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World Refugee Day 2018 : दुनिया भर में 6.85 करोड़ शरणार्थी, अकेले भारत में हैं 3 लाख

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World Refugee Day 2018
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World Refugee Day 2018यूएन की रिपोर्ट में सामने आए हैरान करने वाले आकड़ें

World Refugee Day 2018 : दुनिया के हर इंसान की ये ख्वाहिश होती है कि वो जिस मुल्क की धरती पर जन्म ले वहीं अपना जीवन भी गुजारा

लेकिन जरा उन लोगों के बारे में सोचिए जो अपने देश में फैली हिंसा की वजह से अपना घर, मुल्क, दोस्त सबकुछ छोड़कर दूसरे देशों में एक शरणार्थी का जीवन जी रहे हैं.
आज विश्व रिफ्यूजी दिवस (World Refugee Day) है यानि की आज का दिन उन लोगों के लिए समर्पित है जो किसी ना किसी कारण वश अपने मुल्क को छोड़कर दूसरे देशों में जीवन जीने के लिए मजबूर हैं.
इस बात से हम सब वाकिफ हैं कि रेफ्यूजी का जीवन आसान नहीं होता अपना सबकुछ छोड़कर एक ऐसे अंजान देश में जाकर बसना जहां उनका कोई वजूद ही ना हो .
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यूएन की रिपोर्ट हैरान करने वाली
मंगलवार को यूएन ने अपनी एक रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि आज के दौर में शरणार्थियों की समस्या काफी संगीन होती जा रही है.
संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को कहा कि युद्ध, हिंसा और उत्पीड़न के कारण वर्तमान समय में 6.85 करोड़ लोगों को अपने घरों से भागने के लिए मजबूर किया गयाा. विशेष रूप से म्यांमार और सीरिया में ऐसा करने वालों की संख्या बड़ी मात्रा में है.
 यहां हैरान करने वाली बात यह है कि जबरन विस्थापित कराए गए लोगों की संख्या आज दुनिया भर में हर 110 व्यक्तियों में से 1 है.
रिपोर्ट से पता चला है कि 1.62 करोड़ लोग अकेले पिछले साल ही विस्थापित हुए हैं, जिसमें वो लोग भी शामिल हैं जो पहली बार भागने के लिए मजबूर हुए थे.
इसे और बेहतर तरीके से समझें तो दुनिया में हर 44,000 लोगों को हर दिन अपने घरों से जबरन बाहर धकेल दिया जाता है या कहिए हर दो सेकंड में एक व्यक्ति आज अपना घर छोड़ने को मजबूर है.
अकेले सीरिया में सात साल के संघर्ष ने पिछले साल के अंत तक 60 लाख लोगों को देश से बाहर धकेला था, जो कि पूरी शरणार्थी अबादी का एक तिहाई हिस्सा है.
जबकि 2017 में दूसरा सबसे बड़ा शरणार्थी उत्पादक देश अफगानिस्तान था, जिसकी शरणार्थी आबादी सालाना पांच प्रतिशत बढ़कर 2.6 मिलियन लोगों तक पहुंच गई है.
वहीं म्यांमार के शरणार्थियों ने पिछले साल दोगुनी से भी ज्यादा संख्या में इस बार दूसरे देश में पलायन किया है, क्योंकि वहां की सेना के क्रूरता के कारण हजारों रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश में सीमा पार करने के लिए मजबूर कर दिया गया.
यह नहीं इज़राइल आजादी के 70 साल का प्रतीक है, लेकिन वहां अभी भी 5.4 मिलियन फिलिस्तीनि शरणार्थियों के रूप में रह रहे हैं.
इस मामले में संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त शरणार्थियों फिलिपो ग्रांडी ने कहा कि हम चाहते हैं कि देशों को इससे अकेले जूझना ना पड़े. लेकिन विस्थापित होने वाले लोगों की 70 प्रतिशत अबादी केवल 10 देशों में है.
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अगर इन देशों में विवादों का समाधान किया जाएगा तो कम से कम, हर साल बढ़ने की बजाए यह विशाल आंकड़ा नीचे जा सकता है.
भारत में रह रहें है 30 देशों के शरणार्थी
अगर बात हम अपने देश भारत की करें तो यहां 30 देशों के लगभग 3 लाख से ज्यादा शरणार्थी रह रहे हैं.जिसमें बड़ी संख्या  पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, तिब्बत और श्रीलंका से आए देशों के लोगों की है.