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भारतीय कृषि क्षेत्र में 2020 से जलवायु परिवर्तन का नकारात्मक प्रभाव शुरू- रिपोर्ट

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दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के बढ़ रहे नकारात्मक प्रभाव का असर अब भारत के खेती पर भी पड़ना शुरू हो गया है. आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन की वजह से पंजाब और हरियाणा राज्य में धान (चावल) के उत्पादन में भारी कमी देखने को मिल सकती है.
एक रिपोर्ट के अनुसार 2020 तक हरियाणा और पंजाब में चावल की खेती में 6% से 8% की कमी आने का अनुमान है. हालांकि दूसरी तरफ इन दोनों राज्यों में आलू के उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना है.
यह अनुमान संसद के द्वारा बनाई गई कृषि संबंधित स्टैंडिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में लगाया है. इस 31 सदस्य वाली कमिटी की अध्यक्षता मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हुकुमदेव नारायण यादव जी कर रहे थे.
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक जलवायु परिवर्तन के चलते पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में आलू का उत्पादन 3.46% बढ़कर 7.11% हो जाएगा. मगर शेष भारत में इसका उत्पादन 4% से 16% तक कम हो सकता है.
वहीं दुग्ध उत्पादन के मामले में भी हरियाणा समेत पूरे उत्तर भारत में भारी गिरावट देखने को मिलेगी.
कमिटी के द्वारा बनाई गई रिपोर्ट के अनुसार बदलते जलवायु की वजह से गेहूं, चावल और मक्के जैसी अहम फसलों का उत्पादन कम होगा. जबकि मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलों पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा. वहीं बढ़ते तापमान के कारण फसली कीटों की संख्या भी अधिक बढ़ने की संभावना है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक पूरे देश में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम  2.40 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा, वहीं दूसरी तरफ मॉनसून के महीनों में कमी आ जाएगी.जिसके कारण बारिश का औसत कम हो जाएगा. यही नहीं बारिश की तीव्रता में वृद्धि और चक्रवात के कारण किसानों की समस्या और भी बढ़ जाएंगी.
कृषि संबंधित इस पूरी रिपोर्ट का आकलन करने के बाद यही पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से आने वाले दिन कृषि क्षेत्र के लिए काफि नुकसान दायक साबित होंगे.
साभार- टाइम्स ऑफ इंडिया