Wireless Varanasi : भगवान भोले की नगरी हुई वायरलेस, बिजली के लटकते तारों से मिला शहर को छूटकारा

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Wireless Varanasi : खंभो पर लटके तारों को किया गया अंडरग्राउंड

Wireless Varanasi : दुनिया का सबसे पुराना शहर और प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी अब वायरलेस शहर घोषित हो गया है.

जी हां, हिंदू धर्म के लिए विशेष मान्यता रखने वाले शहर वाराणसी में अब आपको खंभो पर लटकते हुए बिजली के तारों का जंजाल नहीं देखने को मिलेगा.
दरअसल पूरे शहर के बिजली के तारों को सरकार द्वारा अंडरग्राउंड करा दिया गया है जिससे अब शहरवासी भी खूश हैं.
बता दें कि पौराणिक नगरी होने के अलावा वाराणसी इस समय मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय क्षेत्र भी है. इस लिहाज से उसकी चमक धमक को बनाए रखने के लिए सरकार की तरफ से कई विकासशील योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है.
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शहरवासियों को मिलेगा लाभ
बिजली विकास योजना (IPDS) परियोजना का संचालन करने वाली कंपनी पावरग्रीड द्वारा वाराणसी के 16 स्क्वॉयर किलोमीटर इलाके में फैले सभी बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने का काम किया गया है.
वहीं इस परियोजना का सबसे ज्यादा फायदा उन 50000 दुकानदारों को मिलेगा जिनके सिर पर बिजली के लटकते तार ग्रहकों की खरीदारी करने में अड़चन पैदा करते थे.
आसान नहीं था तारों को अंडरग्रांउड करने का काम
गौरतलब है कि बिजली के तारों का अंडरग्रांउड करने के काम को पूरा करने में करीब 2 साल लग गए. वहीं इस काम को करने में संबंधित विभाग को काफी परेशानी उठानी भी पढ़ी.
ऐसा इसलिए क्योंकी वाराणसी शहर के अंदर संकरी गलियों की संख्या ज्यादा है जिस लिहाज से सभी सड़कों पर वाहनों की आवाजही ज्यादा रहती है और साथ ही काम करने के लिए जगह की कमी भी बनी रहती थी.
इसके अलावा अंडरग्राउंड बीएसएनएल की लाइंस, पानी की पाइप लाइंस और सीवेज पाइप लाइंस ने भी परेशानी पैदा करी क्योंकि इन पाइप लाइंस का कोई भी मैप किसी विभाग के पास मौजूद नहीं था. जिसके कारण काम के दौरान कुछ पाइप लाइंस डैमेज भी हो गईं जिससे तारों के बिछाने में बाधा उत्पन्न हुई और समय खराब हुआ.
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अब तक का सबसे जटिल शहर वाराणसी
इस काम को पूरा करने के बाद पावरग्रिड प्रोजेक्ट मैनेजर सुधाकर गुप्ता ने कहा कि वाराणसी में आईपीडीएस के लिए बिजली के तारो का अंडरग्राउंड करना अन्य देशों के मुकबाले काफी जटिल था.
उन्होंने बताया कि जनसंख्‍या के लिहाज से दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल और तुर्की के कुछ शहर नदी के किनाने बसे हैं और यहां काम करना कठिन माना जाता है लेकिन वाराणसी में काम करने के बाद एहसास हुआ कि यह अब तक का सबसे जटिल और थका देने वाला काम था.
केंद्रीय उर्जा मंत्री की निगरानी में हो रहा था काम
आपको बता दें कि इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय उर्जा मंत्री पीयूष गोयल खुद लगातार निगरानी रखे हुए थे और समय समय पर काम के प्रगति से जुड़ी सूचनाएं भी संबंधित अधिकारीयों से हासिल करते रहते थे .
दरअसल सितंबर 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस योजना का उद्घाटन किया था जिसके बाद प्रॉजेक्ट पर काम दिसंबर 2015 में शुरू कर दिया गया था.
हालांकि इस काम को पूरा करने के लिए 1 साल का समय तय किया गया था मगर संकरी गलियों की वजह से काम को पूरा होने में 2 साल का वक्त लग गया.