कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन शोषण के मामलों में विप्रो,आईसीसी बैंक टॉप पर

यौन शोषण
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हाल ही में देश की बड़ी कंपनियों में महिलाओं के साथ होने वाले यौन शोषण के बारे में एक हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत की टॉप 50 कंपनियों ने यह माना है कि पिछले एक साल में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन शोषण के मामले में 10.3% की वृद्धि हुई है.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (निफ्टी) की सालाना रिपोर्ट के अनुसार 2016 में महिलाओं के साथ यौन शोषण के 579 मामले दर्ज किए गए हैं, वहीं 2015 में यह 525 थे.
निफ्टी की रिपोर्ट में कहा गया कि 50 कंपनियों में से केवल 14 ही कंपनियां ऐसी थी जहां एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है. वहीं स्टेट बैंक ऑफ बरोदा और कोल इंडिया ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.
इस लिस्ट में सबसे टॉप पर 116 केसों के साथ भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी विप्रो का नाम है.दूसरे नंबर पर आईसीसी बैंक हैं वहीं तीसरे नंबर पर भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस है.

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आईटी कंपनियों में महिला यौन शोषण के मामले में केवल टे्क महिंद्रा ही ऐसी कंपनी है जिसने कहा है कि इस साल उनकी कंपनी में ऐसा कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ है.
वहीं अगर बैंकिंग सेक्टर की बात करे तो एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कोडेक बैंक ने इस साल 10 से 16 ऐसे केसों के दर्ज होने की बात कबूली है.
गौरतलब है कि 2013 में लागू हुए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं का संरक्षण (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम के बाद यह तीसरी बार है जब कंपनियों ने इस तरह के केसों की जानकारी उपलब्ध कराई है.
क्या है 2013 कार्यस्थल महिला संरक्षण अधिनियम ?
यह अधिनियम, महिलाओं को समानता के मौलिक अधिकारों की पुष्टि करता है जिसके अंर्तगत उन्‍हें पूरी गरिमा और अधिकार के साथ समाज में रहने, किसी व्‍यवसाय, व्‍यापार या कार्य को करने की स्‍वतंत्रता देता है.
इस अधिनियम में भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 19(1)(छ) के अधिकार प्रदान किए गए हैं.
यौन शोषण
फोटो साभार- लाइव मिंट
इस अधिनियम के अनुसार, राज्‍य सरकारों व विभागों की जिम्‍मेदारी होती है कि वे ध्‍यान दें कि कंपनियां महिलाओं की सुरक्षा हेतु इस अधिनियम को सही तरीके से लागू कर रही हैं या नहीं.
अधिनियम के तहत सभी कंपनियों को सलाह दी जाती है कि, वे अपनी महिला कर्मचारियों को इस बारे में जागरूक करें और इसके लिए समय-समय पर वर्कशॉप का आयोजन भी करें.
उल्लेखनिय है कि अगर कोई संस्था इस मामले में दोषी पाई जाती है तो अधिनियम की धारा 26(1) के तहत नियोक्‍ता को 50,000/- रूपए का जुर्माना देने के लिए उत्‍तरदायी समझा जाता है. साथ ही उसका लाईसेंस भी निरस्‍त भी किया जा सकता है.
फंस चुकी हैं कई बड़ी हस्तियां
सबसे हाई प्रोफाइल केस में शामिल पी.मूर्ति को इंफोसिस में शोषण के केसों के चलते ही कंपनी से निकाल दिया गया था. उसके बाद 2013 में एक बार फिर आई-गेट कॉरपोरेशन के चीफ एक्सेक्यूटिव रहते हुए भी उनपर यह इल्जाम लगा और उन्हें कंपनी से निकाल दिया गया.
वायरल फीवर मीडिया लैब्स के सीइओ अरुणाभ कुमार को भी इन्हीं शिकायतों के चलते कंपनी से बाहर का रास्ता देखना पड़ा था
इस तरह से बढ़ते केसों की संख्या मन में एक शंका पैदा करती है कि हम महिलाओं की बराबरी के हक की बात तो करते हैं पर क्या यह इतना आसान है?
ऐसे में मन में खुद की सुरक्षा को लेकर इतने सवालों के साथ महिलाएं कैसे बाहर जाकर काम करेंगी.
हालांकि इस अधिनियम से महिलाओं की रक्षा के लिए कोशिश जरूर की गई है, लेकिन यह कोशिश अभी अधूरी है.
इन केसों की रिपोर्ट के साथ जरूरी है कि इन सब की रोकथाम के लिए उचित कदम भी उठाए जाएं.

साभार- वीसी सर्कल