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अब हर युवा पढ़ेगा हिंदू ग्रंथ, प्रधानमंत्री मोदी सौंपेंगे हिंदू ग्रंथ का नया अवतार

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हिंदू | hindu
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विज्ञान के युग में आधुनिकीकरण से धार्मिक ग्रंथ भी नहीं बच पाए. इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 20 सितंबर को नई दिल्ली में हिंदू धार्मिक ग्रंथों के छोटे स्वरूप का विमोचन करने जा रहे हैं.

इन छोटे धार्मिक संस्करणों में विशाल हिंदू ग्रंथ को मात्र 105 फोटो व 325 पेजों में प्रस्तुत किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि आज की पीढ़ी के युवाओं को हिंदू धार्मिक ग्रंथों का ज्यादा से ज्यादा ज्ञान कराया जा सके.
इन धार्मिक ग्रंथों का सूक्ष्म रूप तैयार करने वाले जगतगुरू विश्वकर्मा शंकराचार्य प्रयागराज ने हरिद्वार में बताया कि उन्होंने 105 फोटो व 325 पेजो में हिंदू धार्मिक ग्रंथ का छोटा संस्करण लिखा है.
उन्होंने बताया कि देश में धार्मिक ग्रंथ बड़े व जटिल भाषा में होने के कारण युवा उनसे दूर हो रहे हैं, इसलिए उन्होंने यह प्रयोग किया.
उन्होंने कहा कि क्योंकि समस्या पूरे देश से जुड़ी हुई है, इसलिए इस पुस्तक का विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से कराया जाएगा क्योंकि युवाओं में उनकी खासी लोकप्रियता है.

अब युवा धार्मिक ग्रंथ में लेंगे रूचि

जगतगुरू ने बताया कि इसे बनाने में उन्हें करीब एक वर्ष से अधिक का समय लग गया. इसमें युवाओं की रूचि का विशेष ध्यान रखा गया है, हर एक छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है, जिससे जिज्ञासा बनी रहे और वे पुस्तक को अंत तक पढ़े बिना न रूकें.

धर्म का ज्ञान न होना शर्म की बात

हमारे देश को धर्मनिर्पेक्ष देश के रूप में जाना जाता है, यहां सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है, लेकिन एक हिंदू होने के नाते अपने धर्म के प्रति आस्था रखना हमारा परम सिद्ध कर्तव्य होना चाहिए .
भले ही हम पाकिस्तान के तरह कट्टर धर्मपंथी न बनना चाहें, लेकिन अपने हिंदू धर्म का हमें ज्ञान तो होना ही चाहिए.
21वीं सदी में यह देखने में आया है कि आधुनिकता के रंग में हम इतने रंग गए कि मन से धार्मिक आस्था का भाव ही गायब होने लग गया. जिन धार्मिक ग्रंथों एवं पुराणों ने हमें धार्मिक अस्तित्वता दी, हमने उन्हें ही भुला दिया.

इंटरनेट ने हाथों से छीन ली किताबें

इंटरनेट के युग में युवा पीढ़ी डिजिटल होती जा रही है. जब से इंटरनेट प्रचलन में आया है युवाओं के हाथों से किताबें दूर हो रही हैं. वह अपने स्कूल के पाठ्यक्रम की किताबें तक पढ़ना पसंद नहीं करते. यही कारण है कि समय की मांग को देखते हुए अब कालेजों में पाठ्यक्रम को डिजिटल फॉर्म(मेल, पैन ड्राइव) में मुहैया कराया जाने लगा है.
इसी कारण हिंदू धार्मिक गुरुओं को भी प्रतीत हुआ कि अगर युवाओं में धार्मिक आस्था को बरकरार रखना है तो इसके लिए समय के साथ हिंदू धार्मिक ग्रंथों की शक्ल में भी बदलाव करना जरूरी है.