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U19 World Cup 2018 : कल हुए फाइनल मुकाबले में द्रविड ने कुछ ऐसे लिया भारतीय टीम के एक पुराने दुश्मन से बदला

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U19 World Cup 2018

U19 World Cup 2018 : चौथी बार खिताब जीतकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

U19 World Cup 2018 : पूरे U-19 World Cup  टूर्नामेंट में अपराजित रही भारतीय टीम ने आखिर में अपने फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को मात देकर वर्ल्ड कप जीत लिया.

चौथी बार इस जीत को हासिल करने वाले भारत की जीत किन खास कारणों की वजह से लिए बेहद खास है, आइए आपको बताते हैं
ऑस्ट्रेलिया को हराने वाला एकलौता देश
इस पूरे टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया को मात देने वाला एकलौता देश भारत ही है. बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब तक कुल दो बार अंडर 19 विश्व कप का खिताबी मुकाबला खेला गया है और दोनों ही बार टीम इंडिया ने कंगारुओं को धूल चटाकर ट्रॉफी अपने नाम की है.
2018 से पहले 2012 में भी इन दोनों टीमों का सामना अंडर 19 विश्व कप के फाइनल में हुआ था.जहां उस मुकाबले में भारत ने कंगारुओं को 6 विकेट से मात देकर विश्व कप जीत लिया था.
इसी के साथ ही वो पहला ऐसा मौका था जब किसी टीम ने अंडर 19 विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को मात दी थी.

U19 World Cup 2018

चौथी बार खिताब जीतकर बनाया विश्व रिकॉर्ड
गौरतलब है कि भारतीय अंडर 19 टीम के लिए ये चौथा मौका रहा जब उसने एक बार फिर विश्व कप की ट्रॉफी अपने हाथों में उठाई. यही नहीं इस जीत के बाद भारतीय U-19 टीम अब इस खिताब को सबसे ज़्यादा बार जीतने वाली टीम भी बन गई है.
2018 से पहले भारत को सबसे पहले वर्ल्ड कप मुहम्मद कैफ की कप्तानी में सन् 2000 में जीतने का मौका मिला, इसके बाद विराट कोहली (2008) और उन्मुक्त चंद (2012) की कप्तानी मे भी हम इस खिताब को अपने नाम करने में कामयाब रहे.
भारत के अलावा सबसे ज़्यादा बार अंडर 19 विश्व कप ऑस्ट्रेलिया की टीम ने जीता है. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने तीन बार 1988, 2002 और 2010 में विश्व कप पर अपना कब्जा जमाया है.
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अपने कोच रहे ग्रैग चैपल से जीते द्रविड़
इस मुकाबले की दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई अंडर 19 टीम के कोच भारतीय टीम के पूर्व कोच ग्रैग चैपल थे जिन्हें द्रविड़ ने अपने यंग ब्रिगैड की बदौलत हराकर खुद को उनसे बेहतर कोच साबित कर दिया है.
यह बात जगजाहिर है कि ग्रेग चैपल ने कोच रहते हुए भारतीय टीम में फूट डालने का काम किया था जिसका जिक्र सचिन तेंडुलकर से लेकर टीम के कई पुराने बल्लेबाजों ने भी किया है.
यह वही दौर था जब टीम का खेल प्रदर्शन भी काफी नीचे गिर गया था. जिसका उदाहरण हम सब साल 2007 के विश्व कप में बांग्लादेश से मिली हार से देख सकते हैं.
इस हार के बाद पूरी टीम को यह समझ आ गया था उनके कोच ग्रेग चैपल एक सोची समझी साजिश के तहत टीम को अंदर से खोखला कर रहें है.
चैपल ना सिर्फ टीम के प्रदशर्न को खराब किया बल्कि उन्होंने कई खलाड़ियों के कैरियर पर उंगली उटाते हुए उन्हें अपमानित भी किया जिसमें सौरव गांगुली का नाम पहले आता है.
दरअसल भारत की इस जीत में कोच राहुल द्रविड़ की अहम भूमिका मानी जा रही है. द्रविड़ ने जिस तरह पिछले 2 सालों में अपनी मेहनत से इस नौजवानों की टीम को विश्व विजेता बनाया वो अपने आप में काबिले तारीफ है.
वहीं टीम के सभी खिलाड़ी भी अपने द्रविड सर को इस जीत का पूरे श्रेय दे रहे हैं. यही नहीं भारतीय टीम के सीनियर खिलड़ियों ने भी टीम को बधाई देने के साथ साथ द्रविड की कोचिंग की भी सराहना कर रहे हैं.
टीम के पूर्व किलाड़ी विरेंद्र सहवाग अने ट्वीट में लिखते हैं कि” ये लड़के इतने सुरक्षित हाथों में हैं. राहुल द्रविड़ के सुरक्षित हाथों का इन नौजवानों और भारतीय क्रिकेट के भविष्य में महान महान योगदान. हमारे पास कुछ शानदार प्रतिभाएं हैं.”
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मैन ऑफ द सीरीज रेह शुभमन गिल
भारत की तरफ से शुभमान गिल ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाजी करते हुए (63, 90*, 86, 102*, 31) रन बनाए.
इसके अलावा वो इस विश्व कप में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में दूसरे नंबर पर रहे. गिल की धमाकेदार बल्लेबाजी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज के खिताब से भी नवाजा गया.

गिल आईसीसी अंडर-19 विश्व कप में प्लेयर ऑफ द सीरीज जीतने वाले दसवें और भारत के चौथे खिलाड़ी बन गए हैं. गिल से पहले भारत की तरफ से सन् 2000 में युवराज सिंह, 2004 में शिखर धवन, 2006 में चेतेश्वर पुजारा ने प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब अपने नाम किया था.

वहीं दूसरी टीम के 2002 में टटेंडा टायबू, 2008 में टिम साऊदी, 2010 में हेंडरिक्स, 2012 में बॉसिस्टो, 2014 में ऐडेन मार्कराम, 2016 में मेहेदी हसन ने ये सम्मान हासिल किया था.
वर्ल्ड कप में भारतीय टीम 
बल्लेबाज – पार्थिव शॉ (कप्तान), शुभम गिल, मनोज कालरा, हिमांशु राना,रियान पराग
आलराउंडर – अनुकूल राय, शिवम मावी
विकेटकीपर – हार्दिक देसाई,अरुण जुयाल
गेंदबाज – अभिषेक शर्मा, कमलेश नागरकोटी, ईशान पोरवेल, शिवा सिंह, अर्शदीप सिंह, पंकज यादव
स्टैंड बाई – ओम भोंसले, राहुल चहार, विनोद राठवा, उर्मिल पटेल, आदित्य ठाकरे
स्कोरबोर्ड : बल्लेबाजी
पृथ्वी पंकज शॉ(29) – बोल्ड विल सदरलैंड
मनजोत कालरा(101) – नॉट आउट
शुबमान गिल(31) – बोल्ड परम उप्पल
हरविक मनीषभाई देसाई(47) –  नॉट आउट
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भारत के टूर्नामेंट का पूरा सफर
14 जनवरी – आस्ट्रेलिया को 100 रनों से हराया
16 जनवरी – पापुआ न्यू गीनिया को 10 से हराया
20 जनवरी – जिम्बाबवे को 10 विकेट से हराया
क्वार्टर फा्इनल– बांग्लादेश को 131 रनों से हराया
सेमीफाइनल – पाकिस्तान को 203 रनों से हराया
फाइनल – ऑस्ट्रेलिया को आठ विकेट से हराया

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