हे भगवान ! अब मरने के बाद भी आधार नंबर जरूरी

ई-आधार
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भारत में मरने के बाद मृतक की पहचान के लिए अब आधार नंबर जरूरी होगा. गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना के मुताबिक मृत्यु पंजीकरण के लिए मृतक की पहचान के रूप में आधार नंबर को अनिवार्य किया गया है.
मंत्रालय के तहत काम करने वाले महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल) के कार्यालय ने कहा है कि आधार के इस्तेमाल से मृतक के रिश्तेदारों, आश्रितों की ओर से दिए गए ब्योरे को सत्यापित करने में आसानी होगी.
कायार्लय की तरफ से कहा गया कि आधार नंबर के जरिए पहचान संबंधी धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी.
इसके अलावा, मृतक व्यक्ति की पहचान साबित करने के लिए ढेर सारे दस्तावेज पेश करने से भी निजात मिलेगा. महापंजीयक ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 1 अक्टूबर से इसे लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है.
हालांकि यह नियम जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के लोगों पर लागू होगा. इन राज्यों के लिए अलग से एक तारीख अधिसूचित की जाएगी.
अगर आवेदन करने वाले को मृतक का आधार नंबर या ईआईडी पता नहीं हो, तो उसे एक प्रमाणपत्र देना होगा कि उसकी जानकारी के मुताबिक मृतक व्यक्ति के पास आधार नंबर नहीं था. ऐसा ना करना पर उसका आवेदन रद्द कर दिया जाएगा.
आवेदन करने वाले की तरफ से अगर किसी भी तरह की गलत जानकारी दी गई तो वो काननून अपराध की श्रेणी में आएगा. उसे आधार कानून- 2016 और जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कानून- 1969 के तहत अपराधी मान लिया जाएगा.
मृतक के जीवनसाथी या अभिभावकों के आधार नंबर के साथ आवेदन करने वाले का आधार नंबर भी लिया जाएगा.
गौरतलब है कि महापंजीयक कार्यालय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जन्म एवं मृत्यु के मुख्य पंजीयक की गतिविधयां को एकजुट करने वाला केंद्रीय सरकार का अक उपक्रम है.

भाषा के इनपुट से