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महाराष्ट्र सरकार किसानों की मदद के लिए 1,000 गांवों में शुरू करेगी Group Farming Model

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group farming model
फोटो साभार- एचटी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में खेती और गांवो की दशा सुधारने के लिए group farming model लागू करने की योजना बनाई है. इसके लिए उसने राज्य के 1000 सबसे पिछड़े गांवों का चयन भी कर लिया है.

इस मॉडल का उद्देश्य कृषि को बढ़ावा देकर किसानों की खेती के उत्पादन और आय को अधिक करना होगा. सरकार ने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2019 तक का समय निर्धारित किया है.
वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मॉडल के बारे में बताते हुए कहा कि सरकार की इस योजना के माध्यम से किसानों की आर्थिक दशा में सुधार हो सकेगा.
उन्होंने कहा कि इन 1,000 पिछड़े गांवों के परिवर्तन से केवल एक आदर्श मॉडल ही नहीं बनेगा, बल्कि यह पूरे महाराष्ट्र में 40, 9 13 अन्य गांवों को सक्षम बनाने में भी बहुत मदद कर सकता है.
मॉडल का विवरण
इस गांव परिवर्तन मॉडल के तहत, सीएमओ ने 143 गांव ट्रांसफार्मर की एक टीम तैयार की है. जिसके पास आने वाले तीन सालों में इन गाँवो में घर बनाने का जिम्मा रहेगा. इस टीम में इंजीनियर से लेकर सामाजिक कार्यों में मदद करने वाले युवा शामिल रहेंगे.
इसके साथ ही गांवों के युवाओं को भी उनकी जरूरत के आधार पर कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वो भी इस परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद करे सकें.
group farming model में शामिल होने वाले कार्य
इस मॉडल में मुख्य रूप से सूखा कमी, टिकाऊ खेती, ग्राम पंचायतों के डिजिटाइजेशन, टेलीमेडिसिन, ग्रामिण शिक्षा के स्तर को बढ़ाना, रोजगार सृजन और गरीबी को कम करने पर कार्य किये जाएंगे.
योजना में शामिल होने वाले महाराष्ट्र के यह गांव नंदुरबार,पालघर,औरंगाबाद, रायगढ़,बीड,परभणी, नांदेड़,यवतमाल,वर्धा,अमरावती, चंद्रपुर और गडचिरोली तक फैले हुए हैं.
हिवर बाजार के सरपंच और गवर्निंग काउंसिल के सदस्य पोपट पवार ने बताया कि 1,000 गांवों के बदलाव के मसौदे पर हमने एक वर्ष तक बहुत सावधानी के साथ काम किया है.
प्रत्येक काम को टुकड़ों में बांटकर उसे सही तरीके से लागू करने की योजना बनाई है, जिससे कि अंत मे अच्छे परिणाम आ सकें.
उन्होंने कहा कि यह मॉडल एक प्रशिक्षण मैदान है जो दूसरे विकास मॉडल से बिल्कुल अलग है.
इसमें दो महत्वपूर्ण मापदंडों पर जोर दिया गया है, पहला गरीबी से निपटना और दूसरा हर गांव में रहने की अच्छी व्यवस्था करना.
पोपट पवार ने कहा कि यदि सरकार का यह मॉडल गांवों में सफल होता है तो, रोजगार की तलाश में गाँवो से शहर आने वाले युवाओं को वहीं गांव में ही रोका जा सकता है.
group farming model परियोजना पर काम कर रहे एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अलग-अलग कॉरपोरेट कंपनियों से 90 करोड़ रुपये की राशि मदद के रूप में ली गई है.
हालांकि राज्य सरकार भी जरूरत पड़ने पर अपनी तरफ से पूरी सहायता करेगी. जिससे की इस योजना से पिछड़े गांवों के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बदलाव आ सके.

साभार- द इंडियन एक्सप्रेस