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वाह प्रधानमंत्री जी, आपके नोटबंदी से ज्यादा तो रिजर्व बैंक के आकड़ों ने झटका दे दिया

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नोटबंदी | demonetisation
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वाह प्रधानमंत्री जी.. नोटबंदी में इतनी तकलीफ झेलकर भी आपका साथ दिया औऱ आपने एक झटके में ही…

8 नवंबर की रात 12 बजकर एक मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, और नोटबंदी की घोषणा. जैसे ही यह खबर लोगों तक पहुंची पूरा देश अचंभित हो गया.

लेकिन जब हमारे प्रधानमंत्री जी ने लोगों को राष्ट्र प्रेम के सूत्र में बांधा तो देशवासियों ने सोचा कि अगर देशहित में तकलीफ भी झेलनी पड़ी तो वह पीछे नहीं हटेंगे.
अनाज का पड़ा सूखा,किसानों ने करी आत्महत्या
नोटबंदी के दौरान लाखों घरों में अनाज का सूखा पड़ गया, कई रोजगार के साधन ठप्प हो गए. नोटबंदी की मार लोगों पर ऐसी पड़ी कि सालों से अपनी पोठली में पाई-पाई जोड़कर रखी गई उनकी मेहनत की कमाई एक झटके में कागज की रद्दी में तब्दील हो गई.
इस नोटबंदी से हताश किसान के सामने फसल के लिए पैसों का संकट खड़ा हो गया, जिससे जूझते हुए दर्जनों किसानों ने मौत को गले लगाना ही आखिरी चारा समझा.
आपकों बता दें कि नोटबंदी के दौरान देशभर मे करीब 45 किसानों ने आत्महत्या की थी.

अपने वायदे से पलटी मोदी सरकार

आपको याद होगा कि नोटबंदी के फैसले के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि नोटबंदी से 5001000 रूपये के नोटों को अर्थव्यवस्था से बाहर कर दिया जाएगा.
उन्होंने उस समय देश को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि कालेधन के रूप में इन नोटों को प्रचलन से बाहर करने से देश की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी. लेकिन आज मोदी सरकार अपनी ही कही बात को भूला बैठी है.
विश्वासघात : रिजर्व बैंक की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के बाद 1000 रूपये के करीब 99 फीसदी नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ चुके हैं, मात्र 1.4 प्रतिशत नोट ही प्रचलन में नहीं आ पाए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी से पहले 1000 रूपये के 632.6 करोड़ नोट चलन में थे, जिसमें से मात्र 8.9 करोड़ नोट ही अर्थव्यवस्था में नहीं आ पाए हैं

नोटबंदी के बोझ से जीडीपी भी गिरी

नोटबंदी के बाद से अर्थव्यवस्था को देखें तो देश की जीडीपी में कुछ खास प्रगति भी नहीं देखी गई है, बल्कि नोटबंदी से देश के सैकड़ों उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं, जिनके कारण रोजगार का संकट गहरा गया.
वहीं देश की अर्थव्यवस्था की बात करें तो इस वर्ष के शुरू से अभी तक देश की जीडीपी में भारी गिरावट दर्ज की गई है. 2017 से पहले जहां देश की जीडीपी 7.9 थी. वहीं अब वह 5.7 पर सिमट गई है.
जानकार की माने तो वो इसे नोटबंदी का असर बता रहे हैं.

नोटबंदी से आम आदमी को क्या मिला

-मजदूर को उसकी मजदूरी नहीं मिली
-दर्द से तड़पते मरीजों का अस्पतालों में इलाज तक नहीं किया गया
-उद्योग बंद हो गए और लाखों परिवारों में पैसे कमाने वाले बेरोजगार होकर घर पर बैठ गए
-पैसे निकालने के लिए आम आदमी को घंटों तक तेज धूप में एटीएम के बाहर लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ा
इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए आज हम कहने को मजबूर हैं कि आम आदमी को नोटबंदी से कुछ खास नहीं मिला है.  हर वर्ग के लोगों ने किसी न किसी रूप में संघर्ष किया, तो किसी ने त्याग भी किया. मगर बदले में उसे क्या मिला सिवाए तकलीफें के.
लेकिन फिर भी आज हम यही कहेंगे कि जिस तरह हर आम आदमी ने नोटबंदी के दौरान तकलीफें सहीं, उसकी ईमानदारी औऱ निष्ठा को सलाम.