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UP Smart Village: यूपी के सिद्धार्थनगर का हसुड़ी गांव बना राज्य का पहला स्मार्ट विलेज

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UP Smart Village: एक क्लिक पर गांव की सारी जानकारी

UP Smart Village: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले का हसुड़ी गांव राज्य का पहला स्मार्ट गांव बन गया है.

इस गांव में वाई-फाई, सीसीटीवी कैमरे, ग्राहक सेवा केंद्र, पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी तमाम सुविधाएं मौजूद हैं.
यह यूपी का पहला ऐसा गांव है जहां आपको एक क्लिक पर गांव की सारी जानकारी आसानी से मिल जाया करेगी.
इस गांव को स्मार्ट बनाने का पूरा श्रेय जाता है ग्राम प्रधान दिलीप कुमार त्रिपाठी जी को. इस युवा प्रधान की नई सोच और गांव के लोगों के लिए कुछ करने के संकल्प ने ही आज हसुड़ी गांव का कायाकल्प किया है.
आपको बता दें कि यूपी का पहला स्मार्ट गांव बनाने के लिए उन्हें नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है.
हसुड़ी
नगर विकास मंत्री विनोद खन्ना से सम्मानित होते प्रधान दिलीप कुमार त्रिपाठी
गुजरात के गांव का मॉडल किया लागू
UP Smart Village: हसुड़ी गांव के ग्राम प्रधान दिलीप त्रिपाठी ने जानकारी दी की उन्होंने अपने गांव में गुजरात के पसुरी गांव का मॉडल लागू किया है.
महिलाओं की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देते हुए हसुड़ी में 90 स्ट्रीट लाइट, 23 सीसीटीवी कैमरे गाँव के हर कोने पर लगाए गए हैं. ताकि उनके मन में खुद की असुरक्षा को लेकर कोई संदेह पैदा ना हो सके.
राजधानी लखनऊ के होटल ताज में आयोजित ‘सेकेण्ड स्मार्ट सिटी’ समिट कार्यक्रम में दिलीप त्रिपाठी ने कहा कि हमारे गांव के बारे में ‘डिजिटल हसुड़ी डाट काम’ पर कोई भी व्यक्ति जाकर गाँव में कौन सी चीज कहाँ है, किसका कहाँ खेत है पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता हैं.
क्यों खास है हसुड़ी गांव
UP Smart Village: वर्तमान में इस गांव के मुख्य मार्ग से लेकर गांव के अंदर तक 23 सीसीटीवी कैमरें और 23 पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगे हुए हैं.
यहां हर तीसरे घर के सामने एक कूड़ादान रखा है, इसके अलावा पूरे गांव में कॉमन सर्विस सेंटर, वाई-फाई की सेवा भी मौजूद है.
सिद्धार्थनगर जिले के अंतर्गत 1199 ग्रांम पंचायतें आती है जिसमें आबादी के मामले में इस गांव का स्थान 1190 वें नंबर पर है. इस गांव की आबादी मात्र 1124 लोगों की हैं.
छोटी पंचायत होने की वजह से यहाँ का एक साल का बजट लगभग पांच लाख रुपए आता है, जो अन्य पंचायतों के मुकाबले काफी कम है.
दिलीप बताते हैं कि जब दो साल पहले मैं स्मार्ट सिटी की बात सुना करता था, तब मैं ये सोचता था कि हर कोई सिटी को ही स्मार्ट बनाने में क्यों लगा है. जबकि देश की 80 प्रतिशत आबादी आज भी गांवों में ही रहती है.
उन्होंने कहा फिर मैंने प्रधान बनने के बाद सोचा क्यों ना अपने गांव को ही स्मार्ट बनाया जाए.
दिलीप ने बताया कि अपने गांव को स्मार्ट बनाने के लिए उन्हें जहां भी मौका मिलता था वो कुछ नया सीखने के लिए चले जाते थे. ताकि उनका गांव किसी भी सुविधा से वंचित ना रह सके.

साभार- गांव कनेक्शन