बिहार की धरती पर बना देश का अब तक का सबसे पॉवरफुल रेल इंजन, जानें इसकी पूरी खासियत

Indian Railway Powerful Engine

Indian Railway Powerful Engine : जानें , इंजन से जुड़ी सभी खास  बातें

Indian Railway Powerful Engine : चंपारण सत्ताग्रह के 100 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी कई विकासशील योजनाओं का आज उद्घाटन करेंगे.

बता दें कि आज से 100 साल पहले महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण जिले से ही अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह की शुरूआत करी थी.
यहां गाधी जी ने हजारों भूमिहीन मजदूर और गरीब किसानों को अग्रेंजों द्वारा किए जा रहे जुल्म के खिलाफ एक साथ खड़े हाने का जज्बा भरा था जोआगे चलकर पूरे देश में एक विशाल जन आंदोलन बन गया था.
भारतीय आजादी के इतिहास में चंपारण सत्याग्रह की बड़ी भूमिका मानी जाती है इसी वजह से आज इसके 100 साल पूरे होने पर देश के प्रधानमंत्री खुद वहां मौजूद रहेंगे और खई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, जिसमें अब तक का सबसे शक्तिशाली रेल इंजन देश को समर्पित किया जाना शामिल है.
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इस वजह खास है ये रेल इंजन
रेलवे का यह इंजन बिहार के माधेपुरा रेल इंज कारखाने में निर्मित किया गया है.इस इंजन की सबसे खास बात यह है कि ये मालगाडियों को 120 किलोमीटर और सवारी गाड़ियों को 200 किलोमीटर की रफ्तार से खींचने में सक्षम है.
बता दें कि इस इंजन को फ्रांसीसी कंपनी ऑल्सटाम की मदद से संयुक्त रूप से तैयार किया गया है. इस इंजन की मैकसिमम पॉवर 12,000 हॉर्स पावर है जो अब तक का सबसे शक्तिशाली भारतीय रेल इंजन माना जा रहा है.
यहीं नहीं इस इंजन के आने के बाद भारत अब रूस, चीन, फ्रांस,जर्मनी के साथ उन देशों की सूची मे शामिल हो गया है जिनके पास इतना पॉवरफुल इंजन मौजदू है.
जानें , इंजन से जुड़ी अन्य बातें
1. रेलवे के इस इंजन की रफ्तार सर्दियों के कोहरे में भी कभी कम नहीं होगी.
2. भारी माल ढुलाई के लिए अब रेलवे को दो इंजन की जरूरत नहीं पड़ेगी यह अकेला ही उन्हें खीचनें में सक्षम रहेगा.
3. इस इंजन की पटरी से उतरने की संभावना भी औरों के मुकाबले बेहद कम है.
4 दुर्घटना की स्थिति में इस इजन में ऑटोमेटीक ही इमरजेंसी ब्रेक लग जाएगा.
4. इंजन के 90 प्रतिशत पार्ट्स स्वदेशी तकनीक से निर्मित है जो सभी प्रकार की पटरियों पर दौड़ सकता है.
6. अभी तक रेलवे के पास केवल 6000 हॉर्स पॉवर का इंजन ही मौजदू था.
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फ्रांस सरकार से हुआ था करार
गौरतलब है कि इस इंजन को बनाने वाला मधेपुरा का लोकोमोटिव फैक्ट्री भारतीय रेलवे का पहला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रोजेक्ट है, जिसे तैयार करने में कुल 1300 करोड़ की लागत आई है.
इसके लिए 2015 में भारत और फ्रांस सरकार के बीच करार हुआ था. इस प्रोजेक्ट में फ्रांस की मल्टीनेशनल कंपनी एल्सटॉम की 74 फीसदी और इंडियन रेलवे की 26 फीसदी हिस्सेदारी है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले 11 साल में यहां 800 इंजन बनेंगे, जिन्हें भारतीय रेल सिस्टम में शामिल किया जाएगा.