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Rural Economic Development: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगी निजी कंपनियां और पंचायतों

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Rural Economic Development: देशभर की 50000 ग्राम पंचायतों का हुआ चयन

Rural Economic Development: भारत सरकार 1 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एक नया कदम उठाने जा रही है.

दरअसल केंद्र सरकार ग्राम पंचायतो और निजी कंपनियों के बीच की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए नई योजना तैयार कर रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को और अधिक बढ़ाना है.
योजना के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय ने देशभर की 50000 ग्राम पंचायतों का चयन कर लिया है. ये ऐसी पंचायतें हैं जहां महिला स्वयं सहायता समूह (एसएसजी) की भूमिका काफी सक्रिय है.
योजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मिशन अंत्योदय के तहत ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा ने कुछ स्टार्ट अप कंपनियों को प्रस्तुति दी. इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने समझाया कि, कैसे प्राइवेट कंपनियां ग्राम पंचायतें के व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.
अधिकारी ने बताया कि सरकार अपनी तरफ से सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना और सामाजिक गतिविधियों का विकास कर सकती है.
लेकिन इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए गांवों को बाजारों से जोड़ने की आवश्यकता है. जिसके लिए प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी महत्वपूर्ण है.
हालांकि सरकार की तरफ से ये स्पष्ट बता दिया गया है कि वो निजी कंपनियों को सब्सिडी या कोई अन्य वित्तीय प्रोत्साहन नहीं देगी. उसका काम सिर्फ कंपनियों और ग्राम पंचायतों के बीच समन्वय बैठाना रहेगा.
अधिकारी ने कहा कि मगर सरकार इन ग्रामिण क्षेत्रों में हो सकने वाली व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी निजी कंपनियों के साथ साझा करेगी. ताकि उन्हें ग्रामीण भारत के साथ साझेदारी करने में मदद मिल सके.
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी अंत्योदय योजना के तहत सरकार का लक्ष्य है कि वो गावों के 1 करोड़ घरों में गरीबी कम करने , स्वास्थ्य सुविधा और समग्र आर्थिक कल्याण में सुधार ला सके. और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मंत्रालय ने 1000 दिनों की समय सीमा रखी है.
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