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मंगल पर पहुंचने का जश्न.. रेल न चला पाने का मलाल, यह है भारत की उपलब्धि

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लो एक और रेल हादसा….. अभी यूपी के मुजफ्फरनगर में खतौली रेल हादसे को एक हफ्ता भर नहीं बीता था कि यूपी के ही औरेया जिले में एक और रेल हादसा हो गया. आजमगढ़ से दिल्ली आ रही कैफियत एक्सप्रेस कानपुर और इटावा के बीच हादसे का शिकार हो गई. यह हादसा औरेया जिले के पास अछल्दा रेलवे स्टेशन के नजदीक हुआ है. रात 2.40 मिनट पर हुए इस हादसे की मुख्य वजह ट्रेन का डंपर से टकराना माना जा रहा है.

इस्तीफे से रेल हादसे नहीं रुकेंगे

एक हफ्ते में दो रेल दुर्घटनाएं होने के कारण रेलममंत्री सुरेश प्रभु ने नैतिकता के आधार पर हादसे की जिम्मेदारी स्वीकारते हुए मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश की है.
इससे पहले रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं. मगर सवाल यहां यह उठता है कि क्या सिर्फ इस्तीफा भर देने से रेल हादसों में कमी आ सकती है. क्योंकि इस्तीफा तो लाल बहादुर शास्त्री ने भी रेल मंत्री रहते हुए दिया था. लेकिन रेल हादसों का सिलसिला आजतक नहीं थमा .

इन हादसों को रोकने के लिए सबसे पहले जरूरत है सफेद हाथी बने रेलवे विभाग की कार्यशैली में सुधार लाने की. इसके साथ ही आरामपसंद अधिकारियों के पंच कसकर सबकी सख्त मॉनीटरिंग करनी चाहिए. क्योंकि रेलवे विभाग ऐसा विभाग है जो सीधा केंद्र से संबध्द है, एक बार यहां नौकरी लग जाए तो कर्मचारी हो या फिर अधिकारी. हर कोई रेलवे की नौकरी को बपौती समझते हैं और ड्यूटी के दौरान अपनी नजरों को  घंटे की घूम रही सुंई पर टिकाए रहते हैं.

देश की उपलब्धियों में दाग हैं रेल हादसे

भारत एक ऐसा देश है जो मंगल तक पहुंच गया है. हमारे वैज्ञानिक अंतरिक्ष के क्षेत्र में रोज एक नई उपलब्धि हासिल करते रहते हैं. लेकिन वहीं दूसरी तरफ देश में आए दिन हो रहे रेल हादसे हमारी क्षमताओं पर प्रश्नचिह्न भी खड़ा करते रहते हैं.
एक तरफ हमारे देश में बुलेट ट्रेन को ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है, वहीं एक कड़वी हकीकत यह भी है कि हमारा देश ट्रेन का दुर्घटनारहित संचालन करने में नाकाम साबित होता रहा है. जिसका खामियाजा ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ता है.

रेल हादसों और भारत का दामन-चोली का है साथ

ऐसा नहीं है कि रेल हादसे देश में अभी ही होने शुरु हुए हों, आपको बता दें कि देश कईं दशकों से रेल हादसों का शिकार होता रहा है.

बात पिछले 37 वर्षों की करें तो इस अंतराल में देश की छाती में 31 रेल हादसों के जख्म हुए हैं, जिसके घाव अभी तक भर नहीं पाए हैं. इन रेल-हादसों में मरने वालों की संख्या 3,134 है. जो कि किसी भी देश से कईं ज्यादा है. बल्कि यह 31 रेल-हादसे तो मुख्य ही बताए गए हैं, इनमें 1-10 मरने वाले रेल-हादसों को तो गिना ही नहीं गया है.
इन रेल हादसों में 6 जून 1981 देश के रेल हादसों में सबसे बड़ा काला दिन माना जाता है, इस दिन बिहार में तूफान की चपेट में आई ट्रेन पुल से नीचे नदी में जा गिरी थी. इस हादसे में 800 यात्रियों को मौतें हुई, जबकि करीब 1000 घायल हुए थे.

1980 से रेल हादसों में आई तेजी

गौरतलब है कि देश में जिस तेजी से अब रेल दुर्घटनाएं हो रही हैं, वह 1980 से पहले बहुत कम थी. इसका कारण यह था कि 1980 से पहले देश में छोटे इंजन की रेल चलाई जाती थी, जिसमें 5-8 बोगियां (कोच) ले जाई जाती थी. उनसे हादसे कम ही होते थे.
इसके बाद बड़े इंजन को उपयोग में लाया जाने लगा, जिस पर अधिक संख्या में डिब्बे लगाए गए. जिसके बाद से इन रेल हादसों में बढ़ोत्तरी होने लगी.

