तो क्या इस वजह से भारत में बंद हो जाएगा whatsapp & facebook, पढ़ें पूरी खबर

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whatsapp & facebook: आतंकी कर रहे गलत इस्तेमाल

जब से whatsapp & facebook में वीडियो कॉल की सुविधा आई है, यूजर्स की तो बल्ले-बल्ले आ रखी है.

हो भी क्यों न, एक तो रिचार्ज कराने का झंझट भी खत्म हो गया है और दूसरा फेस टू फेस एक दूसरे से बात भी हो जाती है. इसलिए जब मन करे किसी भी दोस्त को वॉयस कॉल कर लो.

लेकिन क्या आपको पता है कि whatsapp & facebook की जिन कॉल सुविधाओं का आप जमकर आनंद ले रहे हैं, वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है.

जी हां, ऐसी सूचना है कि देश में आतंकी whatsapp & facebook की कॉलिंग सेवाओं का लाभ ले रहे हैं.
शुक्रवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीर बताया है.
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दिल्ली हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर राव ने कहा है कि इस मसले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. क्योंकि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.
कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 17 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है.

आतंकी कर रहे वॉयस कॉल का यूज

जनहित याचिका में कहा गया है कि व्हाट्स-अप और फेसबुक की वॉयस कॉल रेगुलेट नहीं की जा रही है, जिससे इन कॉलों के कोड वर्ड को समझना व क्रैक करने में मुश्किल होती है. इन्हीं कारणों से अंदेशा जताया गया है कि देश में मौजूद आतंकी इन सेवाओं का खूब लाभ उठा रहे हैं.

whatsapp & facebook की वायस कॉल पर रोक संभव

याचिकाकर्ता वीडी मूर्ति का कहना है कि व्हाट्स-अप और फेसबुक की वॉयस कॉल को रेगुलेट नहीं किया जा रहा है.
उन्होंने मांग की है कि जब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कॉलिंग सेवाएं रेगुलेट नहीं होती, तब तक इन सेवाओं पर रोक लगा दी जाए.
अगर याचिकाकर्ता की ये दलील सही हुई तो संभवतः हो सकता है व्हाट्स-अप और फेसबुक की कॉलिंग सेवाओं पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी जाए.
सर्विसेज को रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत लाने की मांग
पिटिशनर ने कोर्ट से अपील की है कि वह सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इनके जैसी ही भारत में जारी अन्य सर्विसेज को एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत लाने का आदेश दे.
इसके लिए पिटिशनर ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स का नाम भी सुझाया है.