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गिलगिट-बाल्टिस्तान को अधिक अधिकार मिलने से भारत की बढ़ सकती है चिंताए, जानिए कैसे

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Pakistan Gilgit-Baltistan

Pakistan Gilgit-Baltistan : पाकिस्तान की सरकार ने यहां के लोगों को अन्य राज्यों जैसा ही अधिकार देने का फैसला किया है.

Pakistan Gilgit-Baltistan : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर गिलगिट-बाल्टिस्तान प्रांत के लोगों का अपने अधिकारों को लेकर किया जा रहा विरोध प्रदर्शन आखिरकार कारगार साबित हो गया है.

पाकिस्तान की सरकार ने यहां के लोगों को भी देश के अन्य राज्यों जैसा ही अधिकार देने का फैसला किया है, बता दें कि इसके लिए गिलगिट-बाल्टिस्तान के लोगों ने पीछले कई सालों से जमकर प्रदर्शन किए हैं
क्यूं चाहते थे अन्य राज्य जैसा अधिकार
गिलगिट-बाल्टिस्तान में अवैध कराधान को लेकर वहां के लोग काफी दिनों से पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रहे थे.
लोगों का कहना था कि पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट ने इस क्षेत्र को विवादित इलाका घोषित कर दिया है तो इस्‍लामाबाद में बैठी सरकार कैसे कोई टैक्‍स उनप लागू कर सकती है.
इसे लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों और स्थानीय लोगों का सीथा आरोप था कि पाकिस्तान सत्ता का दुरुपयोग कर रहा है.
इसके अलावा उनका यह भी मानना था कि यहां के लोगों का नेशनल असेंबली और सीनेट में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है इसी वजह से उनकी आवाज ठीक से सत्ता में बैठे हुक्मरामों तक नहीं पहुंच पा रही है.
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पाकिस्तान द्वारा करी गई अपेक्षा
पाक सरकार गिलगिट-बाल्टिस्तान को पांचवा विवादित वाला राज्य बनाने पर विचार कर रही है. दरअसल पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान को अब तक एक अलग भौगोलिक इकाई के रूप में देख रहा था.
बता दें कि 1974 में आजादी बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुई जंग में पाकिस्तान ने कश्मीर के कुछ हिस्सों को अपना बताते हुए कब्जा जमा लिया है जिनमें से गिलगिट-बाल्टिस्तान भी हैं.
इसके बाद पाकिस्तान की सरकार ने इसे विवादित क्षेत्र मानते हुए यहां के लोगों को कई विकासशील योजनाओं से वंचित रखा और कई मौकों पर अन्य राज्यों के मुकाबले इनकी अपेक्षा करी.
यही नहीं  यहां पर कई तरह के अप्रत्यक्ष कानूनों को लागू किया गया जो वहां के लोगों को परेशान करने जैसा था.
इन्ही सब बातों को लेकर पिछले कुछ महीनों से गिलगिट-बाल्टिस्तान की जनता विरोध प्रदर्शन कर रहे थी, जिसमें उनकी प्रमुख मांग पाकिस्तान के अन्य राज्यों के समान अधिकार दिया जाना था.
पाकिस्तान सरकार का फैसला ऐतिहासिक
प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक मे इस बात पर सहमित बनी है कि गुलाम कश्मीर और कश्मीर तथा गिलगिट-बाल्टिस्तान दोनों ही क्षेत्रों में प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार दिया जाएगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानिय नागरिकों को खुश करने के लिए पांच साल के लिए कर से छूट भी दी गई,ताकि छूट से जो राशि बचेगी उसका इस्तेमाल इस क्षेत्र के विकास के लिए किया जा सके.
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भारत ने जताया विरोध
गिलगित-बाल्टिस्तान प्रांत से ही चीन का बनाया जा रहा आर्थिक गलियारा सीपीईसी गुजरता है, ऐसा माना जाता है कि गिलगित-बाल्टिस्तान का दर्जा स्पष्ट ना होने को लेकर चीन की अनिश्चितता को देखते हुए पाकिस्तान ने यह कदम उठाया है.
हालांकि पाकिस्तान के इस फैसले से अब वहां के लोगों द्वारा चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शन शांत होने की उम्मीद है, और साथ ही साथ उनके बीच मुल्क की अच्छी छवि भी मन में बन सकती है.
लेकिन कुछ माएनों में भारत की रणनीति के लिए पाकिस्तान का ये फैसला थोड़ा चोट पहुंजाने जैसे है.  क्योंकी वहां पर होने वाली शांती की वजह से चीन आसानी से अपनी सीपीईसी गलियारे को तैयार कर सकता है जिसका विरोध भारत शुरू से ही कर रहा है.
वहीं इसकी दूसरी वजह यह भी है कि गिलगित-बाल्टिस्तान भारत की सीमा से सटा प्रांत है और ये इलाका 1947 में  दोनों देशों के बीच हुई जंग में पाकिस्तान द्वारा कब्जा किया हुआ जिसपर भारत भी अपना हक जताता  है.
ऐसे में पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र को पांचवां प्रांत घोषित करने की पाकिस्तान की कोशिश भारत के लिए अच्छी बात नहीं हालांकि भारत ने इस फैसले को पूरी तरह से अस्वीकार्य किया है, क्योंकी विवादित क्षेत्र में पाकिस्तान और चीन की बढ़ती पैठ हमारे देश के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा हो सकती है.