शनिग्रह पर इतने घंटों का होता है एक दिन, वैज्ञानिकों ने सुलझाया बड़ा रहस्य

Scientist Research On Saturn

Scientist Research On Saturn : शनिग्रह पर एक साल पृथ्वी के 29 साल के बराबर होता है

Scientist Research On Saturn : अंतरिक्ष को लेकर अलग-अलग लोगों के मन में अलग-अलग धारणाएं बनी हुई होती हैं, ऐसी ही कई पहेलियों को सुलझाने की जद्दोजहद में वैज्ञानिक सालों साल लगे रहते हैं.

इसी कड़ी में जुड़ते हुए नासा वैज्ञानिकों ने एक बड़ी गुत्थी सुलझाते हुए इस सवाल का जवाब ढूंढ निकाला है कि आखिर शनि ग्रह जिसे Saturn भी कहते हैं वहां एक दिन में कितने घंटे होते हैं.
दरअसल नासा का Cassini अंतरिक्षयान ने आखिरकार इस गुत्थी को सुलझा लिया है कि शनिग्रह पर कितने घंटे का दिन होता है.
बता दें कि नासा ने सौरमंडल विज्ञान की इस गुत्थी को सुलझाते हुए बताया कि शनिग्रह पर सिर्फ साढ़े 10 घंटे से अधिक का दिन होता है.

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हालाँकि यहाँ ये भी जानना बेहद ज़रूरी है कि Cassini मिशन अब वजूद में तो नहीं है, लेकिन उससे मिले नए डेटा का उपयोग करके यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्नियाशांता क्रूज की अगुवाई में वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब ढूंढ निकाला है.
शनिग्रह पर एक साल पृथ्वी के 29 साल के बराबर होता है, लेकिन दिन सिर्फ 10 घंटे 33 मिनट और 38 सेकंड का होता है.
इसके साथ ही अंतरिक्ष एजेंसी नासा के कैसिनी अंतरिक्षयान से मिले खोज परिणामों के आधार पर यह जानकारी भी सामने आई है कि शनि के छल्ले वैज्ञानिकों के अनुमान के हिसाब से बहुत कम उम्र के हैं और वे पिछले एक से 10 करोड़ साल के बीच ही नजर आने शुरू हुए थे.
बताया जाता है कि सूरज से छठे स्थान पर मौजूद ग्रह का निर्माण 4.5 अरब साल पहले हुआ था और उसके अस्तित्व का ज्यादातर वक्त उन विशेष छल्लों के बिना ही बीता है जिसके लिए उसे आज जाना जाता है.
विश्वविद्यालय में खगोल विज्ञान के छात्र क्रिस्टोफर मैंकोविज ने इन छल्ले के भीतर की तरंग के पैटर्न का विश्लेषण किया.
इसके चलते जो नतीजे सामने आये उनमें पाया गया कि खुद ग्रह के भीतर होने वाले कंपनी से उसमें उसी तरह की प्रतिक्रिया मिलती है, जिस प्रकार की प्रतिक्रिया भूकंप की माप के लिए सिस्मोमीटर में मिलती है.
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खगोल विज्ञान के छात्र क्रिस्टोफर मैंकोविच ने बताया कि, “छल्ले में किसी खास स्थान पर यह दोलन छल्ले के कण को आकर्षित करता है, जिससे कक्षा में सही समय पर ऊर्जा का निर्माण होता है.”
बता दें कि मैंकोविच की ये रिसर्च एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुई है. शोध में शनिग्रह के आंतरिक मॉडल के बारे में बताया गया, जो छल्ले के तरंग की तरह है.
इससे उनको ग्रह की आंतरिक गतिविधि और घूर्णन के बारे में पता चला है.