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Divya Rawat : 27 वर्षीय इस लड़की ने मशरूम की खेती कर पहाड़ में दिखाया रोजगार का रास्ता

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divya rawat
दिव्या रावत

Divya Rawat : मशरूम गर्ल के नाम से जानते हैं लोग

Divya Rawat : कौन कहता है कि कृषि में उज्जवल भविष्य नहीं है .अगर आपके पास नेक सोच और मजबूत हौसला है तो हर क्षेत्र में कामयाबी खुद आपके कदम चूमेंगी.

दिव्या रावत एक ऐसा नाम है, जिसकी बदौलत सैकड़ों घरों का चूल्हा जल रहा है.
दिल्ली में पढ़ रही दिव्या को अचानक अपने उत्तराखंड के लिए कुछ करने की ऐसी ललक जागी कि वह पढ़ाई बीच में ही छोड़कर उत्तराखंड वापस आ गई, और यहां आने के बाद उन्होंने मशरूम की खेती करने का फैसला किया.
आज दिव्या रावत राज्य में ही नहीं बल्कि देश में भी सबसे अधिक मात्रा में मशरूम का उत्पादन कर रही हैं. यही कारण है कि दिव्या को अब लोग मशरूम गर्ल के नाम से पुकारने लगे हैं.

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पलायन रोकने के लिए दिल्ली से लौटी उत्तराखंड
उत्तराखंड राज्य के चमोली (गढ़वाल) जिले से 25 किलोमीटर दूर कोट कंडारा गाँव की रहने वाली दिव्या रावत दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही थी, लेकिन वहां रहकर भी उन्हें पहाड़ों से लोगों द्वारा बड़ी संख्या में होने वाला पलायन काफी परेशान कर रहा था.
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इससे चिंतित होकर वो 2013 में वापस उत्तराखंड लौट आईं और यहां मशरूम का उत्पादन करना शुरु किया. दिव्या कहती हैं कि जब वो वापस आईं तो उन्होंने अपने गांवे के ज्यादातर घरों में ताला लगा देखा.
उन्होंने कहा कि चार-पांच हजार रुपए के लिए यहां के लोग घरों को खाली कर पलायन कर रहे थे जिसकी मुख्य वजह रोजगार न होना था.
गांव के ऐसे हालात देखकर उन्होंने ठानी कि अब कुछ ऐसा करना होगा जिससे यहां के लोगों को यहीं रोजगार मिल सके.

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सालाना करोड़ों का टर्नओवर करती है दिव्या की कंपनी
दिव्या रावत ने 2013 में मशरूम उत्पाद का काम शुरू किया था. शुरू के दो-चार महीने तो उत्पादन ज्यादा खास नहीं रहा. लेकिन अगले वर्ष 2014 में उन्हें तीन लाख का मुनाफा हुआ. जबकि उसके अगले साल यह मुनाफा तीन गुना और बढ़ गया.
आपको बता दें कि अभी तक मशरूम उत्पादन के लिए दिव्या 50 से ज्यादा यूनिट लगा चुकी हैं जिसमे महिलाएं और युवाओं की संख्या ज्यादा हैं.
यहीं नहीं दिव्या मशरूम की बिक्री और लोगों को इसके उत्पादन की ट्रेनिंग भी अपने केंद्र में देती हैं. दिव्या ने इस सब के लिए एक कम्पनी ‘सौम्या फ़ूड प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी’ भी बनाई है.
पहाड़ों पर मशरुम 150 से 200 रुपये में फुटकर में बिकता है. कंपनी से जुडे लोग मौसम के हिसाब से सर्दियों में बटन, मिड सीजन में ओएस्टर और गर्मियों में मिल्की मशरूम का उत्पादन करते हैं. बटन मशरूम 1 महीने में ओएस्टर 15 दिन में और मिल्की मशरूम 45 दिन में तैयार हो जाता है.
आज वह 400 से अधिक महिला व युवाओं को रोजगार दे रही हैं.जिन्हें 10,000 से 15,000 रूपये प्रतिमाह तक मिलते हैं.

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उत्तराखंड सरकार ने बनाया मशरुम की ब्रांड अंबेसडर
उत्तराखंड सरकार ने दिव्या के इस सराहनीय प्रयास के लिए मशरूम की ब्रांड एम्बेसडर घोषित किया. दिव्या और उनकी कंपनी अब तक उत्तराखंड के 10 जिलों में मशरूम उत्पादन की 53 यूनिट लगा चुकी हैं.
वहीं, इसी साल दिव्या को नारी शक्ति में राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजा गया है.
सड़क पर खुद खड़ी होकर बेचती हैं मशरुम
ब्रांड अम्बेसडर होने के बावजूद वो रोड पर खड़े होकर खुद मशरूम बेचती हैं, ताकि वहां की महिलाओं की झिझक दूर हो और वो खुद आगे कर मशरूम बेंच सके.

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