रेपो रेट के अलावा डिडिटल ट्रांजेक्शन के बारे में भी RBI ने लिया फैसला, जानें

RBI Policy Repo Rate

RBI Policy Repo Rate : वित्त वर्ष 2018-19 के लिए विकास दर 7.5 प्रतिशत का अनुमान लगाया है

RBI Policy Repo Rate : भारतीय रिजर्व बैक की समीक्षा बैठक में आज बुधवार को मौजूदा ब्याज दरों को लेकर फैसला किया गया.

बैंक के मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट में कोई बदलाव ना करते हुए इसे 6.5 प्रतिशत पर ही बरकरार रखने का निर्णय लिया है.
बता दें कि ये जानकारी आरबीआई गर्वनर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में चली 3 दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद सामने आई है.
रेपो रेट के अलावा रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया है और इसे भी 6.25 फीसदी रखने का फैसला किया है.
हालांकी इन सब के बावजूद बैंक ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए विकास दर 7.5 प्रतिशत और दूसरी छमाही की महंगाई दर 2.7 % रहने का अनुमान लगाया है.
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बदलाव ना करने की वजह
मीटिंग खत्म होने के बाद मिली जानकारी के मुताबिक आरबीआई ने कहा है कि अंतराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल के दामों में आई गिरावट और महंगाई के उम्मीद के मुताबिक कम रहने की वजह से उसने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है.
आर्थिक नीति के जानकारों के मुताबिक रिजर्व बैंक के इस फैसले से आम जन को कोई भी घाटा या नुकसान नहीं हुआ है.
हालांकी बैंक ने आउटलुक कैलिब्रेटिंग टाइटनिंग बरकरार रखा है,इसका मतलब यह है कि आगे रेपो दर में इजाफा किया जा सकता है. .
डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए बनेगा लोकपाल
देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन को देखते हुए रिजर्व बैंक ने समीक्षा बैठक में अलग से लोकपाल लागू करने का फैसला किया है. मिली खबरों के अनुसार जनवरी के आखिरी तक इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा.
फैसले के बाद सेंसेक्स लुढ़का
बता दें कि जैसे ही रिपो रेट को लेकर आरबीआई का फैसला आया उसके बाद सेंसेक्स नीचे आ गया और करीब 250 अंक गिरकर 35,884 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी भी 85 अंक लुढ़ककर 10,784 पर बंद हुआ.
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क्या होता है रिपो रेट
रेपो रेट उस दर को कहा जाता है जिसपर रिजर्व बैंक अन्य सभी बैंको को कर्ज देता है और इसी दर में कुछ बढ़ाकर बैंक फिर अपने ग्रहकों को लोन देता है.
यानि की जब आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढाया जाएगा तो समझ लीजिए की आपको मिलने वाले लोन की दरों में बढ़ोत्तरी होगी वहीं जब इसे वो घटाएगा तो आपके ईमआई पर लगने वाली दर कम हो जाएगी और आप फायदे में आ जाएंगे.
मगर आमूमन यह देखा जाता है कि बैंक रिपो रेट की बढ़ी हुई ब्याज दरों को तो तुरंत लागू कर देते हैं. मगर जब इसे घटाया जाता है तो वो इसे ग्रहाकों की ईमआई में लागू करने में जानबूझकर देरी करते हैं.

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