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तेलंगाना में किसानों को फसल उगाने के लिए प्रति एकड़ मिलेगी 4000 रुपए की प्रोत्साहन राशि

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Farmer Investment Support Scheme
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Farmer Investment Support Scheme :  मई से शुरू होगी योजना

Farmer Investment Support Scheme : देश में लगातार हो रही किसानों की आत्म हत्याओं से सभी राज्य सरकारें चिंतित हैं. केंद्र सरकार के अलावा बाकी सब भी अपने स्तर पर उनकी स्थिति सुधारने की कोशिश में लगे हुए हैं.

ऐसे में तेलंगाना सरकार ने मई से किसानों की दशा सुधारने के लिए एक नई योजना की शुरुआत करने का ऐलान किया है.
सरकार की इस योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 4,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी, जो कि उनके बीज, उर्वरक, कीटनाशक और क्षेत्रीय तैयारी में खर्च करने के लिए काम आएगी.
इस तरह मिलेगा लाभ
किसानों का 4,000 रुपये प्रति एकड़ की राशि वाली पहली किश्त खरीफ सीजन से पहले जून में दे दी जाएगी फिर रबी की फसलों की बोआई से पहले अक्टूबर में दूसरी किश्त उपलब्ध करा दी जाएगी.
बता दें कि इस योजना के अंतर्गत आने वाले 72,00000 किसानों को कवर करने के लिए सरकारी खजाने को लगभग 9,600 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है.
यह सब्सिडी राज्य के पूरी 1.62 करोड़ एकड़ खेती योग्य जमीन पर लागू होगी. ऐसा माना गया है कि राज्य में 85-86 प्रतिशत खरीफ के सीजन में खेती करते हैं जबकि रबी सीजन में 60-61 प्रतिशत की खेती होती है.
सरकार के अनुसार हर 5,000 एकड़ जमीन के लिए एक कृषि विस्तार अधिकारी नियुक्त होगा, जो यह रिपोर्ट करेगा कि लाभ लेने वाले एक किसान एक फसल उगाने वाला है या नहीं.
पिछले साल अक्टूबर-दिसंबर में राजस्व विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में किसानों की कुल संख्या 72 लाख बताई गई है.
उनमें से 98 प्रतिशत के पास 10 से कम एकड़ जमीन पाई गई ,1.75 प्रतिशत किसान के पास 10 से 25 एकड़ जमीन और 25 एकड़ से अधिक 0.25 प्रतिशत जमीन है. इसलिए, यह योजना छोटे किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाएगी.
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मुफ्त बिजली का पहले ही हो चुका है ऐलान
तेलंगाना की किसान निवेश सहायता योजना में सभी खर्चों के अलावा कृषि पंपों के लिए मुफ्त बिजली मिलकर 16,000-16,500 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च सरकारी खजाने से लिए जाने की घोषणा पहले ही हो चुकी है.
यह रकम तेलंगाना सरकार के कुल 1,4 9, 646 करोड़ रुपये के बजट का दसवां हिस्सा है.
किसान सब्सिडी छोड़ने के लिए स्वतंत्र
तेलंगाना सरकार जल्द ही राजस्व विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार पहचान किए सभी 72 लाख किसानों को भूमि स्वामित्व पासबुक वितरित करेगी. पासबुक में किसान का नाम, भूमि सर्वेक्षण संख्या, एकड़ में आकार, आधार आईडी, मोबाइल फोन और अन्य जानकारी होनी अनिवार्य है.
यह भूमि के अधिकारिक हक के सबूत के रूप में काम करेगा. इसके अलावा यदि कोई अपनी इच्छा से किसान सब्सिडी का अधिकार छोड़ना चाहता है, तो वह हमेशा ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है.
8,000 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी महत्वपूर्ण रूप से किसानों के बैंक खातों में नहीं ट्रांसफर की जाएगी इसके लिए सरकार की तरफ से गुलाबी रंग का चेक सौंपा जाएगा.
ऐसा करने के पीछे राज्य सरकार का तर्क है कि वो यह नहीं चाहती कि पैसा बैंक खाते में दिया जाए और बैंक उससे लोन की किश्त काट ले.
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अन्य राज्यों के लिए योजना बनी उदाहरण
बेशक इस योजना से सरकार की तरफ से किसानों की आमदनी का समर्थन किया जा रहा है. लेकिन वास्तव में किसानों के उज्जवल भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री की यह पहल बेहद सराहनीय है इसमें हर किसान को 1 एकड़ में 4,000 रुपये मिल रहा है, जिससे वह कोई भी खारिफ या रबी की फसल उगा सकता है.
वहीं दूसरी तरफ देश के बाकी राज्यों को भी किसानों की स्थिति के लिए ऐसा कुछ सोचना होगा ताकि राज्य के अन्नदाताओं का उद्धार हो सके. क्योंकी बिना उनकी स्थिति सुधारे राज्य नहीं देश की तरक्की का सपना भी अधूरा ही रह जाएगा.

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