Sign Language Course : साइन लैंग्वेज में कोर्स कर बना सकते हैं सुनहरा और बेहतर करियर

Sign Language Course
demo pic
Sign Language Course : सांकेतिंक भाषा को सीखने पर देश के साथ-साथ विदेशों में भी नौकरी के बेहतर ऑप्शन मौजूद हैं.

Sign Language Course : आजकल 12वीं पास करते ही छात्र कोई ऐसा कोर्स करना चाहते हैं जिसमें  ज्यादा समय भी ना लगे और उन्हें आगे चलकर मोटी सैलरी वाली नौकरी भी आसानी से मिल सके.

इन्हीं युवाओं को ध्यान में रखते हुए आज हम एक ऐसे कोर्सास के बारे में बताएंगे जो भविष्य में करियर बनाने में बेहतर ऑप्शन हो सकता है, और उस कोर्स का नाम है साइन लैग्वेज
 बता दें कि साइन लैंग्वेज मूक-बधिरों की भाषा है जिसे सीख कर आपके कॅरियर के नए रास्ते खुल सकते हैं.
इस लैंग्वेज को सीखने के बाद आप देश में ही नहीं बल्कि बाहर भी नौकरी पा सकते हैं. साथ ही इस लैंग्वेज कोर्स को करने के बाद आपको शिक्षा, समाज सेवा, सरकारी क्षेत्र और बिजनेस से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट, मेंटल हेल्थ सरीखे बहुत-से क्षेत्रों में नौकरी मिल सकती है.
साइन लैंग्वेज का काम
साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर का काम सामने वाले की बातों को सुनकर, उसके शब्दों को तय संकेतों में ढालकर दूसरे को बताना होता है. हालांकि यह भाषा संकेत अंग्रेजी में सबसे ज्यादा प्रचलित है.
बता दें कि स्कूल-कॉलेजों में मूक-बधिर छात्रों के साथ-साथ सामान्य छात्र भी सांकेतिक भाषा सीखते हैं. इस कोर्स में स्नातक करने वाले छात्र शिक्षा के क्षेत्र में अपना कॅरियर बना सकते हैं.
यह भी पढें – गर्मियों में छात्रों के लिए मोदी सरकार ने शुरू किया ‘डिजिटल इंडिया इंटर्नशीप’ प्रोग्राम, मिलेगा 10000 रुपए मानदेय
साइन लैंग्वेज शिक्षकों की बढ़ती मांग
आपको यकीन नहीं होगा लेकिन भारत में मूक-बधिर लोगों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है और यह सांकेतिक भाषा उनकी प्राकृतिक भाषा है. यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में इस सांकेतिक भाषा और इसे जानने वालों की मांग बहुत बढ़ रही है.
आमदनी  और रोजगार का अच्छा स्रोत
इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने वालों के पास अच्छी आमदनी का भी मौका होता है. साइन लैंग्वेज सीखने के बाद आपको शिक्षा, समाज सेवा क्षेत्र, सरकारी संस्थानों और बिजनेस से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट्स, मेंटल हेल्थ, मेडिकल और कानून सहित बहुत से क्षेत्रों में काम मिल सकता है.
खासकर यदि आप विदेशी एनजीओ या मेडिकल क्षेत्र से जुड़ते हैं तो शुरुआती स्तर पर 20 से 25 हजार रुपये तक आसानी से कमा सकते हैं. जो कि आगे कुछ सालों में अनुभव के बाद बढ़ भी जाता है.
कैसे करें पढ़ाई
गौरतलब है कि देश में मूक-बधिरों को पढ़ाने के फिलहाल दो तरीके हैं, पहला मौखिक संवाद और दूसरा इंडियन साइन लैंग्वेज.
देश के लगभग 500 स्कूलों में दूसरे तरीके से सिखाने की सुविधा है लेकिन प्रशिक्षित शिक्षकों के अभाव में देश में बड़ी संख्या में जन्म से बधिर बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है.
साइन लैंग्वेज में तीन से चार महीने के कोर्स के अलावा शारीरिक अशक्तता से ग्रस्त बच्चों के शिक्षण के लिए कई अन्य कोर्स भी हैं, जिन्हें पूरा करने के बाद अच्छे रोजगार प्राप्त किए जा सकते हैं.
यह भी पढ़ें – पीएम मोदी के ‘स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप’ के तहत छात्र जीत सकते हैं 2 लाख का ईनाम, ऐसे करें आवेदन
प्रतीकों की हो जानकारी
इस क्षेत्र में प्रोफेशनल बनने के लिए बाधिर और विकलांग छात्रों को विभिन्न प्रतीकों की जानकारी दी जाती है. जिसके इस्तेमाल की विधि भी बताई जाती है.
सभी कोर्स दो से चार माह अवधि के होते हैं जिनमें बेसिक और एडवांस लेवल की जानकारी अलग-अलग चरणों में दी जाती है. साथ ही उन्हें ज्ञान-विज्ञान की दुनिया से जुड़ने के लिए संकेतों के माध्यम से गहन अध्ययन भी कराया जाता है.
यही नहीं इस लैंग्वेज कोर्स में कम्यूनिकेटिव इंग्लिश को भी जगह दी गई है. साथ ही इंफॉर्मेशन एंड कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी, ह्ययूमन राइट फॉर डिसएबिलिटीज, मास मीडिया, ब्रेल रीडिंग एंड राइटिंग जैसे कई कोर्सों को सिखाने के सांकेतिक प्रतीक बताए जाते हैं.
जिनकी मदद से विकलांग छात्रों को इंग्लिश बोलने जैसे और कई तरह की कला के आवश्यक गुण सिखाया जा सके.