37 वर्षों में हुए प्रमुख रेल हादसे

22 जनवरी 2017: आंध्रप्रदेश के विजयनगरम ज़िले में हीराखंड एक्सप्रेस के आठ डिब्बे पटरी से उतरने की वजह से क़रीब 39 लोग मारे गए.
20 नवंबर 2016: कानपुर के पास पुखरायां में एक बड़ा रेल हादसा हुआ जिसमें कम से कम 150 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई
10 मार्च 2015: देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में 34 लोग मारे गए थे.
4 मई 2014: दिवा सावंतवादी पैसेंजर ट्रेन नागोठाने और रोहा स्टेशन के बीच पटरी से उतर गई थी. इसमें 20 लोगों की जान गई थी और 100 अन्य घायल हुए थे.
28 दिसंबर 2013: बेंगलूरु-नांदेड़ एक्सप्रेस ट्रेन में आग लग गई थी और इसमें 26 लोग मारे गए थे. आग एयर कंडिशन कोच में लगी थी. उसी साल 19 अगस्त को राज्यरानी एक्सप्रेस की चपेट में आने से बिहार के खगड़िया ज़िले में 28 लोगों की जान चली गई थी.
30 जुलाई 2012: भारतीय रेलवे के इतिहास में साल 2012 हादसों के मामले से सबसे बुरे सालों में से एक रहा. इस साल लगभग 14 रेल हादसे हुए. इनमें पटरी से उतरने और आमने-सामने टक्कर दोनों तरह के हादसे शामिल हैं. 30 जुलाई 2012 को दिल्ली से चेन्नई जाने वाली तमिलनाडु एक्सप्रेस के एक कोच में नेल्लोर के पास आग लग गई थी जिसमें 30 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
07 जुलाई 2011: उत्तर प्रदेश में ट्रेन और बस की टक्कर में 38 लोगों की मौत हो गई.
20 सितंबर 2010: मध्य प्रदेश के शिवपुरी में ग्वालियर इंटरसिटी एक्सप्रेस एक मालगाड़ी से टकराई. इस टक्कर में 33 लोगों की जान चली गई और 160 से ज़्यादा लोग घायल हुए.
19 जुलाई 2010: पश्चिम बंगाल में उत्तर बंग एक्सप्रेस और वनांचल एक्सप्रेस की टक्कर हुई. 62 लोगों की मौत हुई और डेढ़ सौ से ज़्यादा घायल हुए.
28 मई 2010: पश्चिम बंगाल में संदिग्ध नक्सली हमले में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पटरी से उतरी. इस हादसे में 170 लोगों की मौत हो गई.
21 अक्तूबर 2009: उत्तर प्रदेश में मथुरा के पास गोवा एक्सप्रेस का इंजन मेवाड़ एक्सप्रेस की आख़िरी बोगी से टकरा गया. इस घटना में 22 मारे गए जबकि 23 अन्य घायल हुए.
14 फ़रवरी 2009: (रेल बजट के दिन) हावड़ा से चेन्नई जा रही कोरोमंडल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे ओडिशा में जाजपुर रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतरे. हादसे में 16 की मौत हो गई और 50 घायल हुए.
अगस्त 2008: सिकंदराबाद से काकिनाडा जा रही गौतमी एक्सप्रेस में देर रात आग लगी. इसके कारण 32 लोग मारे गए और कई घायल हुए.
21 अप्रैल 2005: गुजरात में वडोदरा के पास साबरमती एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी की टक्कर में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और 78 अन्य घायल हो गए.
फ़रवरी 2005: महाराष्ट्र में एक रेलगाड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई थी और इतने ही घायल हुए थे.
जून,2003: महाराष्ट्र में हुई रेल दुर्घटना में 51 लोग मारे गए थे और अनेक घायल हुए.
2 जुलाई, 2003: आंध्र प्रदेश में हैदराबाद से 120 किलोमीटर दूर वारंगल में गोलकुंडा एक्सप्रेस के दो डिब्बे और इंजन एक ओवरब्रिज से नीचे सड़क पर जा गिरे. इस दुर्घटना में 21 लोगों की मौत हुई.
15 मई, 2003: पंजाब में लुधियाना के नज़दीक फ़्रंटियर मेल में आग लगी. कम से कम 38 लोग मारे गए.
9 सितंबर,2002: हावड़ा से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई. इसमें 120 लोग मारे गए.
22 जून, 2001: मंगलोर-चेन्नई मेल केरल की कडलुंडी नदी में जा गिरी. 59 लोग मारे गए.
31 मई, 2001: उत्तर प्रदेश में एक रेलवे क्रॉसिंग पर खड़ी बस से ट्रेन जा टकराई. 31 लोग मारे गए.
2 दिसंबर, 2000: कोलकाता से अमृतसर जा रही हावड़ा मेल दिल्ली जा रही एक मालगाड़ी से टकराई. 44 की मौत और 140 घायल.
3 अगस्त, 1999: दिल्ली जा रही ब्रह्पुत्र मेल अवध-असम एक्सप्रेस से गैसल, पश्चिम बंगाल मे टकराई. 285 की मौत और 312 घायल.
26 नवंबर, 1998: फ्रंटियर मेल सियालदाह एक्सप्रेस से खन्ना, पंजाब में टकराई. 108 की मौत, 120 घायल.
14 सितंबर,1997: अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में एक नदी में जा गिरी. 81 की मौत, 100 घायल.
18 अप्रैल, 1996: एर्नाकुलम एक्सप्रेस दक्षिण केरल में एक बस से टकराई. 35 की मौत, 50 घायल हुए.
20 अगस्त, 1995: नई दिल्ली जा रही पुरुषोत्तम एक्सप्रेस कालिंदी एक्सप्रेस से फ़िरोजाबाद, उत्तर प्रदेश में जा टकराई. 250 की मौत, 250 घायल.
21 दिसंबर,1993: कोटा-बीना एक्सप्रेस मालगाड़ी से राजस्थान में टकराई. 71 की मौत और अनेक घायल.
16 अप्रैल, 1990: पटना के पास रेल में आग लगी. 70 की मौत.
23 फरवरी, 1985: राजनांदगाँव में एक यात्री गाड़ी के दो डिब्बों में आग लगी. 50 की मौत और अनेक घायल.
6 जून,1981: बिहार में तूफान के कारण ट्रेन नदी में जा गिरी. 800 की मौत और 1000 से अधिक घायल.