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Zainab Rape Case : इस मामले में पाकिस्तान से बहुत कुछ सीख सकता है भारत

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Zainab Rape Case

Zainab Rape Case : घटना के डेढ़ माह के अंदर ही अपराधी को मिली सजा

Zainab Rape Case :  भारतीय न्यायव्यवस्था की कानूनी प्रक्रिया में होने वाली जटिलताओं के कारण अपराधियों को तय समय में सजा ना दिए जाने के मामले में अक्सर आलोचना होती रहती है .

लंबे चलते मुकदमे और महंगी न्यायव्यवस्था के कारण पीड़ितों का मनोबल फैसला सुनाए जाने के अंत तक इत कदर टूट जाता है कि वो इंसाफ मिलने के बाद भी खुद को हारे हुए महसूस करने लगते हैं.
ऐसा सिर्फ आम मामलों में ही नहीं देखने को नहीं मिलता बल्कि जंघन्य अपराधों में भी हमें मुल्जिम की सजा का इंतजार करते वर्षों बीत जाता है.
वहीं इन सब मामलों में की जाने वाली सुनवाई की प्रक्रिया में हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने हमें एक बहुत अच्छी सीख दी है .
दरअसल कल पाकिस्तान की लाहौर स्थित एक आतंकरोधी अदालत ने नाबालिग जैनब के साथ हुए बलात्कार और हत्या के संगीन मामले में सिर्फ डेढ़ माह के अंदर ही अपराधी को चार बार फांसी पर चढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.
पाकिस्तानी कोर्ट ने इस मामले को बेहद संगीन करार देते हुए इस केस के मुख्य अभियुक्त इमरान अली को चार आरोपों के तहत मौत की सजा, एक उम्र कैद, सात साल की कैद और 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
वहीं एक साथ एक ही आरोपी को इतनी सजा सुना कर पाकिस्तान ने पूरी दुनिया के सामने बेहतरीन उदाहरण पेश किया है.
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क्या था पूरा मामला
बता दें कि बीते 4 जनवरी को कुरान पढ़ने गई सात साल की जैनब अंसारी कसूर लापता हो गई थी, जिसके 5 दिन बाद यानि की 9 जनवरी को जैनब का मुर्दा शरीर कचरे के ढेर में पड़ा मिला. जब शव का पोस्टमार्टम किया गया तो जैनब के साथ कुकर्म की पुष्टि की हुई थी.
मासूम जैनब के साथ हुए इस दर्दनाक हादसे से पूरा देश सकते में आ गया. इस बेदर्द घटना के खिलाफ पाकिस्तान के वकील, डॉक्टर, पत्रकार, सिविल सोसायटी व सेलिब्रिटी समेत हर नागरिक में काफी आक्रोश देखने को मिला जिसने देश के अंदर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ हिंसा का रुप भी ले लिया था.
सिर्फ पाकिस्तान के शहरों में ही नहीं दूसरे देशों में भी इस मामले की कड़ी निंदा की गई. और जल्द से जल्द इस मामले में आरोपी को कठोर सजा देने की मांग की गई थी.
कैसे हुई आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए कई जांच एजेंसियों की मदद ली और साथ ही जैनब के घर के ढाई किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 20 से 45 साल के सभी पुरुषों की डीएनए जांच कराई गई थी.
इस जांच में जुनैद के घर के नजदीक रहने वाले इमरान अली की मेडिकल रिपोर्ट जैनब के रेप कैस से मैच हो गई, जिसके बाद पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए 23 जनवरी को आरोपी इमरान को गिरफ्तार कर लिया.
वहीं पुलिस ने जब अपनी कार्रवाई की शुरूआत की तो इमरान के खिलाफ कई और मामले भी सामने आए जिसमें वो अपहरण, बलात्कार, हत्या, आतंकवाद के कई और मामलों में भी दोषी पाया गया. जांच में पता चला कि इमरान एक सीरियल किलर है और अश्लील फिल्में देखकर बच्चों को अपना शिकार बनाता था.
आरोपी की घिनोने अपराधों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने फांसी की सजा के साथ ही 25 साल की सजा और 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है.
पिता को मिला न्याय
जैनब के आरोपी को सजा मिलने के बाद पिता मोहम्मद आमिन ने राहत की सांस ली है. बुधवार को लाहौर हाई कोर्ट में 9 घंटे चली सुनवाई में जैनब के चाचा और भाई सहित 56 लोगों ने आरोपी के खिलाफ गवाही दी थी, वहीं फॉरेंसिक रिपोर्ट और पॉलिग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट के बाद इमरान पर मुकदमा और भी पुख्ता हो गया. साथ ही पुलिस की पूछताछ में आरोपी इमरान ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था.
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भारत मे हर घंटे होता 4 रेप
नेश्नल क्राइम रिकोर्ड ब्यूरो(NCRB) द्वारा जारी किए गए 2016 के आंकड़ों को देखें तो रोजाना 21 घंटों में भारत के अंदर 39 महिला से रेप के अपराध दर्ज किए गए,रिपोर्ट के अनुसार पिछले 9 सालों में हर घंटे 4 रेप केस दर्ज किए जाते हैं.
वहीं मानव अधिकार वॉच ने एक छोटा सा सर्वे करते हुए खुलासा किया था कि भारत में हर साल 100,000 नाबालिगों में से 7200 बच्चे दुष्कर्म का शिकार होते हैं.
यही नहीं 2016-2017 के इकॉनामिक सर्वे के अनुसार भारत की महिलाओं के साथ होने वाले अपराध में लगभग 60 फीसदी मामले ऐसे हैं जिन्होंने कोर्ट का चेहरा ही नहीं देखा वहीं बाकी मामलों में सजा मिलने में कतार में कोसों दूर रह खड़े हुए हैं.
जबकि सेक्स ट्रॅफिकिंग और नाबालिगों के खिलाफ अपराध पर दुनिया भर में अध्ययन करने वाली मैपलक्रोफॉफ़्ट रिपोर्ट नें भारत को 7 वें स्थान पर रखा है.
गौरतलब है कि हमारे भारत में भी रेप केस के लिए कई कड़े कानून हैं और आरोपियों को सजाएं भी मिली हैं लेकिन निर्भया गैंगरेप और गुड़िया के दुष्कर्म जैसे कई ऐसे मामलों में सजा देने और कार्रवाई करने में भारत का कानून अब भी लेटलतीफी का शिकार है.

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