डायबिटीज और वायु प्रदूषण के बीच है संबंध, चीनी शोध में हुआ खुलासा

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Air Pollution Causes Diabetes : डायबिटीज का खतरा वायु प्रदूषण के कारण भी होता है.

Air Pollution Causes Diabetes : डायबिटीज यानी मधुमेह आज के दौर की एक आम बन गई है, देश हो या फिर पूरा विश्व 40 की उम्र से ऊपर वाले हर तीसरे में से एक व्यक्ति इस बिमारी से पीड़ित है.

हम में से ज्यादातर यही जानते हैं की डायबिटीज होने का मुख्य कारण ज्यादा मीठा खाना है, लेकिन हमारी इस धारणा को चीन की एक रिपोर्ट ने गलत साबित कर दिया.
दरअसल चीन में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि डायबिटीज का खतरा वायु प्रदूषण के कारण भी होता है.
रिपोर्ट में ये बताने की कोशिश करी गई कि वायु प्रदूषण और डायबिटीज के बीच सीधा संबंध है.
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इसके मुताबिक एक क्यूबिकमीटर वायु की मात्रा में जब पीएम 2.5 की मात्रा 10 माइक्रोग्राम बढ़ जाती है तो ऐसी हवा में सांस लेने वाले लोगों में डायबिटीज का खतरा 16 फीसदी बढ़ जाता है.
बता दें की हवा में मौजूद पीएम 2.5 प्रदूषण पैदा करने वाला सबसे खतरनाक कण होता है.
साइज में छोटा होने के कारण यह फेफड़ों के भीतर जाकर लंग कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को भी पैदा करता है.
इस अध्ययन को चीन के फुवाई हॉस्पिटल और अमेरिका के इमोरी यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने मिलकर किया था,जिसमें 15 प्रांतों से 88 हजार सैंपल जुटाए गए थे
हालांकी डायबिटीज बिमारी के उपचार को लेकर हाल ही मे भारत में भी एक अध्धयन किया गया था.
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के उस्मानिया जनरल अस्पताल के डॉक्टरों के साथ मिलकर कुछ शोधकर्ताओं की एक टीम ने डायबिटीज के इलाज का आध्यात्मिक तरीका ढूंढ निकाला है.
इस शोध के शोधकर्ताओं का कहना है कि, “भगवद्गीता में अर्जुन और भगवान कृष्ण के बीच हुई बातचीत को बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है.
खास तौर पर बेहद पुरानी बीमारियों के इलाज के तौर पर जैसे डायबिटीज.” शोधकर्ताओं का इशारा भगवद्गीता के श्लोकों की ओर है जो जीवन में विभिन्न परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताते हैं.
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शोधकर्ताओं के अनुसार, “पवित्र बुक भगवद गीता नकारात्मक स्थितियों की पहचान करती है और उनसे लड़ने के लिए इंसान को सकारात्मक तरीका भी बताती है. भगवान कृष्ण ने बताया और अर्जुन ने उसका पालन भी किया है.”
इस रिसर्च के बाद ऐसा माना गया है कि, भगवद्गीता में सिखाई गयी बातों का उपयोग कर हमें कई तरह की बिमारियों का सामना करने में मदद मिल सकती है.
जानकारी के लिए बता दें कि यह ख़ास अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित हुआ है.

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