रोजाना 1450 करोड़ तो सिर्फ ब्याज चुका रही है केंद्र सरकार ,जानें पूरा बहीखाता

Unregulated Deposit Schemes Ordinance
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Indian Government Revenue Expenditure 2018 : हम लोगों को सब्सिडी देने पर ही सरकार हर रोज 600 करोड़ खर्च करती है 

Indian Government Revenue Expenditure  2018 : भारत इस समय दुनिया की सबसे तेज गति से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है इसमें कोई शक नहीं, मगर आप अगर ये सोचते होंगे की ऐसा होने से हमारी सरकारों को अरबों खरबों का फायदा हो रहा है तो जरा संभलिए

ये बात सच है कि अर्थव्यवस्था बढ़ने से हमारी सरकार और हम लोगों को रोजगार,विदेशी निवेश जैस कई तरह के लाभ होते हैं.
लेकिन आपके लिए ये जानना जरूरी है कि भारत का आज भी आमदनी का आधा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है.
जी हां, हमारी सरकार जो भी करों से पैसा कमाती हैं उसका बड़ा हिस्सा वर्ल्ड बैंक से लिए हजारों करोड़ों रुपए की किस्त अदा करने में चला जाता है.
ताजा वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मोदी सरकार लिए गए कर्ज का सिर्फ ब्याज चुकाने के लिए औसतन प्रतिदिन 1450 करोड़ रुपये खर्च कर रही है.
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PIB इंडिया पर छपे लेख के मुताबिक नवंबर तक के महीने तक वित्त मंत्रालय ने अपनी इस चालू वित्त वर्ष बहीखातों की जानकारी दी है.
इसके मुताबिक मौजूदा चालू वित्त वर्ष में सरकार के कुल राजकोषीय खर्च से ब्याज भुगतान की हिस्सेदारी 3,48,233 करोड़ रुपये रही है.
इस तरह सरकार ने हर दिन ब्याज चुकाने पर 1450 करोड़ रुपये खर्च किए गए.बता दें कि केवल हम लोगों को सब्सिडी देने पर ही सरकार ने 2,19,046 करोड़ रुपये खर्च किए हैं जो की प्रतिदिन 600 करोड़ रुपए बनता है.
आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया
वित्त मंत्रालय ने बताया है कि नवंबर 2018 तक सरकार को कुल 8,96,583 करोड़ रुपये मिले हैं.
जिसमें टैक्स के रूप में 7,31,669 करोड़ रुपये और गैर टैक्स के रूप में 1,38,637 करोड़ रुपये शामिल हैं.
वहीं इस वित्त वर्ष में सरकार को विनिवेश से 15,810 करोड़ रुपए मिले, हालांकी ये तय लक्ष्य से काफी कम है.
अब बात खर्च की करें तो सरकार ने नवंबर 2018 तक 16,13,208 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है,
इसमें से राजस्व खाते में 14,21,778 करोड़ रुपये खर्च किए गए और पूंजी खाते में 1,91,430 रुपये खर्च किए हैं.
वहीं इस दौरान केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को भी 4,31,963 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं.
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सरकार के बहीखाते को देखकर आप अंदाजा लगा ही सकते हैं कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था कितने पानी में है.
जानकारों की माने तो इस वित्त वर्ष में सरकार का रोजकोषीय घाटा अनुमानों के मुताबिक थोड़ा अधिक हो सकता है.
इसकी सबसे बड़ी वजह 2019 में होने वाले लोकसभा के आम चुनाव है जिस वजह से सरकार के ऊपर करों में कटौती करने और खर्च को बढ़ाने का दबाव रहता है.

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