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न्यूयार्क-भारतीय मूल के छात्रों ने बनाया नकली सामान पहचानने वाला ऐप

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दुनिया भर के बाज़ारो में ज्यादा मुनाफा कमाने के चलते आजकल व्यापारियों ने असली के नाम पर नकली सामान बेचने का धंधा शुरू कर दिया है. आम जनता असली सामान के नाम पर अपना निवेश करती है लेकिन उनको नकली दे दिया जाता है.
जनता को ठगने का ये धंधा धीरे-धीरे पूरे वैश्विक बाजार में फैल चुका है.
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले भारतीय मूल के छात्रों ने कुछ हद तक जनता को ठगने से बचाने के लिए एक नया मोबाइल ऐप विकसित किया है. इन छात्रों ने नकली प्रोडक्ट्स की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम ऐप तैयार किया है.
इस ऐप के माध्यम से लोग आसानी से कपड़े, चमड़े के प्रोडक्ट्स , इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने और जूतों मे असली व नकली के बीच का अंतर पता लगा सकते हैं. जिसके बाद हर व्यक्ति को इस ऐप के जरिए  आसानी से अपना निवेश सही वस्तुओं पर करने में मदद मिलेगी.

इस ऐप में 3 लाख वस्तुओं का डेटा उपलब्ध कराया गया है.

यह ऐप 14 अगस्त को कनाडा के नोवा स्कोटिया, हैलिफ़ैक्स में ज्ञान डिस्कवरी और डाटा माइनिंग के वार्षिक केडीडी सम्मेलन में पहली बार प्रस्तुत किया गया.
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के भारतीय मूल के छात्र अशलेश शर्मा, विद्युत श्रीनिवासन, और सुब्रमण्यम द्वारा इस ऐप को तैयार किया गया है.
इस ऐप के बारे में न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लक्ष्मीनारायण सुब्रमण्यम ने जानकारी दी की इसकी विश्वसनियता 98% से अधिक है. इस प्रणाली में Entrupy इंक का इस्तेमाल किया गया है. जिसकी वजह से नकली उत्पादों का पता लगाना आसान है.
उन्होंने कहा कि इस ऐप की मदद से हम रोज़ के इस्तेमाल में आने वाली वस्तुओं की कंपनी व उनकी गुणवत्ता को अपने स्मार्टफोन के माध्यम से पहचान सकते है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम के नाम से शुरू हुआ ये ऐप प्रमाणिकता निर्धारित करने के लिए वस्तुओं की छवियों का विश्लेषण करके अपभोक्ता को वास्तविक परिणाम देता है. इसे स्मार्टफोन या टैबलेट (आईओएस) पर भी खोला जा सकता है.
ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको पहली बार इसे खोलने के लिए ऑनस्क्रीन संकेतों का पालन करना पड़ेगा.
शोधकर्ताओं ने बताया कि नकली सामान दुनिया भर के बाज़ारो में एक बड़ी समस्या है जिससे की सभी उच्च मूल्य वाले उत्पाद प्रभावित हो रहे हैं.