलती है. ऐसा इसलिए क्योंकि रितेश को घूमने का बहुत शौक था और इसी वजह से उन्हें कभी कभी ट्रैवल करते समय रूम्स की व्यवस्था करने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था.
इस दौरान उन्होंने देखा कि कभी कभी उन्हें बहुत सारे पैसे देकर भी बेकार सी जगह रहने को मिलती है और कभी कम पैसों में ही बहुत अच्छी जगह मिल जाया करती थी.
इस विषय के बारे में गंभीरता से सोचने के बाद उनके दिमाग में अपनी एक ऑनलाइन रूम बुकिंग कि वेबसाइट शुरू करने का आईडिया आया जिसमें कि लोगों को अच्छी सुविधा के साथ-साथ रहने के लिए अच्छी जगह मिल सके.
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OYE रुम शूरू करने में आई परेशानी
जून 2013 को उन्होंने 60 हजार रुपए का निवेश कर ओयो रूम्स की शुरुआत की, इस फर्म ने ऐसे होटलों से संपर्क साधा, जो उस समय तक कोई बड़ा ब्रांड नहीं थे.
होटल मालिकों को मनाने के बाद कंपनी ने उन्हें होटल में दी जाने वाली सुविधाएं बढ़ाने और स्टाफ को प्रशिक्षित करने के लिए भी कहा.
साथ ही ओयो ने उनकी ब्रांडिंग का पूरा बेड़ा उठाा लिया, इसके बाद देखते ही देखते इन होटलों का राजस्व बढ़ना शुरू हो गया और उनकी साल में अच्छी बचत भी होने लगी.
इसके बाद रितेश ने एक ऐप बनाया, जिसके जरिए लोग अपनी पसंद और बजट का होटल तथा रूम्स खुद बुक कर सकते हैं. खास बात यह रही कि कंपनी के शुरू होने के कुछ समय बाद ही उन्हें नए स्टार्टअप में निवेश करने वाली कंपनी वेंचर नर्सरी से 30 लाख का फंड भी प्राप्त हो गया.
मिलने लगे निवेशक
कम दामों पर बेहतरीन सुविधा के साथ ट्रेवर्ल्स को यह सिस्टम बहुत पसंद आने लगा और उन्होंने OYO रुम पर अपना विश्वास दिखाना शुरू कर दिया.
इसके बाद 2014 में ही दो बड़ी कंपनी लाइट स्पीड वेंचर पार्टनर और DSG कंज्यूमर पार्टनर ने उसमे चार करोड़ रुपए का निवेश किया और फिर 2016 में जापान की बहुराष्ट्रीय कंपनी सॉफ्टबैंक ने भी 7 अरब रुपए का निवेश किया जो कि नई कंपनी के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी.
लेखक भी हैं रितेश
जब रितेश 17 साल के हुए तब उन्होंने बेस्ट सेलिंग किताब लिखी जो ‘दी इंसाइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन इंजीनियरिंग कॉलेज’ नाम से काफी लोकप्रिय रही. इसके अलावा वो इसी साल भारत के सबसे युवा सीइओ भी बने हैं .