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कृषि उन्नति मेले में पीएम मोदी की कही गई इन बातों से क्या संवरेगा किसान भाईयों का भविष्य ?

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PC - PIB(File Photo)

Krishi Unnati Mela 2018मेले में पीएम मोदी ने किसानों का बढ़ाया मनोबल

Krishi Unnati Mela 2018 : कृषि प्रधान देश कहे जाने वाले भारत में मंद पड़ी खेतिहर व्यवस्था को एक बार फिर से बढाने की कोशिश की जा रही है, और इस बार इसका बीड़ा खुद देश के पीएम ने उठाया है.

कृषि को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार कई नई स्किम तो ला ही रही है साथ ही साथ पीएम नरेंद्र मोदी खुद अपनी तरफ से कृषि क्षेत्र में बिगड़ती हालत को सुधारने की हर कोशिश करने में लगे हैं.
दिल्ली में कृषि उन्नति मेला 2018 का आयोजन
नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कृषि उन्नति मेला का आयोजन किया गया है जो 16 मार्च से 18 मार्च तक चलेगा.
इस मेले का उद्देश्य आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रति लोगों को जागरुक करना है, ताकि इससे किसान अपनी पैदावार बढ़ा सकें.
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मेले में पीएम मोदी ने किसानों से कही ये बात
मेले के दूसरे दिन यानि की 17 मार्च को पीएम मोदी ने पूसा में शिरकत की जहां उन्होंने अपने किसान भाईयों के लिए जोरदार भाषण दिया.
वहीं प्रधानमंत्री को भी सुनने के लिए मेले में पुरुष व महिलाएं भारी संख्या में पहले से ही इकट्ठा हुए थे और उन्हें सुनने के बाद वो काफी उत्साहित भी नजर आए.
पीएम मोदी ने अपने भाषण में किसानों को सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया.
उन्होंने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के उनकी सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी सहित किसानों के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाना चाहिए.
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने प्रदूषण कम करने के लिये किसानों से खेतों में फसलों के बचे डंठल और पराली नहीं जलाने की भी अपील की.
इसके साथ ही उन्होंने अपने भाषण में बताया कि उनकी सरकार कृषि मार्केटिंग को मजबूत बनाने के लिये बड़े पैमाने पर काम कर रही है. उन्होंने भविष्य  में किसानों की आय बढ़ाने के लिये ग्रामीण मंडियों को एपीएमसी थोक मंडियों के वैश्विक बाजारों से जोड़ने के बात भी कही.
वहींकिसानों को फसल पर मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य के बारे में मोदी जी ने कहा कि किसानों की फसलों पर एमएसपी के मामले में भ्रम फैलाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सभी राज्य सरकार से इस मामले में बात कर रही है ताकि समर्थन मूल्य की घोषणा करते समय सभी प्रमुख लागतों को इसमें शामिल किया जा सके.
 प्रधानमंत्री के संबोधन को किया गया लाइव प्रसारित
बता दें कि पीएम मोदी के भाषण को पूरे देश में वेब के जरिए प्रसारित किया गया. प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देश के अलग-अलग जगहों पर प्रस्तावित 25 कृषि विज्ञान केंद्रों का ऑन लाइन शिलान्यास भी किया.
इसके साथ ही उन्होंने जैविक खेती से संबंधित पोर्टल का भी बटन दबा कर उद्घाटन किया. गौरतलब है कि पीएम के इस संबोधन की स्थानीय किसानों द्वारा भी खूब सराहना की गई.
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कृषि विज्ञान मेला का अपना है इतिहास
कृषि विज्ञान मेला वर्ष 1972 में पहली बार शुरू किया गया था उस समय देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी थी. बता दें कि यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का एक महत्वपूर्ण सालाना उत्सव है.
इसे कृषि तकनीकी विकास के बारे में जागरूकता पैदा करने और कृषि समुदाय से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए आयोजित किया जाता है.
वहीं कृषि समुदाय से मिली प्रतिक्रिया संस्थान की अनुसंधान संबंधित रणनीति बनाने में मददगार होती है. यह मेला कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर एक विशेष थीम के साथ हर साल आयोजित किया जाता है.
किसानों की स्थिती है बत्तर
एक तरफ पीएम मोदी कृषि विज्ञान मेला में किसानों का मनोबल बढ़ाने का काम कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर अभी कुछ दिनों पहले ही महाराष्ट्र के 35000 हजार किसान अपनी दुर्दशा से अवगत कराते हुए 180 किलोमीटर का पैदल मार्च करते हुए मुंबई पहुंचे थे.
सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के हर हिस्से में किसान अपनी जायज मांगो को लेकर सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई उनकी सूद लेने वाला नहीं है.
हाल ही में जारी एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिवर्ष देश के 12 हजार किसान आमहत्या कर लेते हैं, जबकि इससे ज्यादा उन किसानों की तादाद है जो हर साल खेती छोड़ रहे हैं.
ऐसे में देश के पीएम मोदी द्वारा कृषि मेले में भाषण देना महज एक आडंबर प्रतित होता है. जिसे सिर्फ और सिर्फ जनता को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किया गया है.