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“नौरू” दुनिया का सबसे छोटा देश जहां की 90 फीसदी आबादी है मोटी

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नौरू
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आस्ट्रेलिया महाद्वीप में बसा ”नौरू” दुनिया का बड़ा ही दिलचस्प देश है, लेकिन शायद ही कोई इस देश का नाम जानता होगा.
यह विश्व का सबसे छोटा स्वतंत्र गणराज्य और दुनिया में सिर्फ एकमात्र ऐसा गणतांत्रिक राष्ट्र है जिसकी कोई राजधानी नहीं है.
इस देश के बारे में एक नहीं कई रोचक बातें हैं, जो इस देश को दूसरे देशों से जुदा बनाती हैं. आइए जानते हैं इस खास देश की कुछ खास बातें
दुनिया का सबसे छोटा स्वतंत्र देश
नौरू देश दुनिया का सबसे छोटा स्वतंत्र देश है. इसका क्षेत्रफल केवल 21 वर्ग किमी में फैला हुआ है.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2007 में इसकी जनसंख्या महज 13,528 पाई गई थी.
गौरतलब है कि इस देश की जनसंख्या में 41 % आबादी 15 वर्ष से कम है, जबकि 2 प्रतिशत आबादी ही 60 वर्ष से अधिक है.
इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि 15 वर्ष पहले जन्मे बच्चों से ही इस देश की आबादी बढ़ी है. इससे पहले इस देश की आबादी बहुत कम रही होगी.
नौरू
फोटो साभार- डेली मेल
90 फीसद लोग मोटे
इस देश की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां के करीब 90 फीसद लोग मोटे हैं. इसे देश का खान-पान कहिए या आबो-हवा. यहां मोटापा जन्म से ही बच्चों को अपनी चपेट में लेने लगता है.
सरकार की जनसंख्या बढ़ाने पर जोर
नौरू सरकार ने 2025 तक देश की जनसंख्या 17,887 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
इसके साथ ही सरकार किसी भी नागरिक को देश से बाहर भेजना नहीं चाहती. इसके लिए सरकार नागरिकों को देश में फास्फेटखनिज व्यापार में अच्छा रोजगार देती है.
आपको बता दें कि वर्ष 2001 से 2004 तक देश से करीब 1500 नागरिक पलायन कर चुके थे. इसके बाद से सरकार का प्रयास रहा है कि देश का कोई भी नागरिक देश से बाहर न जाए. इसी कारण पिछले पांच सालों में इस देश से पलायन पूरी तरह से रूक चुका है.
नौरू
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पूरी आबादी शहरों में बसी
इस देश की सारी आबादी समुद्र के किनारे ही बसी हुई हैं. इस देश में गांव जैसा कुछ भी नहीं. जो पहले कभी गांव हुआ भी करते थे वो भी अब पूरी तरह लोगों के बिना सुनसान हो चुके हैं.
विवादित देशों को देता है मान्यता
इस देश की नीति भी अलग ही तरीके की है. ये देश किसी भी विवादित देश को मान्यता दे देता है, अर्थात उस देश के साथ अपने रिश्ते और संपर्क बनाए रखता है. इसे इस देश की कूटनीति कहिए या उसका स्वाभाविक व्यवहार.
इसके अलावा यह किसी भी देश के विवादों में नहीं पड़ता, अपने में ही मस्त रहता है. और सभी देशों के लाभ से अपनी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को निरंतर बढ़ाता रहता है.