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Farmizen App : इस ऐप की मदद से बैंगलुरू के लोग खुद की उगाई सब्जियों का कर रहे सेवन

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Farmizen App
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Farmizen App : बेड के आधार पर बांटी जाती है जमीन

Farmizen App : बाजार में सब्जी खरीदते वक्त अक्सर हमारे दिमाग में यह संशय जरूर बना रहता है कि क्या हम जो सब्जियां खरीद रहे हैं वो पूरी तरह ऑरगैनिक है? कहीं इन्हे केमिकल से तो नहीं उगाया गया.

ऐसे में हमारे पास तसल्ली करने का एक ही तरीका बचता है और वो कि हम खुद बिना किसी केमीकल के इस्तेमाल के उगाई हुई सब्जियां खाएं. हो सकता है हमारी इस बाते से आपको हैरानी हो रही हो कि सभी लोग खुद कैसे सब्जी उगाना शुरू कर सकते हैं.
लेकिन बैंगलोर जैसे बड़े शहर में ऐसा वाकई हो रहा है जहां लोग जमीन किराए पर लेकर अपने खाने के लिए पूरी तरह से नेचुरल तरीकों से सब्जी उगा रहे हैं.
फार्मिजेंन(Farmizen) नाम का एक स्टार्टअप बैंगलोर के लोगों को यह मौका दे रहा है कि वह कुछ जमीन किराये पर लेकर अपनी इच्छा अनुसार उसमें सब्जी की खेती करें.

FARMIZEN APP

इस तरह उगा सकते हैं खुद की सब्जी
इस नई कोशिश का हिस्सा बनने के लिए आपको सबसे पहले फार्मिज़ेन ऐप को गूगल प्लेस्टोर और ऐप स्टोर से डाउनलोड करना होगा .
इसके लिए आपको अपना सारा विवरण ऐप में सेट अप करना होगा और उन सब्जियों को चुनना होगा जिन्हें आप उगाना चाहते हैं. इसके लिए कंपनी की तरफ से एक तय शुल्क देकर मासिक सदस्यता लेने पड़ती है.
एक बार आपकी प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी हो जाने पर, जमीन का प्रबंधन देखने वाले किसान आपके द्वारा चुनी गई सब्जियों के साथ अपनी प्लॉट को तैयार करना शुरू कर देता है. जैसे जैसे आपकी फसल बढ़ेगी आपको हर महीने के विवरण के साथ लगातार अपडेट किया जाता रहेगा.
इसके अलावा इस ऐप की मदद से आप उन ग्राहकों के साथ चैट भी कर सकते हैं, जिनके पास आप जैसे ही प्लॉट है उन्होंने आप जैसी ही सब्जियां उगाई हैं.
इसके बाद जब आपकी फसल तैयार हो जाएगी, तो आप इसे खुद लेने खेत में जा सकते है या चाहे तो घर बैठे भी मंगवा सकते हैं.
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बेड के आधार पर बांटी जाती है जमीन
इस फार्मुले के तहत मिनी खेत को 12 बेडों में विभाजित किया जाता है, इसलिए आप हर बेड पर एक सब्जी या फिर एक ही बेड पर अलग अलग सब्जियों का भी चयन कर सकते हैं.
प्रत्येक प्लॉट 600 वर्ग फुट का होता है और इसकी मासिक सदस्यता लेने के लिए आपको लगभग 2500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं.
फार्मिज़ेन के सहकारी संस्थापक शमीक चक्रवर्ती का कहना है कि हमारी खाद्य प्रणाली(सिस्टम) पूरी तरह टूट चुकी है, और दुर्भाग्य से मौजूदा सिस्टम इसमें किसी की मदद नहीं कर रहा है.
उन्होंने कहा कि हम उपभोक्ताओं के रूप में बाजार में जाकर ऑरगैनिक उत्पादों की तलाश करते हैं. लेकिन क्या हम ये मालूम कर पाते हैं कि हम जो खरीद रहे हैं वह ऑरगैनिक है या नहीं?
शमीक ने बताया कि आज हर आम इंसान सब्जी खरीदते वक्त दुकानदार से यही मांग करता है कि उसके द्वारा खरीदी गई सब्जियों के स्वाद और पोषण में कोई कमी ना हो.
जिससे किसान पर और ज्यादा बोझ बढ जाता है जिस वजह से वह ऐसे केमिकल्स का इस्तेमाल करते है जो लंबे समय तक सब्जियों की ऊपर से गुणवत्ता बनाए रखे.
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पुराने तौर तरीके से उगाई जा रही सब्जी
शमीक कहते हैं लोगों के इन्ही सब चीजों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए हम पुराने तरीके से कृषि कर रहे हैं. जहां किसी तरह के केमिकल या मशीनी चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
बता दें कि फेमिजन फिलहाल बेंगलुरु में ही काम कर रहा है और फिलहाल लगभग 400 उपभोक्ता इससे जुड़े हुए हैं. जबकि आने वाले समय में इस कंपनी की कोशिश है कि वह दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई में भी अपना विस्तार करे.

साभार – द हिंदू