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कनार्टक का ये किसान छोटे स्तर पर ही सही, पर बदल रहा है कृषि का चेहरा

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भारत एक विस्तार करती हुई आर्थव्यवस्था है, जिसमें कृषि क्षेत्र का सदियों से काफी योगदान रहा है.
इंडिया ब्रैंड इक्वीटी फाउंडेशन की रिर्पोट के अनुसार भारत के ग्रमीण वर्ग के 58 प्रतिशत लोग कृषि और पशुपालन से जुड़े हैं. जो कि देश की जीडीपी को बढ़ाने में काफी अहम रोल निभाते हैं.
मगर बड़े दु्र्भाग्य की बात है कि जिस भारत की पहचान एक कृषि प्रधान देश के रूप में होती थी अब उसी देश में अब किसानों की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है.
कृषि से मुंह मोड़ रहे किसान
आपको बता दें कि जितनी तेजी से देश का आधुनिकरण हो रहा है उतनी ही तेजी से लोगों के अंदर से खेती किसानी से मोहभंग होता जा रहा है.
हाल ही में हुए एक सर्वे के मुताबिक 2012 में जहां 52.2 प्रतिशत लोग कृषि क्षेत्र से जुड़े थे. वहीं 2015 में यह संख्या घटकर 45.7 रह गई है.
हालांकि इसकी वजह दो साल में कम हुई बारिश को माना जा रहा है, लेकिन फिर भी कृषि क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में गिरावट आने वाले समय के लिए काफी चिंताजनक है.
किसानों की कृषि से दूर जाने की वजह को देखते हुए कर्नाटक के उत्तर कोडागो गांव के ए डी मोहन कुमार ने इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए एक पहल की है.
कौन है ए डी मोहन
कॉमर्स से ग्रेजुएट ए डी मोहन एक किसान हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान का इस्तेमाल किसानों को नई राह दिखाने में किया.
इन्होंने नई तकनीकों का प्रयोग करके ऐसी मशीनें बनाई जो किसानों को उनकी खेती करने के तरीके को आसान करने में मदद कर सकती हैं.

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मोहन ने अपने हुनर का इस्तेमाल कर 100 सीसी बाईक के इंजन लगाकर एक स्प्रे मशीन बनाई. जिससे कॉफी, काली मिर्च और बाकी चीजों की खेती करने वाले किसान इस मशीन की मदद से बिना ज्यादा मेहनत के अपना काम कर सकते हैं.
इसके अलावा उन्होंने जमीन जोतने वाली कम लागत की एक मशीन भी बनाई है जो किसानों के लिए बहुत लभदायक साबित हो रही.
गरीब मजदूरों के लिए बनाई मशीनें
मोहन जानते हैं कि गांव में एक मजदूर दिन का 400 से 500 रुपए की दिहाड़ी लेता है. ऐसे में छोटे किसान के बस में नहीं होता कि वह यह खर्चे उठा सके. ऐसे में उनकी मशीनें उनके लिए बहुत कारगार साबित हो रही हैं. जो कम लागत में आसानी से लोगों तक उपलब्ध हो जाती है.
ट्रैक्टर की जगह लेगी मोहन की यह मशीन
मोहन बताते हैं कि उनकी यह नई मशीन टीवीएस 50 के मोपड इंजन पर काम करती है. जिसमें हर घंटे 850 से 1000 मीली लीटर तेल की खप्त होती है.
उन्होंने कहा कि यह उन किसानों के लिए बेहद अच्छा विकल्प है जो ट्रैक्टर का खर्चा नहीं उठा सकते.
गौरतलब है कि मोहन की इस नई मशीन से किसानों का वक्त और मजदूरी दोनों बचता है.
फिलहाल इस मशीन की कीमत 30 हजार रुपए है. हालांकि मोहन को उम्मीद है कि सरकार इसमें सब्सीडी देकर इसका दाम कम करेगी ताकी और किसान भी इसका फायदा उठा सकें.
ऐसा होना भी चाहिए, किसानों के उत्थान के लिए हर मुमकिन कोशिश होनी चाहिए. और ऐसी कोशिश करने वालों को सरकार का साथ भी मिलना चाहिए.
साभार- द इंडियन एक्सप्रेस