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Hawk Eye App : हैदराबाद पुलिस ने महिलाओं को सुरक्षित यात्रा कराने के लिए ऐप में जोड़ा ‘ट्रैक मी’ फीचर

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Hawk Eye App
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Hawk Eye App : राज्य में महिला सुरक्षा होगी और मजबूत

Hawk Eye App : देश में हर जगह महिलाओं के प्रति बढ़ते अत्याचार के मामले इस बात का सबूत हैं कि उनके लिए अब कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं रह गया है.

आज जब हर क्षेत्र में महिलाएं मर्दों से कंधे से कंधे मिलाकर चल रही हैं तो ऐसे में उनके साथ इस तरह की घटनाएं किसी भी समाज के लिए सही नहीं है.
हालांकि टेक्नोलाजी की मदद से कई वैज्ञानिक और इंजीनियरों ने महिलाओं को इस तरह की हिंसा से बचाने के लिए अपने स्तर पर कई तरह के अविष्कार किए हैं जिसका एक उदाहरण हमें हैदराबाद में भी देखने को मिला.
हैदराबाद पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा को अब पहले से ज्यादा गंभीरता से लेते हुए अपने ऐप में नया फीचर जोड़ा  है.
बता दें कि काम के सिससिले में घर से बाहर सफर करने वाली महिलाओं को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने में हैदराबाद पुलिस का ये नया मॉडल काफी असरदार साबित होगा.
ट्रैक मी(track me) नाम से शुरू किए गए इस फीचर के माध्यम से पुलिस को यह पहचानने में मदद मिलेगी कि यात्री जिस मार्ग से जा रहा है वह भटक गया है या नहीं.
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ट्रेक मी नाम के इस विकल्प को ‘महिला पर्यटन सुरक्षित’ कार्यक्रम के अंतर्गत चलाए जा रहे हॉक आई ऐप का हिस्सा बनाया गया है.
गौरतलब है कि मौजूदा विकल्प में महिलाओं की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए उनसे जानकारी जानने और उसे शेयर करने की सुविधा होती थी लेकिन अब ट्रैक मी में उनके पास यह भी ऑप्शन रहेगा कि वह अपनी यात्रा को पुलिस से ट्रैक करवाना चाहती हैं या नहीं.
इसके अलावा दो और नए विकल्प ‘सहायता‘ और दूसरा सुरक्षित रूप से पहुंचे(यात्रा सुरक्षित पूरी होने का संदेश) का ऑप्शन भी इसमें जोड़ा गया है.
इस तरह काम करता है ट्रैक मी
यदि महिला यात्री अपने ऐप में खुद को ट्रैक करने का ऑपशन चुनती है तो , मुख्य पुलिस कंट्रोल कमांड सेंटर में एक पॉप अप आ जाता है.
जिसके बाद यात्री को दो विकल्पों में चुनने के लिए एक नोटिफिकेशन भेजा जाता है जिसमें उसे ‘ट्रैक मी’ और ‘सहायता’ में से किसी एक को चुनना रहता है. अगर यात्री ‘ट्रैक मी’ का चयन करता है, तो उसके द्वारा चुना गया मार्ग पॉइंट कंट्रोल रुम की टीवी वॉल पर दिखने लगता है.
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ट्रेक मी को आन करने के बाद अगर महिला अपने रास्ते के बजाय कोई और रास्ता लेती है तो पुलिस और उस महिला दोनों के पास खतरे का नोटिफिकेशन अपने आप आ जाता है.
वहीं जब तक महिला यात्री आखिरी विकल्प ‘सुरक्षित रूप से पहुंच’ नहीं दबाएंगी तब तक उनका सफर ट्रैक किया जाता रहेगा. जानकारी के लिए बता दें कि इस सेवा का लाभ महिलाएं ऑफलाइन भी ले सकती हैं.
फिलहाल अब तक हैदराबाद पुलिस के द्वारा मिल रही सेवा में महिला यात्री केवल इमरजेंसी के बारे में ही बता पाते थे लेकिन नए सिस्टम से वह अपना पूरा रास्ता भी ट्रैक करा सकेंगे.
ट्रैक मी के आने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि इससे हैदराबाद की महिलाएं खुद को थोड़ा और सुरक्षित महसूस करने लगेगीं.

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