31 मार्च से अब ट्रेनों में नहीं बिकेगा महंगा खाना,बिल न देने पर खाना होगा फ्री

Food Bill In Train

Food Bill In Train : ट्रेनों में वेंडरों ने बिल नहीं दिया तो खाना होगा फ्री,टिप भी नहीं देना

Food Bill In Train : भारतीय रेलवे ने अपने यात्रियों को सफर के दौरान सहूलियत देने में एक कदम और आगे बढ़ा दिया है.

दरअसल 31 मार्च 2019 से ट्रेनों मे मिलने वाले खाने-पीने के सामानों पर आपको ज्यादा चार्ज नहीं देने होंगे,क्योंकी जल्द ही अब से हर पेंट्री कार वाली ट्रेनों में खाने की चीजों की रेट लिस्ट सार्वजनिक रुप से लगाई जाएगी.
वहीं वेंडरों को हर सामान की खरीद पर ग्राहकों/यात्रियों को बिल देना होगा,अगर आपको आपके सामान का बिल नहीं मिलता तो आपका खाना बिल्कुल मुफ्त होगा.इस बारे में खुद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सभी जोनों को निर्देश जारी किया है.
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पीओएस मशीन रखना अनिवार्य
रेल मंत्री ने अपने निर्देश में कहा की 31 मार्च 2019 तक सभी ट्रेनों में पीओएस मशीने उपलब्ध करा दी जाएं ताकी यात्री जब कोई खाने का सामान खरीदे तो उसे तो उसे तुरंत ही बिल दे दिया जाए.
बता दें की इस मशीने में हर सामान का दाम पहले से ही फीड रहेगा जिससे वेंडर चाहकर भी यात्रियों से ओवरचार्जिग नहीं कर पाएंगे.
यही नहीं यात्रियों को खानपान का सामान बेचने वाले जब मशीन से बिल देंगे तो उसी पर ‘नो टिप प्लीज’ भी लिखा होगा जिसका मतलब साफ होगा की किसी भी यात्री को टिप नहीं देना है. 
जानकारी के लि बता दें की ये मशीने सिर्फ कैटरिंग स्टाफ को ही नहीं बल्कि टीटीई को भी दी जाएंगी ताकी टिकट का उचित हिसाब वो वसूल सकें.
वाई फाई कनेक्टिविटी वाले स्टेशनों की संख्या बढ़ेगी
गौरतलब है की अभी सिर्फ 723 रेलवे स्टेशनों पर ही मुफ्त वाईफाई की सुविधा है जिसे बढ़ाकर अब 2 हजार स्टोशनों पर किए जाने का आदेश दिया गया है.
रेल मंत्री ने मशीनों पर वाईफाई का काम जल्द पूरा करने में संभागीय रेलवे मैनेजरों को पुरस्कार का प्रस्ताव दिया.

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सिंगल हेल्पलाइन नंबर होगा जारी
बैठक में ये भी निर्णय लिया गया है की 1 फरवरी 2019 से यात्रियों की सुविधा के लिए सभी गैर सुरक्षा शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर विकसित किया जाए.
अभी रेलवे से जुड़ी हर तरह की शिकायत और पूछताछ के लिए यात्रियों को अलग अलग नंबरों पर कॉल करना पड़ता है.
बता दें की रेलमंत्री की मौजूदगी में हुई इस बैठक में सभी जोन के रेलवे जनरल मैनेजर और रेलवे बोर्ड के सदस्य मौजूद थे जबकि  मंडलों के डीआरएम से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की गई