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दुनिया में हर साल 12 लाख लड़कियां बन रही हैं बालिका वधू – UNICEF

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UNICEF Child Marriage Data
फोटो साभार- द डॉन

UNICEF Child Marriage Data : भारत में बाल विवाह के प्रति बढ़ी लोगों के अंदर जागरूकता

UNICEF Child Marriage Data : हमारा भारत हमेशा से अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना जाता है. लेकिन वक्त बदलने के साथ साथ कुछ कुरुतियों का साथ छोड़ना भी जरूरी है.

इनमें से एक है बाल विवाह जो हमारी उस रुढिवादी सोच को दर्शाती है जो ना जाने अब तक कितने बचपन को बर्बाद कर चकी है .
दरअसल मंगलवार को जारी संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बच्चों के आपातकालीन निधि (यूनिसेफ़) की एक रिपोर्ट ने यह खुलासा किया कि बाल विवाह के वैश्विक प्रतिशत में कमी होने के बावजूद 2030 तक 150 मिलियन से अधिक लड़कियों की शादी हो चुकी होगी.
संयुक्त राष्ट्र के नए आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में कम से कम 12 लाख लड़कियों की 18 वर्ष से कम आयु में ही उनकी शादी कर दी जाती है.
वहीं इस बारे में यूनिसेफ के मुख्य लिंग सलाहकार अंजू मल्होत्रा का कहना है कि यह सच है कि अब बालविवाह में धीरे -धीरे कमी देखने को मिल रही है जो हमारे लिए स्वागत योग्य है.
लेकिन अभी हमें एक लंबा रास्ता तय करना है जिसमें इस कुरुती को खत्म करने के लिए शीघ्र प्रगति की आवश्यकता है.
दक्षिण एशिया ने पिछले दशक में बाल विवाह में सबसे अधिक गिरावट देखी है, रिपोर्ट के मुताबिक आंकड़ों में अच्छा बदलाव हुआ है. पुराने आकड़ों के मुकाबले नए आंकड़े लगभग 50 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत हो गया है.
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भारत में कम हुआ बाल विवाह
भारत में बाल विवाह में होती गिरावट लड़कियों के लिए बेहतर शिक्षा का और लगातार की जा रही कोशिशों का असर है. वर्तमान रुझान बताते हैं कि भारत में अब 27 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 से कम उम्र में हो जाती है जो पहले 47 प्रतिशत हुआ करता था.
इस गिरावट से पता चलता है कि बाल विवाह को समाप्त करना वास्तव में संभव है. लेकिन इस बारे में लड़कियों को सशक्त होने की भी जरूरत है साथ ही स्थानीय स्तर पर परिवर्तन बनाने के लिए परिवारों और समुदायों को भी प्रयास करने होंगे.
सेंटर फॉर लॉ एंड पॉलिसी रिसर्च के कार्यकारी निदेशक ज्यंना कोठारी ने बताया कि वो सिर्फ 14 साल की थी जब उनकी शादी हुई थी.
उन्होंने बताया कि वो पांच भाई बहनों में सबसे बड़ी थी, इस वजह से उनके माता-पिता जल्द से जल्द उनकी शादी करने के लिए उत्सुक थे. ज्येन कोठारी कहती हैं कि बाल विवाहों को अवैध बनाने के लिए केवल कानून ही प्रतिबंधित करता है.
गौरतलब है कि राज्यों के बीच बाल विवाह की दर अलग-अलग होती है जो क्रमशः बिहार और राजस्थान सहित उत्तरी भारतीय राज्यों में 69 और 65 प्रतिशत है.
वहीं भारत सरकार अब सभी बाल विवाहों को अवैध घोषित करने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करने पर विचार कर रही है.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक 2016 में भारत में बाल विवाह के 326 मामले सामने आए थे, हालांकि कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह आंकड़ा वास्तव में बहुत अधिक है.
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लड़कियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है असर 
अपनी कम उम्र में शादी होने के बाद लड़कियां आम तौर पर अपने पतियों द्वारा यौन क्रियाकलाप करने को मजबूर होती हैं जबकि उनका शरीर अभी भी विकसित हो रहे होते है.
कम उम्र में यौन की क्रियाओं से गुजरने के बाद शुरूआती गर्भधारण में उनका गर्भपात हो जाता है. इसके अलावा यौन संचारित संक्रमण, फास्टुला और प्रसव के दौरान मृत्यु की जटिलताओं से भी उन्हें गुजरना पड़ता है.
बता दें कि हाल ही में भारत के शीर्ष अदालत ने बलात्कार कानूनों में एक अद्भुत बदलाव किया था. जिसमें एक आदमी को अपनी नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.
और अगर वह 15 से 18 साल के बीच की है और उसका पति उससे यौन संबंध बनाने पर जोर दे रहा है तो वह कानूनी तौर पर अपराध माना जाएगा.