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Rural India English : ग्रामीण भारत के 58 फीसदी किशोरों के पास है बुनियादी अंग्रेजी का ज्ञान – सर्वे

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Rural India English
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Rural India English : ग्रामीण मां बाप ने माना अंग्रेजी का महत्व

Rural India English : आज भी हमारे देश में अंग्रेजी(English) को गुलामी की भाषा के तौर पर देखा जाता है. रूढ़ीवादी सोच रखने वाले लोग तो अंग्रेजी बोलने वालों को देश के दुष्मन के तौर पर देखते हैं

खैर चाहे जो भी कहा जाए लेकिन ,सच तो यह है कि आज के समय में अंग्रेजी जानना और बोलना कितना जरूरी बन गया है इस बात का एहसास हम सभी को हो गया है.
सिर्फ शहर ही नहीं ग्रमीण क्षेत्रों में भी लोग इसकी अब जरूरत को समझने लगे हैं जिस वजह से अंग्रेजी की तरफ उनका झुकाव तेजी से बढ़ा है .
हाल ही में सामने आए सर्वे में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में अंग्रेजी पढने वाले बच्चों की तदाद पहले से ज्यादा बढी है.
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अंग्रेजी में बढ़ी ग्रामीण किशोरों की दिलचस्पी
देश के 24 राज्यों के 30,000 बच्चों पर किए गए इस सर्वे में 58 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण किशोरों ने सर्वेक्षण के दौरान अंग्रेजी भाषा में वाक्यों को पढ़ने में खुद को सक्षम माना है.
वार्षिक स्कूल शिक्षा रिपोर्ट (एएसईआर) 2017 के द्वारा किए गए इस सर्वें में यह पाया गया कि 79 फीसदी बच्चे अंग्रेजी पढ़ने में सक्षम हैं और वो वाक्यों का अर्थ भी समझ जाते हैं.
इस सर्वे में बच्चों को आयु के हिसाब से दो श्रेणी में अलग – अलग बांटा गया था जिसमें 14 वर्ष तक के 53 प्रतिशत बच्चे अंग्रेजी पढने में सक्षम पाए गए जबकि 18 वर्ष के बच्चों में यह संख्या 60 फीसदी तक बढ़ी हुई पाई गई .
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ग्रामीण मां बाप ने माना अंग्रेजी का महत्व
पूर्व सीबीएसई अध्यक्ष अशोक के गांगुली ने ग्रामीण स्कूलों में छात्रों द्वारा अंग्रेजी पढ़ने का कारण उनकी इस भाषा में बढ़ रही दिलचस्पी को बताया है.
उनका कहना है कि अब ग्रमीण क्षेत्रो में रहने वाले माता-पिता भी यह महसूस कर रहे हैं कि उनके बच्चों को बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अंग्रेजी समझना बहुत जरूरी है, जो शायद 10-15 साल पहले नहीं होता था.
गांगुली ने महसूस किया कि हमारे स्कूल की शिक्षा में क्षेत्रिय भाषा के कौशल को महत्व नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि यदि मातृभाषा में बच्चे अच्छे हैं, तो वे अंग्रेजी और अन्य भाषाओं को बेहतर सीख सकते हैं.
वहीं दिल्ली के आहालेकॉन इंटरनेशनल के प्रिंसिपल अशोक पांडे ने कहा कि अंग्रेजी का बढ़ता महत्व सिर्फ एक धारणा नहीं है, बल्कि एक तथ्य है.
इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि लोग यह बात समझ रहे हैं कि बड़ी और विदेशी जगहों पर काम करने के लिए अंग्रेजी भाषा की जानकारी जरूरी है जिससे वह बेहतर रोजगार पाने के काबिल बन सकते हैं.