बदले लें अपनी जुबान, 444 साल बाद इलाहाबाद फिर हुआ ‘प्रयागराज’

UP Govt Allahabad Renamed Decision

UP Govt Allahabad Renamed Decision : अकबर के समय में प्रयागराज का नाम बदलकर किया गया था इलाहाबाद

UP Govt Allahabad Renamed Decision : मुगलसराय का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय करने के बाद अब योगी सरकार ने यूपी के प्राचीन और प्रमुख जिले का नाम बदलने का फैसला किया है.

उत्तर प्रदेश की प्राचीन और संगम नगरी के नाम से मशहूर इलाहाबाद को योगी सरकार ने प्रयागराज करने का निर्णय अपनी कैबिनेट में आज पास कर दिया है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी जिसमें इलाहाबाद (Allahabad) का नाम बदलकर फिर से प्रयागराज (Prayagraj) कर दिया गया है.
माना जा रहा है कि 444 साल बाद एक बार फिर इलाहाबाद को प्रयागराज के नाम से जाना जाएगा.
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UP Govt Allahabad Renamed Decision

शनिवार को योगी ने कही थी नाम बदलने की बाद
गौरतलब है कि शनिवार को सीएम योगी जब कुंभ मेले का जाएजा लेने के लिए इलाहाद पहुंचे थे तो वहां उन्होंने नाम बदलने को लेकर चल रही बातचीत का उल्लेख किया था.
उन्होंने बताया था कि इस विषय पर कई संतो, अंखाड़ा परिषद और मार्गदर्शक मंडल की तरफ से एक प्रस्ताव आया है जिसके बारे में सरकार गंभीरता से विचार कर रही है.
राज्यपाल राम नाइक ने तो पहले ही इस प्रस्ताव पर अनुमोदन दे दिया है.
पुराणों में क्या है प्रयागराज का महत्व
दरअसल प्राचीन पुराणों से लेकर रामचरित मानस में इलाहाबाद को प्रयागराज के नाम से ही उल्लेखिक किया गया है. भगवान श्री राम जब वनवास के दौरान श्रृंग्वेरपुर पहुंचे तो वहां प्रयागराज का ही जिक्र किया गया है.
सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण मत्स्य पुराण के 102 अध्याय से लेकर 107 अध्याय तक में इस तीर्थ के महात्म्य का वर्णन है.
उसमें साफ लिखा गया है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है जहां गंगा और यमुना बहती हैं. यही नहीं यहां के संगम जल से पहले राजा-महाराजाओं का अभिषेक भी हुआ करता था.
मुगलकाल में बदला नाम
मुगलकालीन के दौरान लिखी गई कई किताबों में इस बात का जिक्र है कि मुगल सल्तनत के तीसरे बादशाह अकबर ने करीब 1574 में इस शहर का नाम प्रयागराज से बदलकर इलाहाबाद किया था.
किताबों के मुताबिक अकबर ने करीब 1574 में इस शहर में किले की नींव रखी थी और इसी के बाद एक नया शहर बसाया गया जिसका नाम इलाहाबाद रखा गया था.
विपक्ष ने दर्ज कराई आपत्ति
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नाम बदलने को सरकार का परंपरा और आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है.
उन्होंने ट्वीट कर कहा कि प्रयाग कुंभ का नाम केवल प्रयागराज किया जाना और अर्द्धकुंभ का नाम बदलकर ‘कुंभ’ किया जाना भारतीय परंपरा और आस्था के साथ खिलवाड़ है.
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UP Govt Allahabad Renamed Decision

नाम बदलने से क्या होगा
हमारी भारतीय राजनीति में प्रचीन स्थलो, शहर,सड़कों का नाम बदलना एक फैशन सा बन गया है. कोई भी पार्टी जब सत्ता में आती है तो सबसे पहले काम नामकरण और नाम बदलना ही करती है.
दरअसल यहां गलती इन पार्टीयों की नहीं बल्कि हमारी है क्योंकी हमें विकास बाद में चाहिए अपना धर्म और जाति के बारे में पहले सोचना है.
अगर सामने वाला हमारी जाति या धर्म के लिए अच्छा काम करता है तो चुनाव में हमारी हाथ की ऊंगली उसी के चुनाव चिन्ह के पास जाकर रूकेगी,चाहे उसने अपने कार्यकाल में सिर्फ नाम बदलने का ही काम क्यों ना किया हो.
मगर यहां हम ये क्यों नहीं सोचते कि क्या नाम बदलने से लोग उस शहर,गांव या स्टेशन को ज्यादा तवज्जो देने लगेगें.
इतिहास गवाह है आज भी लोगों के जुबान पर किसी भी जगह का पुराना नाम ही रहता है. अगल विश्वाश ना हो तो थोड़ा समाज के बीच जाकर आज मा लीजिएगा.