अब स्पेस टेक्नोलॉजी की मदद से होगी मां गंगा की सफाई

Space Technology Cleaning Ganga River

Space Technology Cleaning Ganga River : इस टेक्नोलॉजी की मदद से गंगा को साफ करने में मदद मिलेगी.

Space Technology Cleaning Ganga River : भारत में गंगा की पवित्रता को लेकर जितनी ज्यादा लोगों की आस्था है ठीक उसके बराबर ही यहां के सिस्टम में भ्रष्टाचार पर लोगों का विश्वास.

अब आप सोच रहें होगे कि यहां भ्रष्टातार और गंगा के कनेक्शन का क्या मतलब तो जनाब आप तो जानते ही होंगे कि इस नदी के नाम पर जितना ज्यादा सरकारों ने खजाना लूटा है उसमें तो शायद हमारी गंगा मइया की किस्मत ही बदल जाती.
खैर ये सब बाते छोड़कर ये जान लीजिए कि अब नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) मिशन के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.
ऐसा माना जा रहा है कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से गंगा को साफ करने में काफी मदद मिलेगी.
दरअसल न्यूज एजेंसी भाषा की खबर के मुताबिक एक शीर्ष अधिकारी ने बताया है कि स्पेस टेक्नोलॉजी के जरिए नदियों का बेहतर डाटा मिल सकेगा और इसके जरिए प्रोजेक्ट की योजना बनाने और उसकी कंट्रोलिंग में भी मदद मिलेगी.
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वहीं एक इसरो के अधिकारी ने बताया कि geo-spatial और रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नदियों की वॉटर क्वॉलिटी जांचने के लिए किया जाएगा.
खबर के अनुसार नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के डायरेक्टर जनरल राजीव रंजन मिश्रा ने कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस की मदद लेने के अलावा सर्वे जनरल ऑफ इंडिया के डाटा का भी इस्तेमाल किया जाएगा.
आपको बता दें कि डायरेक्टर जनरल ने ये जानकारी बता दें, मिश्रा ने यह जानकारी गुरूवार G-Governance of Namami Gange programme through Geospatial Technology नाम के इवेंट में दी थी.
नहीं रखा जा रहा है गंगा माँ का ख्याल !
आपको याद तो होगा ही कितने जोश के साथ पीएम द्वारा इस योजना की शुरुआत की गई थी लेकिन सब इसको लेकर NGT ने एक ऐसी रिपोर्ट दी है जो मोदी सरकार की पोल खोलने के लिए काफी है.
दरअसल, जुलाई महीने में NGT यानि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि बेशक केंद्र की ओर से गंगा की सफाई को लेकर पैसा दिया गया है लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसको लेकर कोई काम नहीं हो रहा है जिसके चलते गंगा और गन्दी हो चुकी है.
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पीठ ने उस समय कहा था कि गंगा की सफाई में कोई सुधार ना होने की वजह से इसकी मौजूदा स्थित की नियमित निगरानी की जरूरत है.
इसके अलावा एनजीटी ने आदेश दिया कि गंगा में प्रदूषण के बारे में जमीनी स्तर पर लोगों की राय जानने के लिए सर्वेक्षण कराए जाने की जरूरत है.
सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने तो यहां तक कह दिया कि सरकार ने गंगा सफाई पर 7,000 करोड़ रूपये खर्च कर दिया है लेकिन गंगा अभी भी पर्यावरण के लिए एक गंभीर विषय बनी हुई है.