जानिए, सेल्स गर्ल से अपनी नौकरी की शुरूआत करने वाली निर्मला सीतारमण कैसे बनीं देश की महिला रक्षा मंत्री

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    निर्मला सीतारमण
    निर्मला सीतारमण
    अक्सर अपने फैसले से देश को चौंकाने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने देश की पहली फुल टाइम महिला रक्षा मंत्री सौंप कर  सबको हैरान कर दिया है.
    उनके इस निर्णय के बाद से अब देश की 125 करोड़ लोगों की सुरक्षा का जिम्मा नई रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के कंधों पर होगा.
    अपने इस फैसले से प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया को यह संकेत देन की कोशिश की है कि भारत की महिलाएं अपनी ही नहीं, बल्कि देश की रक्षा करने में भी सक्षम हैं.
    निर्मला सीतारमण
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    मोदी कई बार ले चुके थे निर्मला की अग्निपरीक्षा
    ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही झटके में निर्मला सीतारमण को देश के रक्षामंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद सौंप दिया हो. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी खुद कई बार निर्मला सीतारमण की अग्निपरीक्षा ले चुके हैं.
    इसकी शुरूआत वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव से हुई थी. उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्मला सीतारमण को महिलाओं को आकर्षित करने की खास जिम्मेदारी सौंपी थी.
    हालांकि निर्मला सीतारमण को न तो गुजराती भाषा आती थी और न ही वह ठीक से हिंदी बोल पाती थी. लेकिन टूटी-फूटी हिंदी भाषा से ही उन्होंने गुजरात की महिला जनता का दिल जीत लिया. जिसका फायदा नरेंद्र मोदी को हुआ.
    यहीं नहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में भी निर्मला सीतारमण की गुजरात में खास भूमिका रही.
    आपको बता दें कि निर्मला सीतारमण किसी विषय के बारे में रिसर्च व विश्लेषण बहुत अच्छा करती हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी विदेश दौरों पर या किसी महत्वपूर्ण विषय में आशंकित होते हैं, तो वह इसके लिए निर्मला सीतारमण को ही विषय का अध्ययन करने को कहते हैं.
    इसके अलावा निर्मला सीतारमण को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के पीछे खास वजह यह है भी हो सकती है कि निर्मला सीतारमण दक्षिण भारत से आती हैं, और दक्षिण भारत में भाजपा बहुत कमजोर है.
    ऐसे में हो सकता है कि भाजपा ने वहां की महिला को देश की इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने का निर्णय इसलिए लिया हो, ताकि वह उस महत्वपूर्ण भूभाग में अपनी पकड़ मजबूत कर सके.
    निर्मला सीतारमण का राजनीतिक कैरियर
    निर्मला सीतारमण को दूरदर्शी सोच के लिए जाना जाता है. भाजपा से जुड़े सभी जटिल मामलों में उनकी सहायता ली जाती है.
    निर्मला की भाजपा में राजनीति की शुरूआत 1999 में हुई. तब निर्मला सीतारमण हाल में ही लंदन से भारत लौटी थी और आते ही वो हैदराबाद में भाजपा के थिंक टैंक में शामिल हो गई.
    इसके बाद वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें राष्ट्रीय महिला आयोग का सदस्य नियुक्त किया.
    2008 में जब इन्हें पहली बार राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए बुलाया गया तो इन्हें सुरक्षा और आर्थिक मामलों पर बोलने के लिए कहा गया, जिसपर उन्होेंने बोलते हुए पार्टी के सभी संगठन अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया.
    उनके इस भाषण को सुनने के बाद तब भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने राजनाथ सिंह से कहा था कि इस युवा महिला कायकर्ता में असाधारण क्षमताएं हैं.
    इसके बाद लगातार उनकी पार्टी में लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई. और वर्ष 2010 में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया.
    इसके बाद 2014 में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में वाणिज्य राज्य मंत्री के रूप में शामिल हुई.
    निर्मला सीतारमण
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    तमिलनाडु में हुआ जन्म
    निर्मला का जन्म तमिलनाडु के मदुरै जिले में हुआ. निर्मला के पिता रेलवे में थे. शुरूआती पढ़ाई तमिलनाडु में  करने के बाद निर्मला आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गई.
    उन्होंने मास्टर्स के लिए जेएनयू में दाखिला लिया,, जेएनयू से निर्मला ने टेक्सटाइल ट्रेड में एमफिल किया. इसी दौरान वो स्टूडेंट यूनियन के चुनाव के लिए फ्री थिंकर्स के साथ जुड़ गईं
    शादी के बाद सेल्स गर्ल के रूप में किया काम
    निर्मला जब दिल्ली में पढ़ रही थी तभी उनकी मुलाकात परकल प्रभाकर से हुई. परकल उस समय आंध्र प्रदेश में भाजपा के नेता भी थे.
    दोनों  1986 में शादी करने के बाद ब्रिटेन चले गए. प्रभाकर जब लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी कर रहे थे तब निर्मला हैबिटेट कंपनी में सेल्स गर्ल के रूप में जॉब करती थीं, लेकिन जल्दी ही वे नौकरी छोड़कर प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स के साथ सीनियर मैनेजर के तौर पर जुड़ गई.
    कुछ समय बिताने के बाद प्रभाकर और निर्मला 1991 में वापस भारत लौट आए. भारत लौटने के बाद निर्मला और प्रभाकर हैदराबाद में ही बस गए.
    इतिहास रचने के मूड में थे प्रधानमंत्री मोदी
    खबरों की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू में नितिन गडकरी को रक्षामंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी लेने में रूचि नहीं दिखाई.
    इसके बाद उन्होंने सोचा कि सुषमा स्वराज विदेशमंत्री के पद पर आसीन रहें और वसुंधरा राजे को रक्षामंत्री बना दिया जाए.  लेकिन वसुंधरा राजे राजस्थान नहीं छोड़ना चाहती थी. मगर तब तक प्रधानमंत्री यह मन बना चुके थे कि देश की रक्षा मंत्री कोई महिला ही बनेगी. और उन्होंने आखिरी में निर्मला सीतारमण पर अपना भरोसा दिखाया.