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ओडिशा के आपदा प्रबंधन से पूरे भारत को बहुत कुछ सीख लेना चाहिए

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ओडिसा
आपदा प्रबंधन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक
ओडिशा, भारत का एक ऐसा राज्य जो आज हर तरह की प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए खुद को तैयार कर चुका है. 1999 में आए भयंकर चक्रवात से सबक लेते हुए यह राज्य अपनी आपदा तैयारियों में एक आदर्श के रूप मे उभरा है.
दरअसल ओड़ीसा में 1999 में आए समद्री चक्रवात में 10,000 लोगों की मृत्यु हो गई थी.
जिससे सबक लेते हुए वहां की सरकार लगातार अपने राज्य के लोगों को आपदा से बचाने के लिए नए- नए तकनीकों पर काम करती चली आ रही है. जिसका नतीजा आज सबके सामने है.
सरकार की पहल
ओडिशा में मौसम पूर्वानुमान वाले डॉप्लर रडार का एक नेटवर्क बनाने की योजना बनाई जा रही है. गोपालपुर और पारादीप में पहले से ही चल रही इस योजना को बालासोर और संबलपुर में भी सरकार शुरू करने जा रही है.
इसके अलावा ओड़िशा सरकार ने अपने सभी अधिकारियों,ओडीआरएएफ के कर्मचारी, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन में लगे लोगों को निर्देश दे रखा है कि वो कमजोर क्षेत्रों में रहने वाले हर युवा नागरिक को आपदा के दौरान निपटने के लिए प्रशिक्षित करें
ओडिसा
लोगों की सहायता करते आपदा प्रबंधन कर्मचारी
भारत का पहला आपदा प्रबंधन केंद्र
गौरतलब है कि राज्य में आपदा से निपटने के लिए ओडिशा स्टेट आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए) की स्थापना 1999 में हुई थी. जबकि इसे बनाने का बिल 2005 में पारित हुआ था. यह भी अपने आप में किसी हैरान करने वाली बात से कम नहीं था.
चक्रवात आने से पहले और बाद तक का इंतजाम
राज्य में हाई टेक तकनीक के कारण चक्रवात आने का पता कम से कम 120 घंटे पहले ही पड़ जाता है. जिसके बाद अर्ली वॉर्निंग प्रसार प्रणाली (ईडब्ल्यूडीएस) तंत्र की मदद से पूरे राज्य में 480 किलोमीटर के समुद्र तट पर लगे 122 टॉवर से सायरन बजाकर सभी आबादी वाले इलाकों में चेतावनी दे दी जाती है.
ओडीडीएमए के मुख्य महाप्रबंधक कपिल मिश्र बताते हैं कि ओडिशा के कमजोर क्षेत्रों में लगभग 800 बहुउद्देशीय चक्रवात और बाढ़ आश्रय केंद्र बनाए गए हैं. जिन्हें आईआईटी खड़गपुर द्वारा डिजाइन किया गया है.
इसके अलावा सरकार ने ओडिशा आपदा रैपिड एक्शन फोर्स का भी गठन किया हुआ है. जिसमें आपदा से निपटने वाले उच्च प्रशिक्षित लोग मौजूद है. जो किसी भी वक्त बाढ़,चक्रवात,जैविक व परमाणु आपदाओं से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.