जानिए, आखिर किस स्मार्ट तरीके से प्रधानमंत्री मोदी ने निकलवाया मंदिरों से दबा हुआ सोना, चांदी

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    सोने और चांदी
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    देश के प्रसिद्ध मंदिरों में सालों से चढ़ावे के रूप में मिलने वाले सोने और चांदी के आभूषणों को उनके तहखाने में ही दबाकर रख दिया जाता है . न तो वह बैंकिंग सेवा में जा पाता है, और न ही उसका उपयोग किसी भलाई के काम में किया जा सकता है.
    वर्षों से जमा इसी सोने चांदी के आभूषणों को निकालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार बनने के कुछ महीने बाद ही एक स्मार्ट तरीका निकाला था, जिसे उन्होंने गोल्ड मॉनेटाइजेशन का नाम दिया था
    क्या है गोल्ड मोनेटाइजेशन योजना
    देश के बड़े मंदिरों में सोने का कितनी भारी मात्रा में चढ़ावा आता है, इससे तो हम सभी वाकिफ हैं. लेकिन यह सोना और चांदी मंदिरों में जिस तरह भंडारण के रूप में रखा जाता था, वो काफी उपयोगहीन था.
    इसके लिए प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 के अंत में गोल्ड मोनेटाइजेशन योजना की शुरूआत की थी.
    इस योजना के तहत अब मंदिरों को मिलने वाले सोना और चांदी के चढ़ावे को तहखानों में ना रखकर बैंकों के लॉकरों में जमा किया जाता है. जहां वह पूरी तरह सुरक्षित रहता है.
    यही नहीं ऐसा करने के लिए सरकार की तरफ से मंदिर समितियों को 2.5 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज भी दिया जा रहा है. जिससे मंदिर समितियां चढ़ावे पर भी अच्छा खासा पैसा कमा रही हैं.
    एक साल में कमाए 800 करोड़
    गौरतलब है कि दक्षिण भारत के राज राजेश्वर मंदिर ने इस योजना के तहत इतनी अधिक मात्रा में सोना जमा कराया है, कि मंदिर समिति को एक साल का ब्याज 800 करोड़ रूपये प्राप्त हुआ है. वहीं, एक अन्य मंदिर को करीब 650 करोड़ रूपये का ब्याज मिला है.
    भले ही मंदिर समितियां यह जानकारी गुप्त रखना चाहती हों, लेकिन इतना तो साफ है कि मंदिर समितियां प्रधानमंत्री की इस योजना का जमकर लाभ ले रही हैं.
    सरकार को भी हो रहा लाभ
    इससे पहले मंदिरों में आने वाला सोना और चांदी का चढ़ावा मंदिरों के तहखाने में रखा जाता था. जिससे मंदिर समितियों को कोई लाभ नहीं मिल रहा था.
    लेकिन जब सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आई तो उन्होंने गोल्ड मोनेटाइजेशन योजना की शुरूआत करने की सोची, ताकि मंदिरों के सोने और चांदी को बैंक में जमा करके सरकार उसका उपयोग सिक्योरिटी के रूप में कर सके.
    आपको बता दें कि देशभर में 2,500 से अधिक बड़े-बड़े मंदिर इस योजना का लाभ ले रहे हैं.
    वे सैकड़ों किलों से भी अधिक की मात्रा में सोना, चांदी बैंकों के लॉकरो में जमा कर रहे हैं. जिसका लाभ सरकार के साथ- साथ मंदिर समितियों को भी मिल रहा है.