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Goat Farming : अमेरिका में लाखों की नौकरी छोड़, बकरी पालन में भविष्य बना रहा साइंटिस्ट

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Goat Farming : बकरियों का रखते हैं पूरा ख्याल

Goat Farming : विदेश में नौकरी करना हर नौजवान की ख्वाहिश होती है, मगर एक युवा साइंटिस्ट ऐसा भी है जो अमेरिका से लाखों का पैकेज छोड़कर अपने देश लौट आया.

आपको ये जानकर और भी हैरानी होगी कि स्वदेश लौटकर इस साइंटिस्ट ने किसी वैज्ञानिक के हैसियत से काम ना करते हुए बकरी पालन में अपना भविष्य आजमाया.
आज यही युवा साइंटिस्ट अपनी माटी में रहकर बकरी पालन से लाखों की आमदनी कर रहा है.
महाराष्ट्र के चिखली तहसील के साखरखेर्डा गांव के रहने वाले डॉ. अभिषेक भराड अमेरिका से नौकरी छोड़कर भारत आ गए . डॉ. अभिषेक ने इंजीनियरिंग की बैचलर पढ़ाई इंडिया में ही की. इसके बाद उन्होंने लुसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर्स औऱ पीएचडी की डिग्री प्राप्त की.
डिग्री मिलने के बाद ही अभिषेक को युनिवर्सिटी में साइंस के रिसर्चर के रूप में नौकरी मिल गई. जहां उन्होंने 4 साल तक साइंस में बड़े-बड़े रिसर्च किए.
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आपको बता दें कि अभिषेक को यूनिवर्सिटी में करीब 10 लाख रूपये सालान सैलरी मिलती थी. इतनी मोटी सैलरी मिलने के बाद भी अभिषेक का मन अमेरिका में नहीं लगा, और उन्होंने नौकरी छोड़कर स्वदेश लौटने का मन बनाया.
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ऐसे हुई शुरूआत
डॉ. अभिषेक ने सबसे पहले 20 एकड़ जमीन लीज पर ली. इसके बाद एक गोट शेड (बकरी के रहने का स्थान) किराए पर लिया.
अभिषेक ने शुरू में इस शेड में 120 बकरियां रखी, लेकिन अगले ही साल इन बकरियों की संख्या दो गुनी से भी ज्यादा हो गई. आज डॉ. अभिषेक के गोट शेड में 350 बकरियां हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर साल अभिषेक मुनाफे के तौर पर 10 लाख रुपये कमाते हैं
बकरियों का रखते हैं पूरा ख्याल
अभिषेक बकरियों का पूरा ध्यान रखते हैं. उनके रहने वाली जगह की साफ-सफाई से लेकर खाने पीने के इंतजाम में अभिषेक किसी प्रकार की कोई कमी नहीं छोड़ते.
उन्होंने बकरियों के चारे के लिए 6 एकड़ की जमीन पर मक्का और बाजरा जैसी फसलें भी बोई हुई हैं. उनके पास आठ प्रकार के बकरियां हैं, जैसे अफ्रीकी बोर, बेतट, जमुनीपरी, सिरोही आदि.
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अभिषेक की मुहिम से जुड़े ग्रामीण
डॉ. अभिषेक की इस मुहिम से उनके गांव के ही लोग नहीं बल्कि, आस-पास के गावों के ग्रामीण भी प्रेरित हो रहे हैं.
आज करीब 350 ग्रामीण लोग अभिषेक के इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. वहीं अभिषेक भी उनको हजारों रूपये की अच्छी सैलरी दे रहे हैं.
जो सैकड़ों ग्रामीण पहले पशुपालन को मुनाफे का सौदा नहीं मानते थे, आज वो भी इस नौजवान से प्रेरणा लेकर अपने व्यवसाय को बखूबी चलाने लगे हैं.
इसके अलावा अभिषेक ग्रामीणों को निशुल्क प्रशिक्षण भी दे रहे हैं, कि किस तरह आज के समय में लघु व्यवसाय को विकसित किया जा सकता है.
घरवालों का झेलना पड़ा था गुस्सा
डॉ. अभिषेक जब लाखों की नौकरी छोड़कर घर वापस आए तो उनके माता-पिता बहुत गुस्सा हुए थे.
उन्होंने दोबारा नौकरी पर वापस जाने का दबाव भी बनाया, लेकिन जब उन्होंने साफ मना कर दिया तो उनके घर वालों ने उनसे कई दिनों तक बात भी नहीं कि. मगर अभिषेक ठान चुके थे कि वो अब विदेश में नौकरी करने के लिए नहीं जाएंगे.

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