ड्रोन उड़ाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत, जानिए सभी महत्वपूर्ण बातें

Drone Registration In India

Drone Registration In India : ये रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन पोर्टल ‘डिजिटल स्काई’ के द्वारा किया जा रहा है.

Drone Registration In India : नागर विमानन मंत्रालय ने ये ऐलान किया है कि, ‘शनिवार से देश में ड्रोन उड़ाने के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है.’ ये रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन पोर्टल ‘डिजिटल स्काई‘ के द्वारा किया जा रहा है.

जानकारी के लिए बता दें कि सरकार ने अगस्त में ही ड्रोन उड़ाने के लिए नियम तय कर दिए थे. ड्रोन उड़ाने से संबंधित ये नियम 1 दिसम्बर से लागू भी किये जा चुके हैं.
आपके लिए यहाँ ये जानना बेहद ज़रूरी है कि सरकार द्वारा निर्धारित इन नियमों के अनुसार ड्रोन का इस्तेमाल करने वालों को अपने ड्रोन का एक बार रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.
इसके अलावा उन्हें ड्रोन के पायलट और मालिक से जुड़ी सभी ज़रूरी जानकारी भी जमा करवानी होगी.
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इस मुद्दे पर नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट कर लिखा है कि, “हमें ये बताते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है कि हमनें ड्रोन उड़ाने की अनुमति देने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल ‘डिजिटल स्काई’ की आज से शुरुआत कर दी है. यह प्लैटफॉर्म अब चालू हो गया है.”
सुरेश प्रभु ने ड्रोन के फाायदे गिनाते हुए कहा कि इसके आ जाने के बाद से भारत में इंफ्रास्ट्रकचर,किसान,सड़क,रेलवे, इंडस्ट्रीस जैसे अन्य कई क्षेत्रों में काफी मदद मिलेगी.
 ऐसा माना जा रहा है कि इस योजना को एक महीने के अंदर-अंदर शुरू कर दिया जायेगा.
बनाया जायेगा ‘एयर कॉरिडोर’
प्रत्यरोपण के लिए एक जगह से दूसरी जगह अंग भेजने के उद्देश्य के लिए अस्पतालों में ‘ड्रोन पोर्ट’ बनाए जाएंगे, जहां ड्रोन के उतरने और उड़ान भरने की विशेष सुविधा होगी.
इसके अलावा ये भी जानकारी सामने आई है कि इन ड्रोन के लिए हवा में विशेष ‘एयर कॉरिडोर’ बनाए जाएंगे जिससे कम से कम समय में अंग को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सके.
जल्द शुरू होगी ड्रोन 2.0 की योजना
ड्रोन का इस्तेमाल शुरू होने के बाद जल्द ही ड्रोन 2.0 पर भी काम शुरू कर दिया जायेगा. बताया जा रहा है कि अभी ड्रोन के नियंत्रण के लिए दूर नियंत्रण कक्ष में बैठे पायलटों को ही अनुमति दी गई है.
लेकिन ड्रोन 2.0 में ऑटोमेटेड ड्रोन की अनुमति भी दी जाएगी. यानि कि ड्रोन 2.0 के नियंत्रण के लिए किसी पायलट की जरूरत नहीं होगी.

Drone Registration In India

ड्रोन की सहायता से किये जा सकेंगे कई मुश्किल काम
अंगों के प्रत्यर्पण के साथ-साथ ड्रोन की मदद से कई ऐसे काम भी बड़ी ही आसानी से किये जा सकेंगे जिन्हें अबतक करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था.
जैसे शादी की यादगार तस्वीरें लेना वगैरह. हालाँकि यहाँ ये बात गौर करने वाली है कि अगर किसी ने भी ड्रोन से सम्बंधित नियमों का उलंघन किया तो उसपर जुर्माना भी लग सकता है.
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ध्यान रखें ये बात:
*ड्रोन के संचालन से पहले संबंधित प्राधिकार में पहले इसका पंजीकरण कराना अनिवार्य है.
*ड्रोन को केवल एक तय दृष्टिसीमा तक ही उड़ाया जा सकेगा और सिर्फ दिन में ही ड्रोन को उड़ाया जा सकता है.
*नियम के अंतर्गत आने वाले किसी-किसी परिसर में रात को भी 200 फीट की ऊंचाई तक उड़ाए जा सकेंगे ड्रोन.
इनके लिए लेनी पड़ेगी परमिशन
-‘ग्रीन जोन्स‘ में उड़ान भरने के लिए पोर्टल या ऐप के माध्यम से उड़ानों के समय और स्थान की परमिशन लेनी होगी.
– ‘पीले जोन‘ में उड़ने के लिए परमिशन आपके पास रहेगी लेकिन ‘लाल क्षेत्र’ में ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
– नोप्रमिशन-नो-टेकऑफ (एनपीएनटी) की नीति के तहत, बिना अनुमित लिए ड्रोन ऑपरेशंस को शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
जान लीजिये ये महत्वपूर्ण नियम
*ड्रोन आयातक दूरसंचार विभाग से पुष्टि कराएगा कि ड्रोन गैर लाइसेंस फ्रीक्वेंसी पर काम करता है.
*नैनो के इतर ड्रोन के आयात के लिए डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर डीजीसीए की अनुमति लेनी होगी.
*डीजीसीए की अनुमति के बाद ही विदेश व्यापार महानिदेशालय आयात के लिए लाइसेंस जारी करेगा.
*स्थानीय ड्रोन निर्माताओं को भी दूरसंचार विभाग से अनापत्ति पत्र लेना होगा, तभी मिलेगी यूआईएन.
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अलग-अलग प्रकार के ड्रोन
 नैनो ड्रोन –  ये ड्रोन 250 ग्राम या इससे कम वजन वाला होता है. नैनो ड्रोन 50 फीट की ऊंचाई (अधिकतम) तक उड़ान भर सकता है.
माइक्रो ड्रोन – इस श्रेणी में 250 ग्राम से 2 किलो वजन वाले ड्रोन आते हैं. इन ड्रोन की उड़ान के लिए यूआईएन लेनी होगी, लेकिन 200 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिए परिचाल परमिट की भी ज़रूरत होगी.
छोटे ड्रोन  – इस केटेगरी में 2 से 25 किलो के ड्रोन आते हैं. इन ड्रोन का इस्तेमाल कीटनाशक के छिड़काव में किया जा सकेगा.
मध्यम ड्रोन –  इस श्रेणी में 25 किलो से 150 किलो के वजन वाले ड्रोन आते हैं. खनन, तेल-गैस की खोज में इनका इस्तेमाल होता है.
 बड़े ड्रोन –  इसमें 150 किलोग्राम से अधिक वजन वाले ड्रोन आते हैं और इनका प्रयोग औद्योगिक कार्यों में होता है.

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