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ग्रामीण भारत में पिछड़ रहा डिजिटल इंडिया, रिपोर्ट में सामने आई वजह

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Internet In India 2017
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Internet In India 2017 : ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन की दर काफी कम है

Internet In India 2017 : इंटरनेट व मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) और मार्केट रिसर्च फर्म कंटार ने हाल ही में भारत के अंदर मौजूद इंटरनेट प्रणाली पर एक रिपोर्ट तैयार की है.

जानकारों द्वारा किए गए इस शोध के आंकड़े कहते हैं कि इंटरनेट का उपयोग करने में देश के ग्रामीण इलाके शहरों की तुलना में अभी भी बहुत पीछे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार इन इलाकों के पीछे होने का कारण बिजली की कमी और नेटवर्क की खराब गुणवत्ता को बताया गया है.
इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन, ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान की दर अभी भी काफी कम है.
गौरतलब है कि बीते एक साल में सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कई अभियान चलाए हैं लेकिन फिर भी इस स्थिति में कुछ खास सुधार नहीं हो सका है.
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क्या कहते हैं आकड़े
इस रिपोर्ट के अगर पूरे आंकड़ों पर नजर डालें तो महज 16% ग्रामीण उपयोगकर्ता ही वित्तीय लेन-देन के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में इसकी संख्या 44% है.
बीते साल दिसंबर 2017 तक, भारत में 481 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता थे, जो 2016 के बाद से 11.34% तक बढ़े हैं. जिनमें से, भारत के शहरी क्षेत्रों में 295 मिलियन और ग्रामीण इलाकों में 186 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता रहे.
रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल भारत में अब भी इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या काफी कम है. हालांकि इसमें यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि जून 2018 तक देश में इंटरनेट उपयोगकर्ता की संख्या 500 मिलियन हो जाएगी.
4G स्पीड में फिसड्डी
यही नहीं हाल ही में ओपनसिग्लन ने भी भारत में 4G इंटरनेट कवरेज को लेकर एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें भारत इंटरनेट डाटा स्पीड और सिग्नल के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है.
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अगर इस रिपोर्ट की बात करें तो देश में इस समय 86.3 प्रतिशत 4G इंटरनेट कवरेज है जो भारत को टॉप के देशों में शामिल करता है लेकिन स्पीड के मामले में भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पिछड़ हुआ है.
वहीं ऊपर दी गई दोनों रिपोर्ट के आंकड़ों से एक बात तो साफ है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे डिजिटल इंडिया का सपना दूर-दूर तक अब भी अंधेरे में नजर आ रहा है.
एक तरफ तो इंडिया को डिजिटल बनाने के लिए पुरजोर प्रयास के नारे लगा रही है वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में हुए सर्वे के ये आंकड़े अपनी ही एक अलग सच्चाई को पेश कर रहे हैं, जिसे देखकर ऐसा लगने लगा है कि कहीं डिजिटल इंडिया बनने का सपना सपना बनकर ही रहने वाला तो नहीं है.

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