Home विदेश सउदी अरब में औरतों की तकदीर बदलेगा प्रिंस सलमान का ‘Vision 2030’

सउदी अरब में औरतों की तकदीर बदलेगा प्रिंस सलमान का ‘Vision 2030’

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Modi Government Triple Talaq Ordinance
PC - New York Times(DemoPIC)

Vision 2030 : सउदी अरब में महिलाओं के लिए 80 हजार नई नौकरी

Vision 2030 : हम जब भी सउदी अरब का नाम लेते हैं तो हमें वहां की उंची इमारतों के अलावा बुर्खे में ढ़की औरतों का एक गुमनाम सा चेहरा भी जहन में आने लगता है.

एहसास होता है कि रईस शेखों के देश में कितनी जिल्लत से भरी है वहां कि महिलाओं की जिंदगी.सउदी अरब में महिलाओ के लिए सपने देखना, और उनको पूरा करना तो मानो जैसे उनके लिए कयामत हो.
मगर अब लगता है कि उनकी ये बदहाल दशा बहुत जल्द सुधरने वाली है. बदलते समय के साथ शायद सउदी अरब में भी अब महिलाओं की जंजीरों से जकड़ी तस्वीर बदल दी जाएगी.
तभी तो सउदी प्रिंस मों बिन सलमान ने देश में महिलाओं की दशा बदलाव की नींव रखने को तैयार हो गए हैं.
गौरतलब है कि इस बदलाव पर अमल करने के लिए एक नई कोशिश के रूप में शुरुआत कर दी गई है.
हाल ही में आए रियाद सरकार द्वारा पहली बार देश के नेशनल स्टेडियम में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देना इस ओर साफ इशारा करता है. ये फैसला सरकार ने स्टेडियम को बने हुए 87 साल के मौके पर लिया था.
नौकरियों में भी महिलाओं के लिए खुले द्वार
सउदी अरब की सीविल एवियेशन ट्रेनिंग बॉडी ने एक नए कोर्स की शुरुआत की है, जिसमें वो वहां की महिलाएं को एयर ट्रैफिक कंट्रोल का काम सिखाएंगे .
शुरूआत में इसकी ट्रैनिंग 18-25 वर्षों के बीच की 80 महिलाओं को कराया जाएगा. जिसके लिए आने वाले रविवार को प्रवेश परीक्षा रखी गई है.
सउदी अरब की सरकार की नई कोशिश है कि वह देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या को तेजी से बढ़ाए. फिलहाल वहां अभी यह प्रतिशत 23 है जिसे वह 28 तक पहुंचाना चाहते हैं.
Vision 2030 के अंतर्गत वहां की सरकार महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए 80 हजार नई नौकारियां लाने की तैयारी में है.
वहीं 2012 से 2016 के बीच प्राइवेट नौकरियों में भी सउदी महिलाओं की भागीदारी 130 प्रतिशत तक बढ़ी है.

इन कोशिशों से ये साफ है सउदी सरकार की मंशा देश में महिलाओं की स्थिती में सुधार लाना है.

आपको बता दें कि सउदी अरब एकलौता ऐसा देश है जहां महिलाओं को ड्राइविंग तक करने की अनुमति नहीं है.
सउदी अरब जैसे कट्टर देशों के महिलाओं के प्रति ये बदली सोच से दुनिया के बाकी रूढ़ीवादी देशों को भी ये संदेश जाएगा कि कट्टर मुस्लमान होने का मतलब महिलाओं का हक छिनना नहीं है.