नेपाल- देश का पहला समलैंगिक विवाह हुआ पंजीकृत

फोटो साभार-हिन्दुस्तान टाइम्स
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नेपाल में एक व्यक्ति के द्वारा ट्रांसजेंडर महिला से शादी करने के बाद उसे कानून रूप से पंजीकृत कराने का मामला सामने आया है. यह इस तरह का देश का पहला मामला है जब किसी व्यक्ति ने ट्रांसजेंडर औरत से शादी की है. हालांकि नेपाल में अभी तक किसी भी तरह के संमलैंगिक रिश्तों में शादी ना करने का कोई कानून नहीं बना है.
हिंदुस्तान टाइम्स पर छपि खबर के मुताबिक ट्रांसजेंडर औरत का नाम मोनिका शाही नाथ है जो कानूनी तौर पर तीसरे लिंग के रूप में पहचानी जाती हैं. इन्होंने इसी साल के मई महीने में 22 वर्षीय रमेश नाथ योगी से शादी की थी. जिसे पिछले महीने ही इन दोनों ने पश्चिमी नेपाल के दादलेधुरा जिले के अपने घर में पंजीकृत कराया है.
मोनिका ने प्रेस कॉन्फ्रेस में अपने विवाह प्रमाण पत्र को दिखाते हुए कहा कि मैंने अपने पति रमेश नाथ योगी के साथ अपनी शादी को सफलतापूर्वक पंजीकृत करा लिया है.
उन्होंने कहा कि यह मेरा एक तरह का प्रयास है. जो नेपाली सरकार को हम लोगों को भी ध्यान में रखते हुए कानून में बदलाव करने की सिफारिश करता है. मोनिका ने कहा कि मेरे जैसे अन्य लोगों को भी उस व्यक्ति से शादी करने का अधिकार होना चाहिए, जिसे वे पसंद करते हैं.
गौरतलब है कि नेपाल का कानून 2015 में विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बावजूद भी अभी तक समलैंगिक यौन संबंधों पर चुप है. जबकि समलैंगिक विवाह के बारे में खुद वहां की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित कर इस पर विचार करने के लिए कहा था.
नेपाल में यौन अल्पसंख्यकों की ओर से काम करने वाले ब्लू डायमंड सोसाइटी के अध्यक्ष पिंकी गुरुंग ने कहा कि यह शादी उनके आंदोलन के लिए एक उपलब्धि है. उन्होंने कहा कि यह अभी एक शुरूआत है हमें सरकार से अपने सुमदाय के लिए वैध विवाह कानून बनवाना है.
वहीं इस बारे में गृह मंत्रालय के प्रवक्ता दीपक कफले ने कहा कि समलैंगिकता या तीसरे लिंग विवाह की वैधता पर पंजीकरण के बाद भी सवाल उठाया जा सकता है अगर यह मौजूदा कानूनों के खिलाफ हुआ है.

ट्रांसजेंडर मोनिका के पति रमेश नाथ योगी पहले से ही शादीशुदा है जिससे 2 बच्चें भी हैं. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस जोड़े को बहुपत्नी के आरोपों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि नेपाल में एक व्यक्ति कानूनी तौर पर दो पत्नियां को एक साथ नहीं रख सकता.

हालांकि यह बात भी सच है कि दक्षिण एशिया में समलैंगिकता पर पहले से ही नेपाल की सबसे प्रगतिशील नीतियां रही हैं.
2013 में नेपाल ने ही सबसे पहले तीसरे लिंग के विकल्प के साथ नागरिकता शुरू की थी.