Home विशेष हमारे मौलिक अधिकारों की फेहरिस्त में जुड़ा निजता का अधिकार

हमारे मौलिक अधिकारों की फेहरिस्त में जुड़ा निजता का अधिकार

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Supreme Court Case Stay Decision
सुप्रीम कोर्ट
इन दिनों देश में निजता के अधिकार पर छिड़ी जंग ने निर्णायक मोड़ ले लिया है. सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने निजता (प्राइवेसी) को मौलिक अधिकार अनुच्छेद-21 के अंतर्गत स्वतंत्रता के अधिकार के अधीन माना है. इस फैसले को सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि निजता का अधिकार नागरिक का मौलिक अधिकार है.
कोर्ट ने कहा कि नागरिकों की निजी जानकारी एवं महत्वपूर्ण सूचना को एकत्र करना या फिर उस पर नजर रखना नागरिकों के स्वतंत्रता के अधिकार में घुसपैठ मानी जाएगी.
हालांकि अभी केंद्र सरकार के आधार लिंक संबंधित मामले में अलग से सुनवाई होना शेष है. सरकार ने निजता के मामले मे कोर्ट में कहा कि निजता का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसकी तर्कसंगत सीमाएं होना भी आवश्यक है.
इस बारे में सरकार का कहना है कि नागरिकों को स्वतंत्रता के अधिकार के नाम पर किसी भी अनैतिक व असवैंधानिक गतिविधियों की छूट नहीं दी जा सकती. जरूरत पड़ने पर कानून के तहत उन पर नजर रखना भी आवश्यक है.
निजता को मौलिक अधिकार मानने में कोर्ट भी उलझा रहा
वर्ष 1963 में खड़क सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के केस में पुलिस नियमन के तहत निगरानी का अधिकार वैध है या नहीं इस बारे में अदालत में लम्बी नूरा-कशी हुई थी. उस समय भी निजता को मौलिक अधिकार मानने या ना मानने के पीछे कई तर्क दिए गए थे.
इस पर न्यायालय के एक जज ने कहा था कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि इसे न्यायिक रूप से विकसित किया गया अधिकार है. मगर वहीं दूसरे न्यायाधीश ने निजता को मौलिक अधिकारों के साथ जोड़ा और कहा कि घूमने-फिरने की आजादी ही स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है. बल्कि किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी एवं सूचना उसकी अनुमति के बिना किसी अन्य व्यक्ति के पास पहुंचना भी स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है.
इसके बाद भी कई केस में न्यायालय भी निजता के अधिकार के मसले पर सुनवाई में रूख बदलता रहा है. लेकिन 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार का ही हिस्सा है.
कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा सरकारी योजनाओं में आधार लिंक करने पर कहा कि प्रत्येक जगह अपने आधार कार्ड को लिंक करना अनिवार्य नहीं हो सकता. केवल सरकारी वितरण प्रणाली जैसे रसोई गैस व राशन कार्ड में आधार लिंक अनिवार्य हो.
लो एक और मौलिक अधिकार मिल गया
हमारे देश में नागरिकों को मौलिक अधिकारों का बहुत ज्ञान होता है. मौलिक अधिकारों के बल पर वह अपने गलत कामों को भी मौलिक अधिकारों के जरिए संवैधानिक संरक्षण दिलाने में सफल रहते हैं.
भारत में मौलिक अधिकारों का पाठ खूब पढ़ाया जाता है, जिससे कहीं न कहीं नागरिकों की हालांकि राष्ट्र निर्माण में सहभागिता कम हो रही है. हालांकि अच्छा तो यह होता कि देश में मौलिक अधिकारों के बजाय मौलिक कर्तव्यों को अपनाने पर बहस छिड़ी होती.
सूचना प्रौद्योगिकी के युग में खुद बांट रहे जानकारियां
गजब की बात है एक तरफ लोग निजता के अधिकार की बात कर रहे हैं. वहीं वह सोशल साइट्स पर अपनी छोटी से छोटी जानकारियों को सार्वजनिक करते नजर आते हैं. ऐसे में निजता के लिए लड़ी जा रही यह लड़ाई महज धकोसला साबित होती है.
एक पक्ष यह भी
कई बार यह भी देखा जाता है कि सरकारें या अधिकारी किसी योजना या कार्यक्रम को प्रमोट करने के लिए व्यक्ति विशेष (सैलिब्रिटी) का सहारा लेतें हैं. जिसके लिए वो उस व्यक्ति से सहमति भी नहीं मांगते. कुछ महीनों पहले भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के आधार को बगैर अनुमति के सार्वजनिक किया गया था. इस पर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की पत्नी साक्षी ने कड़ा ऐतराज जताया था.
इस पर सरकार की भी काफी फजीहत भी हुई थी. लोगों का कहना था कि आधार नंबर का हमारी अनुमति के बगैर उपयोग करना उचित नहीं है.
गौरतलब है कि इस मामले के बाद ही देश में निजता के अधिकार की बहस शुरू हुई है.