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Saudi Arab On Islam : पैगंबर साहब के इस्लामी शिक्षा के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाएगा सउदी अरब

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saudi arab on islam

Saudi Arab On Islam : इस्लामिक कानून में सबसे उपर कुरान को माना जाता है

Saudi Arab On Islam : अपनी धार्मिक कट्टरता की पहचान बना चुका सउदी अरब बीते कुछ दिनों से इस्लाम के नाम पर चल रहे नियम- कानून में बदलाव करने की दिशा में अपने देश में काम कर रहा है.

बीबीसी पर छपि रिपोर्ट के अनुसार हाल के दिनों में कुछ मुस्लमानों द्वारा इस्लाम के नाम पर जिस तरह दुनिया के विभिन्न देशों में जानलेवा हमले किए गए वो काफी आहत भरा है.
इसी धार्मिक दुष्प्रचार को रोकने के लिए सउदी अरब एक ऐसी संस्था तैयार करने जा रहा है जो पैगंबर मोहम्मद द्वारा दी गई शिक्षा के ग़लत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए मुहिम चलाएगा.
इस मुहिम की पुष्टि करते हुए सऊदी के शाह सलमान ने मदीना में धार्मिक संगठन को तैयार करने का फरमान जारी कर दिया है.
Saudi Arab On Islam : आपको बता दें कि इस संगठन में दुनिया भर के तमाम देशों के इस्लाम धर्म के जानकारों को शामिल किया गया है.
यह जानकार इस्लाम में पैगंबर साहब द्वारा लिखी गई हर इबादत पर बड़ी ही बारीकि से रिसर्च करेंगे और उनसे होनी वाली छेडछाड़ पर भी गंभीरता से चर्चा करेंगे.
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सऊदी के सूचना मंत्रालय ने बताया कि जानकार किसी भी ऐसी इबारत को निकलवाएंगे जिसमें इस्लामी शिक्षा की ग़लत व्याख्या की गई हो. और जिनका इस्तेमाल हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा हो या आगे किया जा सकता हो.
आपको बता दें कि इस्लामिक कानून में सबसे उपर कुरान को माना जाता है. मुसलमानों का मानना हैं कि क़ुरान ही अल्लाह की भेजी अन्तिम और सर्वोच्च पुस्तक है.
Saudi Arab On Islam : ऐसा माना जाता है कि इस पुस्तक में वो सब बातें हैं जो अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद से कही थी.
इसके बाद इस्लामिक क़ानून का दूसरा स्त्रोत सुन्नाह यानि हदीस को माना गया है. हदीस में वो बातें हैं जो इस्लाम के जानकारों ने पैगंबर मोहम्मद के रहन-सहन, आदतों से निकाली हैं.
हदीस की व्याख्या अलग-अलग वक़्त में इस्लाम के जानकार अपनी-अपनी समझ के अनुसार करते रहे हैं. जिस कारण इस्लाम में कई तरह के परिवर्तन हुए.

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आतंकी संगठनों और समाज के प्रति गलत इरादें रखने वाले लोग ने भी यह काम किया. उन्होंने ने भी अपने हित के लिए कुरान की आयतों में लिखे गए कुछ हिस्सों में छेड़छाड़ कर उसे बदल दिया है. और काफी हद तक इन लोगों ने आम नागरिकों को धर्म के नाम पर बलगाने की कोशिश में सफल भी हुए हैं.
कहा जाता है कि अल-क़ायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी समूहों ने कुछ हिस्सों को अपनी तरह तोड़ मोड़कर अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल किया है.
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इस्लाम के इसी दुष्प्रचार को रोकने के लिए सउदी सरकार ने अपनी तरफ से इस पहल की शुरूआत की है.
सऊदी अरब की ये पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस्लाम के पवित्र स्थलों में से दो यहीं मौजूद हैं.
हालांकि यह संगठन कैसे काम करेगा इसकी कोई जानकारी अभी तक सउदी सरकार की तरफ से नहीं दी गई है. लेकिन इसकी इस कोशिश से उन लोगों को झटका जरूर लगेगा जो अभी तक इस्लाम के नाम पर अपनी अमानवीय घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं.

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