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कृषि वैज्ञानिकों ने निजात की अंगूर की नई किस्म, किसानों को मिल सकेगा अब ज्यादा लाभ

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New Grapes Variety
फोटा साभार - ट्वीटर

New Grapes Variety : मेडिकल दवाइयों के निर्माण में लाभदायक साबित होगा इस अंगूर का जूस

New Grapes Variety : हमारे देश में किसानों के दुख भरे हालातों से हम सभी वाकिफ हैं. इसकी एक वजह उनके अंदर कृषि की नई तकनिकों की सही जानकारी की कमी को माना जाता है.

हम सब यह जानते हैं कि विज्ञान के बढ़ते दौर में नई तकनीक की मदद से किसानों के खेती करने के तरीके में सुधार किया जा सकता है.
ऐसी ही एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके कुछ कृषि वैज्ञानिकों ने अंगूर की नई किस्म इजात की है जो किसानों को कई तरह से मुनाफा कमाने का मौका दे रही है.
पुणे के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर अंगूर (एनआरसीजी) के वैज्ञानिकों ने विभिन्न प्रकार के हाइब्रिड अंगूर विकसित किए हैं जो आने वाले सीजन में व्यावसायिक खेती के लिए जारी किए जाएंगे.
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इस बात की पूरी संभावना है कि मांजरी मेडिका नाम की ये नई अंगूर की किस्म भारत में खेती की जाने वाली कुछ रसीले फलों की किस्मों में से एक होगी.
एनआरसीजी के निदेशक एस डी सावंत ने कहा कि इस किस्म में एन्थॉकायनिन और समृद्ध एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण मौजूद हैं जो इसकी शुद्धता का प्रमाण हैं.
इसकी सामान्य उपज लगभग 10-12 टन प्रति एकड़ है और यह अन्य टेबल या शराब की किस्मों की तुलना में बिमारियों के प्रति ज्यादा अच्छा काम करती है.
बता दें कि अंगूर के रस के अलावा पोमेस यानि रस के निकलने के बाद प्राप्त अंगूर के रेशेदार लुगदी को सूखाकर उसके बीज का उपयोग तेल निकालने के लिए किया जा सकता है.
वहीं निकाले गए तेल का प्रयोग कॉस्मेटिक उद्योग में किया जाता है और किसानों के लिए यह एक अतिरिक्त आय का स्रोत हो सकता है. इसके अलावा औषधीय तौर पर भी किसान इस अंगूर का अच्छा इस्तेमाल कर सकते हैं.
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फल की वाणिज्यिक खेती का अनुकूलन करने के लिए एनसीआरजी ने नासिक आधारित सहयाद्री फार्मों के साथ समझौता किया है.
जानकारी के लिए बता दें कि सहयाद्री खेतों में रस निकालने के लिए एक आयातित मशीनरी है, जिसे किसी भी प्रीजवेटिव के छह महीनों तक संरक्षित किया जा सकता है. उनके पास बीज के तेल निकालने और पोमेस से पाउडर बनाने की सुविधा भी है.
वहीं सह्याद्री फार्म के अध्यक्ष विलास शिंदे ने कहा कि अंगूर के रस के लिए उनकी फर्म इसकी मार्केटिंग और ब्रांड निर्माण पर भी काम करेगा.
इस तरह की नई खोजों से किसानों के लिए एक नई उम्मीद जागी है. कम खर्च में बेहतर उपज से वह अपने जीवन का स्तर और अच्छा कर सकेंगे.