Pak Returned Geeta: मां की भूमिका में विदेश मंत्री, अब देश में उठने लगी ‘’सुषमा स्वराजवाद’’ की आवाज

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Pak Returned Geeta: गीता के मां-बाप का पता लगाने पर 1 लाख इनाम

Pak Returned Geeta: सुषमा स्वराज भले ही भारत की विदेश मंत्री के रूप में कार्यरत हों, लेकिन उनकी पहचान आज देश के एक ऐसे राजनेता के रूप में बन गई है जिनसे कोई भी व्यक्ति अपनी मदद की गुहार लगा सकता है.

पिछले तीन साल में जब भी किसी भारतीय पर विपदा आन पड़ी हो, उन्होंने अपनों से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर विश्वास जताया है. और हर बार सुषमा स्वराज उनके इस विश्वास पर खरी भी उतरी हैं
आज शायद अपने इसी अंदाज से विदेशमंत्री ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत रखा है. इसीलिए तो अब देश में यह आवाज उठने लगी है कि देश की राजनीति को अब ‘सुषमा स्वराजवाद‘ की जरुरत है.

पाकिस्तान से लौटी गीता की मां बनीं सुषमा

Pak Returned Geeta: 2015 में पाकिस्तान से लौटी मूक-बाधिर लड़की गीता की कहानी तो आप सब ने सुनी होगी.
जी हां वही गीता जिसे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों द्वारा पाकिस्तान से भारत उसके असली मां बाप से मिलवाने के लिए लाया गया था.
गीता को यहां लाने के बाद सुषमा स्वराज ने खुद उसके माता-पिता को खोजने का प्रयास किया. मगर इसके बावजूद उनका अभी तक कुछ पता नहीं लग सका है.
इसी बात से चिंतित सुषमा स्वराज ने अब लोगों से अपील की है कि जो भी गीता को उसके माता-पिता के बारे में पता लगाने में सहयोग करेगा उसे उनकी तरफ से 1 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा.
इसके साथ ही उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अगर गीता के माता-पिता मिल जाते हैं तो इससे अच्छी बात कोई नहीं होगी, लेकिन अगर किसी कारण वश वो नहीं मिलतें हैं तो वह स्वयं उसकी देखभाल करेंगी. लेकिन वह गीता को अकेले नहीं छोड़ेंगी.
इसके साथ ही उन्होंने अपने वीडियो संदेश में यह भी कहा कि वो गीता की पढ़ाई व शादी समेत सारा खर्चा खुद उठाएंगी.
10 हजार भारतीयों को खाड़ी देशों से सकुशल निकाला
आपको बता दें कि जुलाई 2016 में वर्षों से खाड़ी देशों में फंसे करीब 10,000 भारतीयों की वापसी में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सक्रिय भूमिका निभाई थी.
दरअसल, इनमें से दो युवकों ने दुबई स्थित भारतीय एंबेसी से ऑनलाइन संपर्क किया था. जिसके बाद विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने यह बात सुषमा स्वराज को बताई.
 जैसे ही विदेश मंत्री को यह बात पता लगी, उन्होंने तुरंत ही इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कार्यवाई शुरु कर दी.
आपको बता दें कि ये सभी भारतीय खाड़ी देशों में रोजगार की तलाश में गए हुए थे, लेकिन कंपनियों से वेतन ना मिलने के कारण एक साल से अधिक समय से वहां बिना पैसों के गुजारा कर रहे थे.
भारतीय ही नहीं, दुश्मन देश की महिलाएं भी फैन
ऐसा नही है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सिर्फ भारतीयों के हित के बारे में ही सोचती है. उन्होंने अब तक के अपने शासनकाल में हर उस व्यक्ति की मदद कि जिसने उनसे गुहार लगाई.
और शायद इसी वजह से सुषमा स्वराज को जितना भारत में पसंद किया जाता है ठीक उतना ही पाकिस्तान के लोग भी उनके इस मददगार छवि के कायल हैं.
आपको याद होगा कि कुछ समय पूर्व भारत-पाकिस्तान के संबंधों में तनातनी को देखते हुए एक तबके ने यह आवाज उठाई थी कि भारत में पाकिस्तानी महिलाओं को दी जाने वाली सरकारी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा योजनाओं को समाप्त कर दिया जाए.
लेकिन तब विदेश मंत्री ने इसे सिरे से खारिज करते हुए उस समय कहा था कि भारत के लिए भावनाओं से ज्यादा मानवता महत्व रखती है.
गौरतलब है कि पाकिस्तान की 35 प्रतिशत महिलाएं भारत की सरकारी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं का लाभ लेती हैं.
सुषमा स्वराज के आचरण से सीख लें राजनेता
आज देश की राजनीति संकट के दौर से गुजर रही है.  विवादित बोल हो, या गबन के मामले या अभद्र व्यवहार. राजनेताओं का इनसे खास लगाव उनकी छवि को धुलमुल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही.
वहीं सुषमा स्वराज ने इन लोगों से अलग अपनी छवि एक ऐसी राजनेता की बनाई हैं. जिनका कद बढ़ने पर भी उनके भीतर अहंकार नहीं आया, बल्कि वह और निखरती गई.
उन्होंने एक बड़े पद पर होते हुए भी जिस तरह अपने अंदर शालीनता का गुण बनाए रखा उससे सभी राजनेताओं को सीख लेना चाहिए.
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