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इन 5 तरीकों से किसान और उनकी फसल को नुकसान से बचाने में मिलेगी मदद

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Kochi Villagers Organic Farming
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Factors Help Indian Farmer : जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान में आ सकेगी कमी

Factors Help Indian Farmer : भारत सरकार के हर बार के वार्षिक आर्थिक सर्वेक्षण की माने तो जलवायु परिवर्तन से मध्यम अवधि में 20-25% तक किसानों की आय को सीधे तौर पर नुकसान होता है.

मौसम में तापमान वृद्धि और कम वर्षा जैसी परेशानियों से किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है.
इन्हीं मुश्किलों से बचने के लिए हम आज आपको ऐसे उपाय बता रहे हैं जो खेती करने के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं. बशर्ते सरकार को भी इसमें हिस्सा बनना होगा.
दरअसल सबसे पहले सरकार को सिंचाई प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक और बेहतर कृषि प्रबंधन को देश के हर हिस्से में तैनात करना होगा. वहीं लंबे प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार कृषि अनुसंधान में बराबर निवेश करती रही.
आइए जानते हैं पांच ऐसे तरीके जिनसे किसान को एक बेहतर फसल की उपज करने में आसानी मिल सकती है.
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1. स्मार्ट सिंचाई
बढ़ती जल की कमी और भूजल संसाधनों के कम होने पर सिंचाई प्रणाली की एक महत्वपूर्ण जरिए बचता है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 50% से कम कृषि तक ही अच्छी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है.
सिंचाई के कारण ही कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्य अभी भी जलवायु परिवर्तन के प्रति अतिसंवेदनशील हैं. स्मार्ट सिंचाई प्रणाली जैसे ड्रिप, स्प्रिंकल और कुशल जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
2. कटाई के बाद में फसल की हानि कम करें
भारत में कटाई के बाद हर साल लगभग 13 बिलियन डॉलर की फसल का नुकसान होता है. फल औऱ सब्जियों की कुल कटाई का 16 प्रतिशत खराब हो जाता है और सिर्फ फसल का लगभग 2.2 प्रतिशत ही ढंग से इस्तेमाल करने लायक होता है.
छोटे किसानों को इससे और भी ज्यादा नुकसान होता है. इसका कारण यही है कि उनके पास फसल को बाहर भेजने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते. साथ ही फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में भी वह नाकाम होते हैं.
वहीं एक कारण यह भी है कि अपने उत्पाद बेचने के लिए इन्हें भी बिचौलियों पर निर्भर होना पड़ता हैं. परिणामस्वरूप, कभी-कभी इसे उत्पादन करने की लागत से भी कम मूल्य पर बेचने के लिए मजबूर किया जाता है.
इन किसानों को सही मूल्य और समय रहते फसल की खरीदारी के लिए सरकार को भी कोशिश करनी चाहिए.
3. डेटा चलित आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन
भारत की कृषि आपूर्ति को ढंग से चलाने के लिए डेटा का उपयोग करना शुरू करना चाहिए. इसमें सेंसर, जीपीएस और सैटेलाइट इमेजिंग जैसी नई टेकनॉलोजी देश की मदद कर सकती है.
इस डाटा से नुकसान कम किया जा सकता है साथ ही फसलों का सही उत्पादन, संग्रहित और वितरित करने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है.
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4. किसान केंद्रित फसल बीमा
जलवायु परिवर्तन की वजह से अनिश्चितता की भरपाई करने के लिए किसानों को प्रभावी फसल बीमा कार्यक्रम की आवश्यकता होती है. कई लोग बीमा कार्यक्रमों में भुगतान करते हैं लेकिन वे थोड़ा संरक्षण प्रदान करते हैं .
लेकिन सिस्टम को ओवरहालिंग की आवश्यकता है ताकि छोटे किसानों को कम प्रीमियम और लंबी अवधि के बीमा कवर के द्वारा संरक्षित किया जा सके.
5. साक्ष्य आधारित अनुसंधान
उपज बढ़ाने के लिए कृषि अनुसंधान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. जलवायु परिवर्तन के साथ आने वाली सभी समस्याओं के लिए इससे बेहतर उपाय सामने आ सकते हैं और चरम गर्मी, वर्षा, कीट और फसल रोग सहित कई मुश्किलों को अनुसंधान और रिसर्च के दम पर सुलझाया जा सकता है.
ये उपाय फसल और जल प्रबंधन प्रथाओं में सुधार होगा वे छोटे किसानों की मदद कर पाएंगे ताकि वह अच्छा उत्पादन कर सके.
यह पर्यावरण और अन्य स्थितियों की निगरानी में भी मदद करेंगे और किसानों को बेहतर जीवन जीने में मददगार साबित होंगे.