Vallari Chandrakar : इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ बेटी ने किसान बन संवारा अपना भविष्य

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Vallari Chandrakar : गांव वालों के लिए बनी प्रेरणा

Vallari Chandrakar : एक तरफ जहां हमारे देश के नौजवान खेती से पलायन कर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की 27 वर्षीय वल्लरी चंद्राकर ने अपनी मोटी कमाई वाली इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर खेती में अपना भविष्य तलाशा है.

महिला इंजीनियर वल्लरी चंद्राकर ने आज अपने गांव को खेती में अलग पहचान दिला दी है. इस गांव में बड़े तो बड़े, अब युवा वर्ग भी खेती को ही अपना भविष्य बना रहा है.
गांव को बनाया खेती का हब
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबहरा के सिर्री पठारीमुड़ा की रहने वाली वल्लरी चंद्राकर ने अपने गांव को खेती के हब के रूप में विकसित करने के लिए इंजीनियरिंग के अनुभवों का बखुबी उपयोग किया हैं.
आपको जानकर यह हैरानी होगी कि वल्लरी कृषि की आधुनिक पद्धति टपक के जरिए करीब 50 एकड़ की भूमि में खेती कर रही हैं.
वल्लरी बताती हैं कि 1 एकड़ भूमि की खेती से करीब 60 हजार से 1 लाख रूपये तक मुनाफा हो जाता हैं जबकि पूरी 50 एकड़ खेती से उन्हें लाखों का मुनाफा होता है.
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आपको बता दें कि अब वल्लरी की इस मुहिम से गांव के 70 किसान भी जुड़े गए हैं और हर माह अच्छा-खासा पैसा कमा रहे हैं.

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खेती की ब्रिगेड के सात सदस्य हैं हिस्सा
Vallari Chandrakar : वल्लरी की टीम में 7 युवा सदस्य हैं, और ये सभी इंजीनियरिंग या मार्केटिंग फील्ड के हैं. इन सभी की युवा वल्लरी के आइडिए को अमलीजामा पहनाने में अहम भूमिका रहती है
 खास बात यह है कि इन लोगों ने भी अपने-अपने फील्ड की अच्छे खासे पैकेज की नौकरी छोड़कर खेती को अपना भविष्य बना लिया है. टीम में वल्लरी इकलौती महिला सदस्य हैं.
खेती के लिए छोड़ी नौकरी
वल्लरी चंद्राकर ने वर्ष 2012 में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वो एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हो गई, जहां उन्होंने दो साल तक नौकरी की.
इसके बाद वह एक यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक के पद पर लगी, जहां उन्हें 70 हजार रूपये सैलरी मिलती थी.
लेकिन जब वल्लरी एक बार छुट्टीयों में अपने घर आई तो गांव में खेती की स्थिति देखकर बहुत अंचभित हो गई.
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उन्होंने देखा कि उनके गांव में आज भी किसान दशकों पुराने तौर तरिके से खेती कर रहे हैं. और गांव के युवाजन लोग तेजी से खेती से मुंह मोड़ रहे हैं.
ये सब देखकर वल्लरी ने ठाना कि अब वह खुद अपने गांव की खेती में सुधार लाएंगी. और फिर उन्होंने एक दिन अचानक नौकरी छोड़कर अपने गांव में वापस खेती करने की ठानी.

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विदेशों तक है सब्जी की डिमांड
Vallari Chandrakarवल्लरी चंद्राकर के गांव में टमाटर, सेम, खीरा, करेला, लौकी, मिर्च, बींस, शिमला मिर्च की खेती की जाती है.
सब्जी की किस्म बहुत अच्छी होने के कारण इन सब्जियों की डिमांड छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार के अलावा दुबई तक में है. यहां दर्जनों कुंटल सब्जी का उत्पाद होता है.
बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा दे रही वल्लरी
युवती वल्लरी चंद्राकर खाली समय में गांव के बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा भी देती हैं. वह अपने इंजीनियरिंग के अनुभवों को बच्चों के साथ साझा  करती हैं, ताकि उनमें कौशल विकास भी किया जा सके.
इस बारे में वल्लरी कहती है कि बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देने के पीछे मकसद यह है कि बच्चें समय के साथ तकनीक से तालमेस बैठा सके.

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