इस घास की खेती कर हमारे किसान भाई हो सकेंगे मालामाल

Profit From Vetiver Grass Farming
खस की घास

Profit From Vetiver Farming :इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक और फार्मा इंडस्ट्री में भी किया जाता है.

Profit From Vetiver Grass Farming : तमिलनाडु की एक वेटिवर(खस) घास इन दिनों देश भर के लोगों के बीच काफी ज्यादा डिमांडिंग बन चुकी है.

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर एक घास में ऐसा क्या है जिसके पीछे लोगों के अंदर इस कदर उत्सुकता है.
तो यहां आपको बता दें कि वेटिवर  कोई आम घास नहीं है, इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक और फार्मा इंडस्ट्री में किया जाता है.
वहीं यह घास भूस्खलन और सॉइल इरोजन से बचाने में भी मदद करती है.इसके इतने फायदे हैं कि इसे लोग Wonder Grass भी कहते हैं.
बता दें कि 5 से 10 फीट तक उगने वाली इस घास की कई खासियतें है, आइए जानते हैं…
किसानों में बढ़ रहा इसे उगाने का क्रेज
इसके पौधे झाड़ियों की तरह होते हैं, जड़ें जमीन में काफी नीचे तक होने के कारण ये मिट्टी को मजबूती से पकड़ पाती हैं.
यही वजह है कि ये ज्यादा पानी सोखती है और इसी कारण लोग अब इसे बाढ़ से बचाने के लिए भी इस्तेमाल करने लगे हैं.
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इसकी जड़ों से निकाला गया तेल काफी महंगा बिकता है यही वजह है कि भारत समेत पूरी दुनिया में इसकी मांग तेजी से बढ़ती जा रही है.
गुजरात में भुज और कच्छ से लेकर, तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश तक में इसकी खेती बड़े पैमाने पर हो रही है.
इस तरह कमाएं
वेटिवर घास की खेती बेहद ही आसान है जिससे काफी मुनाफा कमाया जा सकता है. इसका इस्तेमाल नदी के पानी को साफ करने और खासकर मंदिरों के टैंकों को साफ करने में मदद करता है.
खस (वेटिवर) की जड़ों की रोपाई मई से अगस्त महीनें तक चलती है. करीब दो मीटर तक उंचाई वाले इस खस की पीली-भूरी जड़े जमीन में 2 फुट गहराई तक जाती हैं.
करीब 15 -18 महीने के बाद इसे तैयार माना जाता है और फिर इनकी जड़ों को खोदकर कर उनकी पेराई की जाती है.
एक एकड़ ख़स की खेती से करीब 6 से 8 किलो तेल मिल जाता है यानि प्रति हेक्टेयर में 15-25 किलो तक तेल मिल सकता है.
गौरतलब है कि भारत सरकार एरोमा मिशन के तहत पूरे भारत में खस की खेती को बढ़ावा दे रही है.
आपको बता दें कि एक किलोग्राम तेल की कीमत बाजार में करीब 30,000 से 58,000 तक होती है. तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के किसान सी पांडियन ने इस खेती से अच्छी कमाई करी है. 
भविष्य के लिए बड़ी कारक
जैसे-जैसे दुनिया शुद्ध और प्राकृतिक उत्पादों की मांग बढ़ी है, खस के तेल की कीमतों में न सिर्फ वृद्धि हुई है बल्कि खेती का दायरा भी बढ़ा है.
एक मोटे अनुमान के मुताबिक दुनिया में प्रति वर्ष करीब 250-300 टन तेल की मांग है,जबकि भारत में महज 20-25 टन का उत्पादन हो रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि इसकी आगे बहुत संभावनाएं हैं.
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अंदर के खेतों में उगाने में आता है ज्यादा खर्च 
बता दें कि समुद्री इलाकों में तो ये घास आसानी से उग जाती है लेकिन आम अंदर के खेतों में इसे उगाने में काफी खर्च आता है.
द हिंदू पर छपि खबर के मतुबिक सुमुद्र तट के एक एकड़ में इसकी लगभग 2-2.5 टन पैदावार होती है जबकि समान खेतों में इसकी लगभग 1.5 लाख टन की ही पैदावार होती है.